Ashley Tellis Arrest: गोपनीय फाइलें, चीन के लिए जासूसी और एफबीआई की गिरफ्तारी— एशले टेलिस केस से हिली वॉशिंगटन!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 15 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 15 Oct 2025, 12:00 AM

Ashley Tellis Arrest: अमेरिका में भारतीय मूल के जाने-माने राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ और दक्षिण एशिया नीति सलाहकार एशले टेलिस को एफबीआई (FBI) ने गोपनीय दस्तावेज़ों की अवैध रूप से चोरी और चीनी अधिकारियों से संदिग्ध संपर्क के आरोप में गिरफ्तार किया है। वर्जीनिया के वियना स्थित उनके घर पर छापेमारी के दौरान 1,000 से अधिक पन्नों के टॉप सीक्रेट और सीक्रेट दस्तावेज़ बरामद हुए हैं। इन दस्तावेज़ों में अमेरिका की राष्ट्रीय रक्षा और वायुसेना की रणनीतियों से जुड़ी अहम जानकारियाँ थीं।

टेलिस पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी क्लासिफाइड सिस्टम से गुप्त दस्तावेज़ प्रिंट किए, उन्हें अपने घर लाए और बाद में विदेशी अधिकारियों, खासकर चीनी प्रतिनिधियों, से मुलाकात के दौरान संवेदनशील चर्चाएँ कीं।

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एफबीआई की बड़ी कार्रवाई- Ashley Tellis Arrest

एफबीआई की टीम ने 11 अक्टूबर 2025 को टेलिस के घर पर तलाशी अभियान चलाया। जांचकर्ताओं को उनके बेसमेंट ऑफिस, फाइलिंग कैबिनेट्स और तीन काले बैगों में संवेदनशील दस्तावेज़ छिपे मिले। इनमें से कई पर “TOP SECRET” और “SECRET” का निशान लगा था।

एफबीआई ने अदालत में दायर हलफनामे में बताया कि 25 सितंबर को टेलिस को वॉशिंगटन डीसी स्थित स्टेट डिपार्टमेंट की ट्रूमैन बिल्डिंग में क्लासिफाइड कंप्यूटर से सैकड़ों फाइलें प्रिंट करते हुए कैमरे में रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने “यूएस एयर फोर्स टैक्टिक्स” नाम की एक अत्यंत गोपनीय रिपोर्ट को “इकॉन रिफॉर्म” नाम से सेव किया और प्रिंट करने के बाद डिजिटल फाइल हटा दी।

इसके बाद 10 अक्टूबर को उन्हें अलेक्जांद्रिया के मार्क सेंटर की एक सुरक्षित सुविधा से दस्तावेज़ चोरी करते हुए भी सुरक्षा कैमरों में कैद किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, टेलिस ने गुप्त नोट्स अपने लेदर ब्रीफकेस में रखे और उन्हें कार्यालय से बाहर ले गए।

चीनी अधिकारियों से गुप्त मुलाकातें

एफबीआई के अनुसार, सितंबर 2022 से सितंबर 2025 के बीच टेलिस ने कई बार चीनी सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की। ये मुलाकातें वर्जीनिया के फेयरफैक्स इलाके के रेस्तरां में हुईं।

15 सितंबर 2022 की मुलाकात में टेलिस को एक मनीला लिफाफे के साथ रेस्तरां में प्रवेश करते और बाहर निकलते समय बिना उस लिफाफे के देखा गया। एफबीआई का दावा है कि इन बैठकों में टेलिस और चीनी अधिकारियों के बीच ईरान-चीन संबंधों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक और अमेरिका-पाकिस्तान रणनीतियों पर चर्चा हुई।

सितंबर 2025 की एक और मुलाकात में उन्हें चीनी अधिकारियों से लाल रंग का गिफ्ट बैग लेते हुए भी देखा गया। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन्हीं मुलाकातों में गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान हुआ।

अमेरिका में चर्चा और झटका

यह मामला वॉशिंगटन डीसी के पॉलिसी सर्किल में सदमे की तरह आया है, क्योंकि एशले टेलिस को अब तक भारत-अमेरिका रणनीतिक रिश्तों के प्रमुख वास्तुकारों में गिना जाता था। वे लंबे समय से दक्षिण एशिया नीति पर अमेरिकी प्रशासन को सलाह देते रहे हैं।

64 वर्षीय टेलिस मुंबई में जन्मे हैं। उन्होंने सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज और मुंबई विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और बाद में यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वे 2001 से अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) में कार्यरत हैं और अमेरिका-भारत असैन्य परमाणु समझौते (US-India Civil Nuclear Deal) में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

वर्तमान में वे डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के ऑफिस ऑफ नेट असेसमेंट में कॉन्ट्रैक्टर और कार्नेगी एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनियर फेलो हैं। वे पहले राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के विशेष सहायक और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में वरिष्ठ निदेशक रह चुके हैं।

यात्रा से पहले एफबीआई की छापेमारी

एफबीआई अधिकारियों के मुताबिक, टेलिस 11 अक्टूबर की रात अपने परिवार के साथ रोम रवाना होने वाले थे, जहां उनका कार्य-संबंधी कार्यक्रम तय था। वे 27 अक्टूबर को मिलान होते हुए अमेरिका लौटने वाले थे। उसी दिन उनके घर पर छापा मारा गया और गोपनीय दस्तावेज़ों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ।

एफबीआई ने अदालत में कहा है कि टेलिस पर राष्ट्रीय रक्षा जानकारी को अवैध रूप से रखने (Unlawful Retention of National Defense Information) और विदेशी संपर्कों से गोपनीय जानकारियाँ साझा करने का मामला दर्ज किया गया है।

जांच जारी, कार्नेगी की चुप्पी

इस मामले पर जब मीडिया ने कार्नेगी एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस से संपर्क किया, तो संस्थान ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, अमेरिकी न्याय विभाग ने पुष्टि की है कि जांच में डिजिटल रिकॉर्ड्स, बैंक लेनदेन और विदेशी संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर आरोप साबित हुए, तो यह मामला अमेरिकी इंटेलिजेंस सिस्टम की सबसे बड़ी सुरक्षा चूकों में से एक बन सकता है खासकर तब, जब इसमें चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देश का नाम सामने आया है।

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