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चित्रा त्रिपाठी vs योगेंद्र यादव: ऐसा क्या हुआ कि टीवी डिबेट की लड़ाई अब ट्विटर पर जारी है?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 22 May 2023, 12:00 AM | Updated: 22 May 2023, 12:00 AM

Chitra vs Yogendra controversy in Hindi – देश में कोई भी मुद्दा चल रहा हो शाम को उस ममाले को लेकर टीवी न्यूज़ चैनल पर एक जंग देखने को मिलती है लेकिन ये जंग जुबानी होती है. जो भी मुद्दा देश में चल रहा हो उसको लेकर टीवी न्यूज़ चैनल पर एक डिबेट होती है और इस डिबेट में लोगों को बुलाया जाता है और इस मामले पर उनसे बात की जाती है और इस दौरान इस शो में हिस्सा लेने वाले लोग अपनी बात रखते हैं लेकिन कई बार ये बातें बहस बन जाती है.

ज्यादातर बहस कैमरा बंद होने के बाद वहीं पर खत्म हो जाती है लेकिन एक बहस ऐसी है जो न्यूज़ चैनल पर शुरू तो हुई लेकिन कैमरा बंद होने के बाद भी ये बहस जारी है और ये बहस अब सोशल मीडिया पर भी चल रही है जिस पर पत्रकार और नेता दोनों ही मामले पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और इस समय ये ममाला चर्चा में बना हुआ है.

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जानिए क्या है मामला 

दरअसल, जिस बहस की हम बात कर रहे हैं. वो गुरुवार 18 मई 2023 को आज तक के डिबेट शो ‘दंगल’ में हुई. इस शो में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस को विभिन्न जातियों के वोटों को लेकर चर्चा हो रही थी। इस दौरान, आज तक की पत्रकार चित्रा त्रिपाठी ने आजादी के बाद देश में पहली बार हुए विधानसभा चुनावों के आँकड़ें रखते हुए कहा था कि उस चुनाव में 22 राज्यों में से 13 राज्यों के मुख्यमंत्री ब्राह्मण थे।

लेकिन मंडल कमीशन लागू होने के बाद खुद को बड़ा ओबीसी नेता बताने की होड़ मची हुई है। कर्नाटक में कांग्रेस ने सिद्धरमैया को सीएम बनाते हुए भी ओबीसी कार्ड ही खेला है। साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी द्वारा जातीय जनगणना का मुद्दा उठाने को लेकर भी बहसस्वराज्य इंडिया के संस्थापक और आंदोलनजीवी योगेंद्र यादव से सवाल पूछा.

जिसके बाद योगेंद्र यादव ने इस ममाले पर अपनी राय दी उन्होंने शो के दौरान इसे ‘पीड़ा’ बताते हुए कई तरह के सवाल खड़े किए. वहीं इस राय पर चित्रा त्रिपाठी ने भी कई सारे सवाल खड़े किये. इसके बाद बहस नाम लेने को लेकर शुरू हो गयी. जहाँ ये बहस आगे की और बढ़ी और शो खत्म हो गया तो वहीं इसके बाद ये बहस ट्विटर पर शुरू हो गयी.

ब्राह्मण होने की बात को बताया पीड़ा

Chitra vs Yogendra controversy – इस टीवी डिबेट का एक वीडियो आज तक ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था और योगेंद्र यादव इस मुद्दे को लेकर ट्विटर भीड़ गये. योगेंद्र यादव ने ट्विटर इस वीडियो को रीट्वीट करते हुए पहली बार हुए चुनावों में 12 राज्यों के मुख्यमंत्री ब्राह्मण होने की बात को पीड़ा बता दी। योगेंद्र यादव ने लिखा, “मैने पूछ ही लिया कि ‘आज तक’ बार बार उस युग को क्यों याद कर रहा है जब अधिकांश मुख्यमंत्री और एक चौथाई सांसद ब्राह्मण होते थे? कहीं इसके पीछे कोई पीड़ा तो नहीं? या उस अतीत का मोह? जाहिर है सवाल मेरी ही नीयत पर उठाए गए।

