Male Loneliness: आज की तेज़ और भागदौड़ भरी जिंदगी में पुरुषों में अकेलापन धीरे-धीरे एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञ इसे ‘मेल लोनलीनेस’ कहते हैं। अक्सर पुरुष अपनी भावनाओं को छिपाते हैं और मदद मांगने से कतराते हैं, जिससे यह स्थिति उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाती है। शोध बताते हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुष अपने मन की बात कम साझा करते हैं, और यही उन्हें अकेलेपन की जकड़न में फंसा देता है।
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अकेलापन क्यों पुरुषों के लिए खतरनाक है (Male Loneliness)
पुरुषों में अकेलेपन की जड़ें सामाजिक और सांस्कृतिक धारणाओं में छिपी हैं। बचपन से ही लड़कों को यह सिखाया जाता है कि “मजबूत बनो” और “आंसू मत बहाओ।” ‘मर्द को दर्द नहीं होता’ जैसे विचार पुरुषों से उनके भावनात्मक हक छीन लेते हैं। डिजिटल दुनिया ने भी अकेलेपन को बढ़ावा दिया है। मोबाइल और सोशल मीडिया के बावजूद पुरुषों के पास कोई ऐसा भरोसेमंद साथी नहीं होता, जिससे वे अपनी चिंताओं को साझा कर सकें।
पुरुषों में अकेलेपन के लक्षण
अकेलेपन हमेशा उदासी के रूप में नहीं दिखाई देता। इसे पहचानने के कुछ प्रमुख संकेत हैं:
- काम में डूब जाना: घर के खालीपन या बेचैनी से बचने के लिए पुरुष जरूरत से ज्यादा काम में लग जाते हैं।
- चिड़चिड़ापन और गुस्सा: अकेलापन अक्सर गुस्से, झुंझलाहट और छोटी-छोटी बातों पर रिएक्शन के रूप में बाहर आता है।
- सामाजिक दूरी: दोस्तों से मिलने-झुलने में कमी, फोन कॉल्स न उठाना या अकेले समय बिताने की आदत बढ़ना।
- नींद और भूख में बदलाव: बहुत सोना या नींद न आना, खान-पान में लापरवाही।
- नशीले पदार्थों का सहारा: शराब या अन्य नशीले पदार्थों का इस्तेमाल अकेलेपन के दर्द को कम करने के लिए।
‘सेफ स्पेस’ की जरूरत
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हर पुरुष को एक ऐसा सुरक्षित स्थान चाहिए, जहाँ उसे जज न किया जाए। यह स्थान उन्हें भावनाओं को साझा करने, तनाव कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर देता है। दोस्तों का ग्रुप, हॉबी क्लास या कोई बॉयज गैंग पुरुषों के लिए ऐसा सेफ स्पेस हो सकता है, जहाँ वे बिना किसी डर के खुद को व्यक्त कर सकें।
अकेलेपन से निपटने के उपाय
- संवाद बढ़ाएं: पुराने दोस्तों से जुड़ें, सामान्य बातचीत भी मन हल्का कर सकती है।
- हॉबी अपनाएं: खेल, जिम, पेंटिंग या संगीत जैसी गतिविधियाँ मानसिक ताजगी देती हैं और समान विचारधारा वाले लोगों से मिलने का अवसर देती हैं।
- भावनाओं को स्वीकारें: अकेलापन महसूस करना कमजोरी नहीं, बल्कि सामान्य मानव अनुभव है।
- प्रोफेशनल मदद लें: अगर अकेलापन डिप्रेशन में बदल रहा हो, तो काउंसलर या थेरेपिस्ट से बात करें।
पुरुषों का अकेलापन केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि एक सामाजिक मुद्दा बन चुका है। हमें ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ पुरुष अपनी भावनाओं को साझा करने में शर्म महसूस न करें। याद रखें, मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की निशानी है।
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