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Ajit Pawar Plane Crash: एक ट्वीट, घना कोहरा और टूटा कंट्रोल! कैसे अजित पवार की उड़ान बारामती से पहले ही बन गई मौत का सफर

Nandani | Nedrick News

Published: 29 Jan 2026, 08:46 AM | Updated: 29 Jan 2026, 08:50 AM

Ajit Pawar Plane Crash: 18 जनवरी 2024 को अजित पवार ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि जब कोई हेलीकॉप्टर या प्लेन स्मूदली लैंड करता है, तो समझ लेना चाहिए कि पायलट महिला है। उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा था कि ठीक दो साल और दस दिन बाद अजित पवार खुद एक ऐसे विमान हादसे का शिकार होंगे, जिसमें स्मूद लैंडिंग तो दूर, किसी को बचने का मौका तक नहीं मिलेगा।
28 जनवरी 2025 की सुबह महाराष्ट्र के बारामती के पास हुआ यह हादसा न सिर्फ एक तकनीकी और मौसम से जुड़ा मामला बन गया, बल्कि देश को एक बार फिर नेताओं से जुड़े विमान हादसों की लंबी और दुखद फेहरिस्त की याद दिला गया।

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28 जनवरी 2025: मुंबई से बारामती तक की उड़ान, जो मंजिल तक नहीं पहुंची

सुबह 8 बजकर 10 मिनट। मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की चार्टर्ड फ्लाइट लियर जेट 45 ने बारामती के लिए उड़ान भरी। विमान में अजित पवार के साथ उनका एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर, एक अटेंडेंट और दो पायलट मौजूद थे। इस लियर जेट को कैप्टन सुमित कपूर उड़ा रहे थे, जबकि को-पायलट की जिम्मेदारी शांभवी पाठक के पास थी। नौ सीटों और दो इंजन वाला यह प्लेन एक बार में करीब 3700 किलोमीटर तक उड़ान भरने में सक्षम था।

पहले से ही खराब था मौसम, विजिबिलिटी बनी सबसे बड़ी चुनौती | Ajit Pawar Plane Crash

मुंबई से उड़ान भरते वक्त ही साफ हो गया था कि बारामती और पुणे के आसपास घना कोहरा है और विजिबिलिटी बेहद कम है। करीब 250 किलोमीटर की दूरी तय करने में प्लेन को लगभग 40 मिनट लगने थे। उड़ान बिना किसी दिक्कत के आगे बढ़ी और विमान बारामती एयरपोर्ट के करीब पहुंच गया। रनवे महज 6 किलोमीटर दूर था और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से लगातार संपर्क बना हुआ था। ATC ने पायलट को रनवे नंबर 29 पर लैंडिंग की अनुमति दी।

पहली कोशिश छोड़ी, दूसरी में बिगड़ा संतुलन

लेकिन ठीक रनवे से पहले, जब प्लेन काफी नीचे आ चुका था, पायलट ने अचानक रनवे 29 पर उतरने की बजाय विमान का रुख मोड़ दिया। माना जा रहा है कि घने कोहरे की वजह से रनवे साफ दिखाई नहीं दे रहा था। इसके बाद पायलट ने दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश की और इस बार विमान को रनवे नंबर 11 की ओर मोड़ा।
इसी दौरान हवा में ही प्लेन लड़खड़ा गया। संतुलन बिगड़ते ही विमान एयरपोर्ट के पास एक गांव के नजदीक खेतों में जा गिरा। गिरते ही आग और काले धुएं का बड़ा गुबार आसमान में उठता दिखा। सामने आए CCTV फुटेज में हादसे के पल साफ नजर आते हैं, और एक स्थानीय व्यक्ति ने अपनी आंखों से इस क्रैश को होते देखा।

