एक ऐसा हेलीकॉप्टर जो 17 साल से अपने मालिक का कर रहा है इंतजार!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 18 Apr 2021, 12:00 AM | Updated: 18 Apr 2021, 12:00 AM

एक हेलीकॉप्टर 17 सालों से अपने मालिक का इंतेजार कर रहा है। बीते 17 सालों से ये हेलीकॉप्टर आसमानों में उड़ने की जगह एयरपोर्ट पर खड़ा है और अब इसकी हालात ऐसी हो गई है कि ये कबाड़े में तब्दील हो गया। लेकिन अब आखिरकार लंबे इंतेजार के बाद ये अपने मालिक को मिलने जा रहा है। 

17 सालों तक चली हेलीकॉप्टर को लेकर लड़ाई

ये मामला जुड़ा है अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद अब्राहिम के करीबियों में से एक माफिया सरगना रोमेश शर्मा से। दरअसल, रोमेश ने हेलीकॉप्टर बीईएलएल-47 एच. सुरेश राव से किराए पर लिया था, लेकिन उसको लौटाया नहीं। 17 सालों तक ये मामला कोर्ट में चला और अब आखिरकार कोर्ट ने इसे इसके मालिक को सौंपने का फैसला सुनाया।

करीब 17 सालों के बाद उच्च न्यायालय ने सफदरजंग हवाई अड्डे पर खड़े इस हेलीकॉप्टर को उसके मालिक एच. सुरेश राव को सौंपने का आदेश दिया है। 

जानिए क्या है पूरा मामला?

ये मामला साल 1996 का है। इस दौरान  दाउद के करीबी रोमेश शर्मा ने आम चुनाव में यूपी के फुलपुर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इन चुनावों में प्रचार के लिए रोमेश ने पुष्पक एविएशन के मालिक एच. सुरेश राव से हेलीकॉप्टर के लिए संपर्क किया। हेलीकॉप्टर का किराया ज्यादा होने की वजह खर्च की सीमा बढ़ रही थीं। इसलिए कहा गया कि वो हेलीकॉप्टर लीज पर उसके नाम कर दें और चुनाव बाद वो इसे वापस लौटा देगा। लेकिन, चुनाव के बाद शर्मा ने हेलीकॉप्टर वापस करने से मना कर दिया। बाद में जबरदस्ती उसे अपने नाम करवाकर मंत्रालय में लाइसेंस के लिए भेज दिया। 

चुनाव प्रचार के लिए लिया, पर वापस नहीं किया

इसके बाद उनके मुवक्किल ने शर्मा के खिलाफ शिकायत की। मामले को लेकर हौजखास थाना में रोमेश शर्मा के खिलाफ केस दर्ज हुआ। इस दौरान शर्मा ने ये दावा किया कि उसने इस हेलीकॉप्टर को खरीदा है। 

मामले में रोमेश शर्मा को स्पेशल कोर्ट ने अदालत ने 2012 में विभिन्न आरोपों में 10 साल सजा सुनाई। साथ में हेलीकॉप्टर सुरेश राव को सौंपने के भी निर्देश दिए थे। लेकिन स्पेशल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर दी। कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट द्वारा शर्मा को दी गई 10 साल कैद की सजा को निलंबित कर दिया और उसको जमानत पर रिहा किया। इसकी वजह से हेलीकॉप्टर रिलीज नहीं हो सका। सजा के खिलाफ रोमेश शर्मा की अपील उच्च न्यायालय में अब भी लंबित है और मई में सुनवाई होने की संभावना है।

सीबीआई ने रोमेश शर्मा के छतरपुर स्थित जय माता दी फार्म हाउस से हेलीकॉप्टर बरामद किया था। इसके कुछ ही दिन बाद ही निचली अदालत ने हेलीकॉप्टर शिकायतकर्ता एच. सुरेश राव को वापस कर दिया। लेकिन इस फैसले के खिलाफ आरोपी शर्मा ने उच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर दी। 

कोर्ट ने अप्रैल 2004 में दाखिल रोमेश शर्मा की अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ये हेलीकॉप्टर केस की प्रॉपर्टी है, ऐसे में इसको CBI अपने कब्जे में रखे। आदेश के मुताबिक CBI ने हेलीकॉप्टर को अपने कब्जे में लिया और एयरपोर्ट पर पार्क कर दिया। जिस पर AAI ने कहा कि हेलीकॉप्टर की पार्किंग शुल्क देना होगा। अधिवक्ता जितेंद्र भारती ने अनुसार 2007 में कोर्ट ने फिर से हेलीकॉप्टर उनके मुवक्किल को सौंपने का आदेश दिया था, लेकिन पार्किंग शुल्क भुगतान के विवाद की वजह कोर्ट के उस आदेश का पालन नहीं हुआ।

अब जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को आदेश दिया कि वो  हेलीकॉप्टर को इसके मालिक एच. सुरेश राव को सौंप दे। साथ में कोर्ट ने हेलीकॉप्टर के मालिक से ये भी कहा कि वो 4 हफ्तों के बीच इसको एयरपोर्ट से हटा लें। 

सीबीआई ने पार्किंग शुल्क देने से किया मना

न्यायालय ने AAI की तरफ से अधिवक्ता दिग्विजय राय द्वारा दाखिल याचिका पर ये आदेश दिया। AAI ने अपनी इस याचिका में CBI को एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर हटाने और पार्किंग का शुल्क देने का आदेश देने की मांग कोर्ट से की थी। इस मामले की जब सुनवाई हुई तो CBI की तरफ से ये कहा गया कि हेलीकॉप्टर से उसका कोई लेना-देना नहीं और ना ही वो इसके लिए पार्किंग शुल्क भरेगी। 

CBI ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश पर उसने सिर्फ हेलीकॉप्टर को एयरपोर्ट पर पार्क किया था। वहीं इस हेलीकॉप्टर के मालिक एच. सुरेश राव ने अधिवक्ता जितेंद्र भारती के जरिए कोर्ट को ये बताया कि वो अभी भी अपने हेलीकॉप्टर को लेने के इच्छुक हैं। जिसके बाद कोर्ट ने AAI को निर्देश दिया कि वो हेलीकॉप्टर इसके मालिक को सौंप दे।कोर्ट ने कहा है कि बात जहां तक पार्किंग शुल्क देने की है, तो इसकी वसूली के लिए AAI उचित आवेदन करें।

‘हम सही थे, इसलिए लड़े’

अब 17 सालों में एयरपोर्ट पर खड़ा हेलीकॉप्टर पूरी तरह बर्बाद हो गया है। लेकिन फिर भी इसको कोर्ट के इस फैसले से हेलीकॉप्टर के मालिक काफी खुश है। उनका कहना है कि हमें खुशी है कि अंतत: हमारी संपत्ति हमको मिल रही है। हम सही थे और इसलिए सालों से लड़ रहे थे। हेलीकॉप्टर से हमारा खास लगाव है।

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