Delhi Air Pollution Reason: न पटाखे, न पराली… फिर भी दिल्ली क्यों बनी ‘गैस चेंबर’? जानिए राजधानी की जहरीली हवा की असली वजह

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 12 Nov 2025, 12:00 AM | Updated: 12 Nov 2025, 12:00 AM

Delhi Air Pollution Reason: दिल्ली की हवा एक बार फिर जानलेवा साबित हो रही है। आज सुबह से ही राजधानी घनी धुंध की चादर में लिपटी रही। आसमान धुंधला, सूरज फीका और सांसें भारी  यही रहा आज के दिन का हाल। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 10 बजे तक दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 420 के करीब रहा, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। यानी यह 2025 का पहला दिन है जब राजधानी की हवा इतने खतरनाक स्तर पर पहुंच गई।

दिल्ली के 39 में से 33 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज हुआ। आनंद विहार, वजीरपुर, रोहिणी और द्वारका जैसे इलाकों में तो यह 450 के पार चला गया। इन इलाकों में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए। सबसे चिंता की बात यह है कि दिवाली के पटाखे अब नहीं फूट रहे और पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने के मामले आधे हो चुके हैं, फिर भी हवा का यह हाल है।

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कैसी है दिल्ली की हवा आज? (Delhi Air Pollution Reason)

CPCB के डैशबोर्ड के मुताबिक, आज का औसत AQI 428 तक पहुंच गया, जो दिसंबर 2024 के बाद सबसे खराब स्तर है। हवा में मौजूद PM2.5 कण 300 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से ऊपर दर्ज किए गए — जो फेफड़ों के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं। कल रात तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया, जो इस सीजन की सबसे ठंडी सुबह थी। इसके साथ ही हवा में 75 से 85% तक नमी रही, जिससे स्मॉग और ज्यादा घना हो गया।

इन हालातों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने GRAP-3 (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) लागू कर दिया है। इसके तहत स्कूलों में हाइब्रिड क्लासेस, निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक, और बाहर से आने वाले ट्रकों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। फिर भी राहत नहीं मिल रही। मौसम विभाग (IMD) का पूर्वानुमान है कि 12 से 14 नवंबर तक AQI ‘गंभीर’ स्तर पर ही रहेगा।

मौसम ने बिगाड़ी हालत: शांत हवाएं और ठंडी रातें बना रहीं हैं जाल

भारतीय मौसम विभाग (IMD) और सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार मुख्य जिम्मेदार खुद मौसम है।
IMD के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप शर्मा बताते हैं, “नवंबर में हवाओं की रफ्तार बहुत कम हो जाती है। आज रात हवा की स्पीड सिर्फ 4 से 6 किमी प्रति घंटा रही, जिससे प्रदूषक कण जमीन के पास फंस गए।”

SAFAR की रिपोर्ट के अनुसार, 12 नवंबर को हवा की गति सामान्य से 60% कम रही। यानी हवा न तो उत्तर से आ रही है, न दक्षिण से जा रही — ऐसे में पूरा प्रदूषण दिल्ली के ऊपर ही घूमता रहा।

IMD की वैज्ञानिक डॉ. गुंजन तिवारी कहती हैं, “दिल्ली भौगोलिक रूप से एक तरह की ‘कटोरी’ है। उत्तर में अरावली और दक्षिण में यमुना नदी इसे घेर लेती हैं। ठंड के मौसम में यह प्राकृतिक जाल और मजबूत हो जाता है। अगर हवा की गति 12-15 किमी प्रति घंटा होती, तो AQI 30-40% घट सकता था।”
उनके मुताबिक, 15-16 नवंबर से उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने की उम्मीद है, तब कुछ सुधार संभव है।

वैज्ञानिक वजहें: इनवर्शन लेयर और हवा की कमी

प्रदूषण के पीछे सिर्फ इंसानी गतिविधियां नहीं, बल्कि कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं।

  1. तापमान इनवर्शन (Temperature Inversion):
    सर्दियों में जमीन ठंडी और ऊपर की हवा गर्म होती है। इससे नीचे ठंडी परत बन जाती है जो प्रदूषण को ऊपर उठने नहीं देती। ये परत एक “ढक्कन” की तरह काम करती है और 5 जैसे बारीक कण (आज 300+ µg/m³) नीचे ही फंसे रहते हैं।
    नवंबर-दिसंबर में यह स्थिति करीब 12-15 दिन तक बनी रहती है और प्रदूषण 40-50% तक बढ़ा देती है।
  2. हवा की कम रफ्तार:
    आज हवा की स्पीड सिर्फ 4-6 किमी प्रति घंटा थी। सामान्य स्थिति में हवा प्रदूषण को फैला देती है, लेकिन जब यह धीमी पड़ जाती है, तो पूरा जहर शहर में जमा हो जाता है।
  3. उच्च नमी (High Humidity):
    75-85% नमी से धूल और धुएं के कण आपस में चिपककर स्मॉग बनाते हैं। यही धुंध सुबह-सुबह दिखाई देती है और सांस लेने में तकलीफ देती है।

पटाखे और पराली नहीं, शहर खुद जिम्मेदार

दिल्ली सरकार और पर्यावरण एजेंसियों के आंकड़ों से साफ है कि इस बार पटाखे और पराली मुख्य कारण नहीं हैं।
CAQM रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में 15 सितंबर से 6 नवंबर तक 3,284 पराली जलाने के मामले दर्ज हुए, जो पिछले साल के मुकाबले 37% कम हैं। हरियाणा में तो सिर्फ 206 मामले हुए, यानी 77% की गिरावट। कुल मिलाकर दोनों राज्यों में पराली जलाने में करीब 50% की कमी आई है।

तो फिर दोषी कौन?

  • वाहन: दिल्ली में रोजाना करीब 22 लाख गाड़ियां चलती हैं, जो PM10 का सबसे बड़ा स्रोत हैं।
  • निर्माण और सड़क की धूल: 25% प्रदूषण इनसे आता है।
  • उद्योग और बिजलीघर: NCR के थर्मल प्लांट्स 18-20% प्रदूषण बढ़ा रहे हैं।
  • पड़ोसी राज्यों का प्रभाव: यूपी और राजस्थान से आने वाली हवाओं में वहां का धुआं भी शामिल है।

क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार, दिवाली के बाद दिल्ली में PM2.5 का स्तर 200% तक बढ़ा है, लेकिन अब मुख्य कारण मौसम है।

क्या होगा आगे?

IMD के मुताबिक, 15 नवंबर से हवा की गति बढ़ेगी, जिससे AQI 300 तक गिर सकता है। लेकिन तब तक लोगों को सतर्क रहना होगा।

व्यक्तिगत स्तर पर क्या करें

  • बाहर निकलते वक्त N95 मास्क पहनें।
  • सुबह और देर शाम की सैर से बचें।
  • घर में एयर प्यूरीफायर या इनडोर पौधे रखें।

सरकारी कदम

अगर हालात और बिगड़े, तो सरकार GRAP-4 लागू कर सकती है, जिसमें उड़ानों तक पर असर पड़ सकता है।
क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) का एक ट्रायल असफल रहा था, लेकिन अब इसे दोबारा आजमाने की तैयारी है।

लंबे समय में समाधान वही पुराना है—
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, CNG इंडस्ट्री को बढ़ाना, और किसानों को पराली प्रबंधन के बेहतर विकल्प देना।

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