Trending

Alcohol Facts: शराब क्यों बढ़ा देती है झूठा कॉन्फिडेंस? साइंस बताती है दिमाग के अंदर चलने वाली पूरी केमिकल कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 07 Dec 2025, 12:00 AM | Updated: 07 Dec 2025, 12:00 AM

Alcohol Facts: हम सबकी जिंदगी में ऐसे दोस्त जरूर होते हैं जो दो-चार ड्रिंक्स के बाद ही कह देते हैं “आज गाड़ी तेरा भाई चलाएगा!” शराब की यही खासियत है कि यह इंसान को उसकी असली क्षमता से ज्यादा काबिल होने का एहसास दे देती है। कई बार लोग इतना ओवरकॉन्फिडेंट हो जाते हैं कि उन्हें लगता है कि वे हर काम पहले से बेहतर कर सकते हैं चाहे वह ड्राइविंग हो, बहस हो या फिर किसी को इम्प्रेस करना। लेकिन आखिर ऐसा होता क्यों है? इसकी वजह सीधे-सीधे दिमाग में होने वाले केमिकल बदलावों से जुड़ी है।

और पढ़ें: Sleeping Position: सोते समय एक पैर बाहर क्यों निकालते हैं लोग? जानें इसके पीछे का विज्ञान

कैसे बिगड़ता है दिमाग का बैलेंस? (Alcohol Facts)

शराब पीते ही सबसे पहला असर पड़ता है दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर पर, यानी वो केमिकल मैसेंजर्स जो भावना, व्यवहार, जजमेंट और प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। जैसे ही शराब दिमाग में जाती है डोपामाइन बढ़ने लगता है, जिससे इंसान को खुशी, एनर्जी और फर्जी कॉन्फिडेंस महसूस होता है। GABA की एक्टिविटी बढ़ती है, जो दिमाग को रिलैक्स करता है और डर या चिंता कम कर देता है। वहीं फैसला लेने वाला हिस्सा प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स धीमा पड़ जाता है। यही वजह है कि नशे में इंसान को जोखिम भी कम खतरनाक लगता है और वह अपनी क्षमता को जरूरत से ज्यादा आंक लेता है।

इसलिए आती है “सुपरहीरो वाली फीलिंग”

दिमाग का खतरे को पहचानने वाला हिस्सा नशे के दौरान काफी कमजोर हो जाता है। ऐसी चीजें जो सामान्य हालत में लाल झंडी दिखाती हैं, नशे में “कुछ खास नहीं” लगने लगती हैं। यही वजह है कि लोग कहते हैं “कुछ नहीं होगा”, “मैं संभाल लूंगा”, “मैंने इससे ज्यादा पी रखी है” दरअसल यह सब कॉन्फिडेंस नहीं, बल्कि न्यूरोकेमिकल भ्रम है।

पीने के बाद दुख कम हो जाते हैं?

कई लोग कहते हैं कि शराब पीने से गम भूल जाते हैं, दर्द हल्का हो जाता है और मन हल्का महसूस करता है। साइंस भी मानती है कि शुरुआत में ऐसा होता है, क्योंकि शराब डोपामाइन और एंडोर्फिन रिलीज कराती है, जो दर्द कम करने और खुशी बढ़ाने वाले केमिकल हैं।

लेकिन समस्या यहां शुरू होती है पहले जो राहत दो पेग में मिलती थी, वही राहत बाद में तीन–चार पेग में मिलती है। दिमाग को उसी “खुशी” की डोज के लिए ज्यादा शराब चाहिए होती है। यहीं से शुरू होती है लत, और यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है।

लत कैसे बढ़ती जाती है?

आपको बता दें, शराब खत्म होते ही डोपामाइन और एंडोर्फिन की मात्रा अचानक गिरती है। इंसान बेचैन, दुखी और पछतावे में डूबा महसूस करता है। वही खुशी दोबारा पाने के लिए फिर शराब पी लेता है। यह साइकिल धीरे-धीरे शराब को आदत से बीमारी बना देती है।

WHO की चेतावनी: शराब की कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं

लोग अक्सर सोचते हैं कि “मैं सिर्फ एक गिलास पीता हूँ, मुझे कोई नुकसान नहीं होगा।”
लेकिन WHO के मुताबिक, शराब की कोई भी मात्रा पूरी तरह सुरक्षित नहीं होती। यह लिवर को खराब कर सकती है, हार्ट रोग बढ़ा सकती है, दिमाग की क्षमता कम कर सकती है और कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकती है।

और पढ़ें: Water Research: अल्कलाइन, RO और कांगेन… क्या आपका पानी ही आपकी बीमारी की वजह है? रिपोर्ट में चौंकाने वाले दावे 

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2025- All Right Reserved. Designed and Developed by  Marketing Sheds