When to Change Engine Oil: इंजन ऑयल गाइड, भारी खर्च से बचने के लिए याद रखें ये बातें

Shikha Mishra | Nedrick News

Published: 29 Jan 2026, 06:08 AM | Updated: 29 Jan 2026, 06:08 AM

When to Change Engine Oil: किसी भी गाड़ी की लाइफ और परफॉर्मेंस उसके इंजन की हेल्थ पर निर्भर करती है। इंजन ऑयल इस मशीनरी का एक ज़रूरी हिस्सा है, फिर भी हम अक्सर इस पर ध्यान नहीं देते। लेकिन हमे समय समय पर गाड़ी का इंजन ऑयल बदलते रहना चाहिए है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते है कि सही समय पर तेल बदलना क्यों ज़रूरी है और आपको कब ज़्यादा सावधान रहना चाहिए।इंजन ऑयल कब बदलें?

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किलोमीटर के आधार पर (Based on Mileage)

आम तौर पर, इंजन ऑयल (Engine Oil) बदलने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपनी कार कैसे चलाते हैं और आप किस तरह का तेल इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए, कन्वेंशनल (मिनरल ऑयल) को हर 3,000 से 5,000 किलोमीटर पर बदलना चाहिए। वही सिंथेटिक तेल (synthetic oil), जो कन्वेंशनल तेल (Conventional oil) से बेहतर क्वालिटी का होता है, 7,500 से 10,000 किलोमीटर तक चल सकता है। इसके अतिरिक्त यदि आप गाड़ी कम चलाते हैं, तब भी तेल खराब हो जाता है। तो इसलिए साल में कम से कम एक बार (या हर 6 महीने में) तेल बदलना जरूरी है, चाहे आपने किलोमीटर पूरे किए हों या नहीं।

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इंजन ऑयल के इन संकेतों पर ध्यान दें (Warning Signs)

कभी-कभी हम अपनी कार में डाले जाने वाले इंजन ऑयल के रंग पर ध्यान नहीं देते, लेकिन अगर ज़्यादा जलने की वजह से यह बहुत ज़्यादा गहरा हो जाता है, तो इससे गाड़ी में दिक्कतें आ सकती हैं। हालांकि, अगर आपको अपने इंजन ऑयल में ये लक्षण दिखें, तो आपको तुरंत अपनी कार को मैकेनिक के पास ले जाना चाहिए: उदाहरण के लिए, अगर तेल बहुत ज़्यादा गहरा और गाढ़ा (दानेदार) हो गया है।

इसी तरह, अगर इंजन सामान्य से ज़्यादा शोर कर रहा है या खड़खड़ाहट की आवाज़ आ रही है, तो इसका मतलब है कि कार को सर्विसिंग की ज़रूरत है। साथ ही, अगर डैशबोर्ड पर ‘चेक इंजन’ या ‘ऑयल प्रेशर’ लाइट जल रही है, तो उस पर भी ध्यान दें। एक और संकेत यह है कि अगर एग्जॉस्ट पाइप से काला या नीला धुआँ निकल रहा है।

तेल बदलने के फायदे

हम अक्सर इंजन ऑयल (Engine oil) बदलने में देरी करते हैं, लेकिन इसे समय पर बदलने से इंजन की लाइफ बढ़ सकती है और पार्ट्स के बीच फ्रिक्शन कम हो सकता है। साफ इंजन ऑयल से फ्यूल एफिशिएंसी (Fuel efficiency) भी बेहतर होती है, क्योंकि इंजन ज़्यादा स्मूथ चलता है और उसे कम मेहनत करनी पड़ती है, जिससे फ्यूल की बचत होती है। इसके अलावा, इंजन ऑयल गर्मी को सोखने में मदद करता है, जिससे इंजन का तापमान बैलेंस बना रहता है। यह भी याद रखना ज़रूरी है कि ऑयल बदलते समय हमेशा ऑयल फिल्टर भी बदलें। नए ऑयल के साथ नया ऑयल फिल्टर इस्तेमाल करने से नया ऑयल जल्दी खराब नहीं होता।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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