दिवाली के दिन असरानी का निधन, बिना किसी को बताए हुआ अंतिम संस्कार; अब Annu Kapoor ने भी जताई वैसी ही इच्छा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 23 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 23 Oct 2025, 12:00 AM

Annu Kapoor: 20 अक्टूबर को दिवाली के मौके पर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता असरानी का निधन हो गया। उनके मैनेजर बाबूभाई थिबा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि असरानी ने अपनी आखिरी इच्छा के तौर पर कहा था कि उनकी मौत की खबर किसी को न दी जाए। इसी वजह से दोपहर में उनके गुजर जाने के तुरंत बाद बिना किसी को जानकारी दिए उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

परिवार के सिर्फ 15 से 20 लोग ही इस मौके पर मौजूद थे। इंडस्ट्री से किसी को खबर नहीं दी गई, जिससे कोई फिल्मी हस्ती वहां शामिल नहीं हो पाई। असरानी चाहते थे कि उनकी विदाई पूरी सादगी और शांति के साथ हो, बिना किसी भीड़ या चर्चा के।

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असरानी की आखिरी इच्छा – “मेरी मौत पर कोई हंगामा न हो” Annu Kapoor

असरानी के मैनेजर ने बताया कि एक्टर ने यह इच्छा अपनी पत्नी मंजू बंसल के सामने जाहिर की थी। उन्होंने कहा था, “मेरी मौत के बाद कोई शोर-शराबा न हो, जब अंतिम संस्कार हो जाए तभी सबको बताना।”
परिवार ने उनकी इस बात का पूरा सम्मान किया और दिवाली की दोपहर में ही शांतिपूर्वक उनका अंतिम संस्कार किया गया। असरानी की यह सादगी भरी विदाई उनके शांत स्वभाव और जीवन के प्रति सरल सोच को दर्शाती है।

अन्नू कपूर बोले – “दुनिया एक होटल है, चेक-आउट तो करना ही होगा”

असरानी के निधन के बाद अब वरिष्ठ अभिनेता अन्नू कपूर ने भी अपनी अंतिम इच्छा को लेकर बयान दिया है। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा कि जब उनका “इस दुनिया नामक होटल से चेक-आउट करने का समय आए”, तो उनका अंतिम संस्कार भी गुप्त रूप से किया जाए।

अन्नू कपूर ने कहा, “अगर मेरा निधन किसी राष्ट्रीय पर्व या त्यौहार जैसे 15 अगस्त, 26 जनवरी, दिवाली, होली, ईद, मकर संक्रांति, क्रिसमस, या गुरु पूर्णिमा के दिन हो, तो किसी को तकलीफ न दी जाए। मेरा संस्कार शांति से, बिना किसी को बताए किया जाए।”

 “किसी पर बोझ बनकर नहीं जीना चाहता”

अन्नू कपूर ने अपनी बात को गहराई से समझाते हुए कहा, “मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता। न अपने परिवार पर, न समाज पर, न देश पर। गालिब का एक शेर है—‘ग़म-ए-हस्ती का असद किससे हो जुज़ मर्ग इलाज।’ यानी इस जीवन के ग़म का इलाज सिर्फ मृत्यु है। जब तक जिंदा हैं, जलना तो है, लेकिन कोशिश यही करनी चाहिए कि किसी को अपनी वजह से तकलीफ न पहुंचे।”

उन्होंने आगे कहा, “जब मेरा समय आए, तो चुपचाप चेक-आउट कर जाऊं। ये दुनिया एक मुसाफ़िरखाना है, कोई स्थायी ठिकाना नहीं। बड़े-बड़े लोग इसे अपना परमानेंट रेजिडेंस नहीं बना पाए, तो हम कैसे बना सकते हैं? इसलिए बेहतर यही है कि विदाई सादगी से हो, बिना किसी शोर-शराबे के।”

असरानी की सादगी बनी मिसाल

असरानी के निधन की खबर जब दो दिन बाद सामने आई, तब फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारे स्तब्ध रह गए। सोशल मीडिया पर सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनकी उस इच्छा का सम्मान किया, जो उन्होंने जीवन के अंतिम दिनों में जताई थी।

असरानी ने अपने लंबे फिल्मी करियर में दर्शकों को हंसाया, मनोरंजन किया और यादगार किरदार दिए। लेकिन अपने आखिरी सफर में उन्होंने दिखा दिया कि असल जिंदगी में भी वे उतने ही सादे और शांत स्वभाव के थे, जितने परदे पर।

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