Jeffrey Epstein case: हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक किए, जिनमें दुनिया के कई शक्तिशाली लोगों के नाम हैं। ये फाइलें काफी हद तक रेडैक्टेड हैं, लेकिन इनमें भारत के कुछ प्रभावशाली नेताओं और उद्योगपतियों का भी जिक्र आया है। एपस्टीन को 2008 में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के लिए दोषी ठहराया गया था। इसके बावजूद वह दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर लोगों के संपर्क में रहा।
एपस्टीन ने न सिर्फ खुद बच्चों और महिलाओं का यौन शोषण किया, बल्कि उन्हें अपने शक्तिशाली दोस्तों के लिए उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित किया। उनके पास कई निजी द्वीप और घर थे, जहां ये घटनाएं होती थीं। उनके संपर्क और काम करने के तरीकों में शामिल थे वैश्विक व्यापार और राजनीतिक हस्तियाँ, और कथित तौर पर उनके संबंध इजरायल से भी थे।
भारत के नेताओं और उद्योगपतियों के नाम फाइल्स में (Jeffrey Epstein case)
रिलीज़ हुई फाइलों में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और उद्योगपति Anil Ambani का भी नाम आया है। हालांकि, मोदी की ओर से कोई व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन हर्दीप पुरी, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, को इसका सामना करने के लिए भेजा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, पुरी ने एपस्टीन से कई बार मुलाकात की थी।
विश्व स्तर पर इस विषय पर प्रतिक्रियाएं मिश्रित रही हैं। कुछ लोगों ने खुद को किसी भी गलत काम से अलग बताया, भले ही वे ऐसे व्यक्ति के संपर्क में रहे जो पहले से ही यौन अपराधी था। ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार एंड्रयू भी एपस्टीन के सबसे चर्चित और सार्वजनिक रूप से सामने आए “उपयोगकर्ताओं” में शामिल हैं। वहीं, गिस्लेन मैक्सवेल, मीडिया बारन रॉबर्ट मैक्सवेल की बेटी, एपस्टीन के बच्चों और महिलाओं के शोषण में मदद करने के आरोप में जेल की सजा काट रही हैं।
हर्दीप पुरी का बयान और विवाद
हर्दीप पुरी ने भारतीय टीवी पर बयान देते हुए कहा कि उन्हें अब समझ में आया कि एपस्टीन कौन था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि एपस्टीन का अपराध सिर्फ यह था कि वह एक “अंडरएज महिला” के साथ था और “हम में से कई लोगों” ने आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया।
यह बयान काफी विवादित है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी भाषा, जैसे “अंडरएज महिला,” बच्चों और यौन शोषण की गंभीरता को कम करने वाली है। वास्तव में, 9 से 14 साल की लड़कियां पूरी तरह से बच्चे हैं और उनके साथ किया गया शोषण गंभीर अपराध है।
भारतीय मीडिया की प्रतिक्रिया
NDTV की एंकर पद्मजा जोशी ने जेफ्री एपस्टीन के बारे में कहा कि उन्हें गंभीर अपराधों, जैसे नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और बलात्कार के लिए दोषी ठहराया गया था। लेकिन उनके अनुसार, पेशेवर रूप से एपस्टीन एक ‘पावर ब्रोकर’ था, यानी एक ऐसा बिचौलिया जो प्रभावशाली लोगों को आपस में मिलवाता और सत्ता के गलियारों में हो रही घटनाओं पर नजर रखता था। पद्मजा ने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि जिन लोगों का नाम उसने लिया, वे अपने आप उसके द्वीप पर गए।
How shameful could this get? And how truly dystopian. Just listen in . न जाने कितनी लक्ष्मण रेखाएं पार करेंगे बीजेपी की हर हरकत को जायज ठहराने के लिएpic.twitter.com/RUiQ7eZgxZ
— Abhisar Sharma (@abhisar_sharma) February 13, 2026
सोचने वाली बात यह है कि एक महिला एंकर ऐसे घिनौने अपराधी को इस तरह “पावर ब्रोकर” कहकर पेश कर सकती है। जैफ्री एपस्टीन जैसा व्यक्ति समाज के लिए कलंक होना चाहिए, लेकिन उसे इस तरह पेश किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
NDTV के इस प्रसारण में बीजेपी की प्रवक्ता शाज़िया इल्मी भी एंकर के साथ सहमति जताती नजर आईं। यह दर्शाता है कि मीडिया और राजनीतिक हस्तियों के बीच, कभी-कभी गंभीर अपराध को सही साबित करने या उसे सामान्य बनाने की प्रवृत्ति दिखाई देती है।
मीडिया और नैतिक जिम्मेदारी
विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय मीडिया इस मामले में न केवल निष्पक्ष नहीं रहा, बल्कि गंभीर अपराध और सत्ता के गठजोड़ को अलग-अलग करके पेश किया। एपस्टीन मामला पूरी दुनिया में सनसनी मचा चुका है और इसमें शामिल शक्तिशाली लोग सवालों के घेरे में हैं। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
एक मीडिया संस्थान का काम सिर्फ बयान को दोहराना नहीं होता, बल्कि शक्तिशाली लोगों से जवाब लेना और अपराध की गंभीरता को उजागर करना भी होता है। एपस्टीन फाइल्स जैसी खबरें अपराध, सत्ता और सेक्स स्कैंडल को सीधे तौर पर जोड़ती हैं। इसे नजरअंदाज करना या इसे कम महत्व देना, पत्रकारिता की मूल भावना के खिलाफ है।
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