गाजियाबाद: इंदिरापुरम में बैठकर जापानियों को करते थे ब्लैकमेल और ऐंठते थे पैसे, हुए गिरफ्तार

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 14 Apr 2021, 12:00 AM | Updated: 14 Apr 2021, 12:00 AM

आज के इस डिजिटल जमाने में लोगों के लिए तमाम चीजें काफी आसान हो गई है। हर मर्ज की दवा अब ऑनलाइन भी उपलब्ध है। लेकिन इंसान के लिए यह डिजिटल युग जितना आसान है उतना ही ज्यादा नुकसानदायक भी…। क्योंकि आजकल की दुनिया में लगभग हर जगह ऑनलाइन होने वाले फ्रॉड काफी बढ़ गए हैं। 

दुनिया के कई कोनों में तमाम तरह की फ्रॉड वाली घटनाएं घटित हो रही है और ऐसे मामले आये दिन सोशल मीडिया पर देखने को मिल ही जाते हैं। इसी बीच यूपी के गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे।

जापानी भाषा में जापानियों को लुभाते थे आरोपी

दरअसल, साइबर सेल ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम में कॉलसेंटर खोलकर जापान के लोगों से उन्हीं की भाषा में बात कर ठगी करने वाले 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें से एक की गिरफ्तारी सोमवार को हुई। जिसके बाद मंगलवार को साइबर सेल ने अन्य 5 लोगों को गिरफ्तार किया।

आरोपियों की पहचान दिल्ली के रहने वाले आशीष सूरी, विक्रम चंद्र दास, मेरठ के अविनाश गुप्ता, नोएडा के एडविन जॉर्ज, बिहार के आदर्श और गाजियाबाद के रहने वाले उमेश नेगी के रुप में हुई है।

गिफ्ट कार्ड के जरिए ऐंठते थे रकम

खबरों के मुताबिक कॉलसेंटर के दो संचालकों की तलाश जारी है। बताया जा रहा है कि ये जालसाज पहले डाटा लीक होने का डर दिखाते थे, इसके बाद कंप्यूटर हैंग कर बग इंस्टॉल कर देते थे। फिर समस्या के समाधान के नाम पर गिफ्ट कार्ड के जरिए रकम ऐंठते थे। 

जानकारी के मुताबिक यह कॉलसेंटर पिछले ढ़ाई साल से संचालित हो रहा था। इन फ्रॉड लोगों की नजर विदेशियों पर थी इसलिए अभी तक पुलिस की नजरों से बचे हुए थे। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी फर्राटेदार जापानी बोलते हैं। इन सभी ने दिल्ली की एक कोचिंग सेंटर से जापानी भाषा सीखी। जिसके बाद जापानी लोगों को बेवकूफ बना कर पैसे ऐंठ रहे थे।

इंटरनेट कॉल के जरिए करते थे कॉनटैक्ट

बता दें, पुलिस ने इंदिरापुरम के इस कॉल सेंटर से 8 मोबाइल, 80 डाटा पेपर सीट, 5 लैपटॉप, 4 एटीएम कार्ड और एक वाईफाई मॉडम बरामद किया है। अभी भी इस कॉलसेंटर के 2 संचालकों की तलाश जारी है। खबरों के मुताबिक कॉलसेंटर का सरगना वहां काम करने वाले लोगों को डाटाशीट उपलब्ध कराता था। 

जिसमें जापानी प्रोफेशनल्स की डिटेल्स होती थी, जिनकी कंपनी का सॉफ्टवेयर एक्सपायर होने वाला होता था। फिर आरोपी इंटरनेट कॉल के जरिए उनसे कॉनटैक्ट करते थे और डाटा लीक का डर दिखाकर उनका सिस्टम हैक करते थे। जिसके बाद उनसे जमकर गिफ्ट मनी के तौर पर बड़ी रकम ऐंठते थे।

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