फ्यूल टैंक में आग, कोई नहीं बच पाया

जैसे ही विमान जमीन से टकराया, फ्यूल टैंक में आग लग गई। हादसा इतना भीषण था कि प्लेन में सवार किसी को भी बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। अजित पवार समेत सभी पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में कैप्टन सुमित कपूर और को-पायलट शांभवी पाठक की भी जान चली गई। कैप्टन सुमित कपूर बेहद अनुभवी पायलट थे और उनके पास करीब 16 हजार घंटे की उड़ान का अनुभव था। वे इससे पहले कई नामी एयरलाइंस में काम कर चुके थे। वहीं शांभवी पाठक के पास भी लगभग 1500 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था।

तकनीकी खराबी नहीं, फिर वजह क्या?

कंपनी के मालिक के मुताबिक यह 16 साल पुराना प्लेन उड़ान के लिए पूरी तरह फिट था। विमान में दो इंजन थे और एविएशन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि दोनों इंजनों का एक साथ फेल होना लगभग नामुमकिन है। तकनीकी खराबी की संभावना सिर्फ एक फीसदी बताई जा रही है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार हादसे की सबसे बड़ी वजह कम विजिबिलिटी रही। रनवे साफ न दिखने के कारण लैंडिंग के दौरान प्लेन मोड़ने की कोशिश में पायलट का नियंत्रण विमान से हट गया। गौर करने वाली बात यह भी है कि इसी कंपनी का एक लियर जेट सितंबर 2023 में मुंबई एयरपोर्ट के पास लो विजिबिलिटी और बारिश के दौरान क्रैश हो चुका है।

लियर जेट 45: भरोसेमंद लेकिन विवादों में रहा विमान

दुनिया भर में लियर जेट 45 के कुल 248 विमान मौजूद हैं। इसे अमेरिकी कंपनी बॉम्बार्डियर ने 7 अक्टूबर 1995 को पहली बार बनाया था। इसके तीन साल बाद अमेरिका में इसका पहला हादसा हुआ, हालांकि उसमें कोई हताहत नहीं हुआ।
अब तक इस मॉडल के पांच विमान क्रैश हो चुके हैं। 2017 में बॉम्बार्डियर ने लियर जेट का प्रोडक्शन बंद कर दिया था और इसकी आखिरी डिलिवरी 2012 में हुई थी। एक लियर जेट 45 की कीमत 80 से 100 करोड़ रुपये के बीच होती है और इसे आमतौर पर प्राइवेट या चार्टर्ड फ्लाइट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। दो घंटे की उड़ान का किराया 8 से 10 लाख रुपये तक होता है। वीएसआर वेंचर्स के पास कुल सात विमान थे, जिनमें से एक इस हादसे में तबाह हो गया।

DGCA ने दिए जांच के आदेश

हादसे के बाद डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती रिपोर्ट दो से तीन दिनों में आने की उम्मीद है, जिसके बाद यह साफ हो सकेगा कि हादसे की असल वजह क्या थी।

नेताओं और विमान हादसों का पुराना रिश्ता

अजित पवार से पहले भी देश कई बड़े नेताओं को विमान हादसों में खो चुका है। इस सूची में संजय गांधी, माधवराव सिंधिया, जीएमसी बालयोगी, वाईएसआर रेड्डी, दोरजी खांडू, जनरल बिपिन रावत और विजय रुपाणी जैसे नाम शामिल हैं। 1980 में संजय गांधी की मौत से लेकर 2025 में विजय रुपाणी के भीषण विमान हादसे तक, ये घटनाएं बार-बार यह सवाल खड़ा करती हैं कि खराब मौसम, तकनीकी सीमाएं और मानवीय फैसले मिलकर कैसे बड़े हादसों की वजह बन जाते हैं।

अजित पवार का यह विमान हादसा भी उसी दुखद सिलसिले की एक और कड़ी बन गया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

और पढ़ें: Ajit Pawar Death: रनवे से फिसला विमान, बुझ गई 5 जिंदगियां; अजित पवार प्लेन क्रैश की पूरी कहानी

Nandani

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