चित्रा त्रिपाठी ने कहा धन्यवाद

Chitra vs Yogendra viral video – योगेंद्र यादव के इस ट्वीट के बाद चित्रा त्रिपाठी ने उन्हें जवाब दिया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “योगेंद्र यादव जी आपकी व्यक्तिगत कुंठा को समझा जा सकता है। मुझे आपके साथ सहानुभूति है। पहले अन्ना आंदोलन में अपने आपको कामयाब करने की कोशिश। फिर पद नहीं मिलने पर केजरीवाल से अदावत। फिर स्वयंभू बनने की कोशिश स्वराज आंदोलन से, अंततोगत्वा राहुल गाँधी की शरण में ( जो एक जनेऊधारी ब्राह्मण हैं) मैं ये नहीं कहूँगी कि आप अतिपाखंडी हैं। मगर अपनी महत्वाकांक्षा के लिए मीठी ज़ुबान से समाज को विभाजित करना देश के साथ ग़द्दारी होती है। मेरा सवाल काट कर मुझे ट्रोल कराने के लिए धन्यवाद। ईश्वर आप पर रहम करे।”

 

योगेंद्र यादव ने किया लम्बा-चौडा ट्वीट

इसके बाद योगेंद्र यादव ने जवाब देते हुए एक और ट्वीट किया। इस लंबे चौड़े ट्वीट में उन्होंने लिखा, “अरे,आप तो सड़क छाप गाली गलौज पर उतर आईं। सवाल का जवाब आरोप और जन्मपत्री से वही लोग देते हैं जिनके पास तर्क न बचे हों। अगर यूरोप अमरीका के टीवी पर इस तरह की बात कही जाती ऐसे “white supremacism” के लिए एंकर ही नहीं पूरी चैनल को माफ़ी माँगनी पड़ती। खैर, कुछ और सवाल व एक प्रस्ताव:

1.) क्या आज तक और इंडिया टुडे का एग्जिट पोल यह नहीं दिखाता कि कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को पिछड़ों के वोट में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई? फिर कॉन्ग्रेस की जीत को पिछड़ी जातियों के समीकरण से जोड़ने की उतावली क्यों? आखिर यह मानने से परहेज क्यों हैं कि बीजेपी अपने निकम्मेपन और भ्रष्टाचार के कारण हारी?

2.) अगर यह विश्लेषण करना भी था तो कर्नाटक के सन्दर्भ में यह उद्घोष क्यों जरूरी था कि एक जमाने में देश में 13 ब्राह्मण मुख्यमंत्री और एक चौथाई ब्राह्मण सांसद थे?

3.) आपने शो में कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता के बार-बार यह सही सवाल पूछा कि उनकी सरकार ने 2011 के सर्वे की रिपोर्ट जारी क्यों नहीं की। लेकिन मेरे दो बार याद दिलाने के बाद भी बीजेपी के प्रवक्ता से यह क्यों नहीं पूछा कि उन्होंने 2010 में जाति जनगणना और 2018 में ओबीसी जनगणना का समर्थन क्यों किया था?

4.) मैंने आपका कौनसा सवाल काटा है? ‘आज तक’ ने जो क्लिपिंग जारी की, बस उसे फॉरवर्ड किया है। इतना झूठा आरोप क्यों?

5.) अगर आप मेरे बारे में यह राय रखती हैं तो शो में मुझे ‘वरिष्ठ’, ‘पढ़ा-लिखा’ और ‘आदरणीय’ वगैरा क्यों बता रही थीं? आप शो में झूठ बोलती हैं? मुझे विश्वास है कि इन सब सवालों पर ‘आज तक’ में मुझसे चर्चा करने का समय निकलेंगी। मुझे इंतज़ार रहेगा।”

चित्रा त्रिपाठी ने कही ट्वीट और टैग करने की बात 

योगेंद्र यादव के इस ट्वीट के जवाब में चित्रा त्रिपाठी ने ने लिखा, “आपने शुरू किया है तो मैं अंत कर देती हूँ। इसके बाद आप ट्वीट और टैग करते रहिएगा। कई बार इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है कि- फलाँ पढ़ा लिखा ‘जाहिल’ है। वैसे ये मैं आपको नहीं बोल रही हूँ। मुझे ये तब तक नहीं लगता था जब तक आप एक्सपोज़ नहीं हो गए।”

Chitra vs Yogendra controversy – उन्होंने आगे लिखा, “आपका इतिहास- अन्ना के आंदोलन में कॉन्ग्रेस को गाली। अरविंद से झगड़े के बाद उनको गाली मौजूदा वक्त में गरीब और पिछड़े समाज से आने वाले ‘मोदी’ जी को गाली। फिर राहुल जी की भारत जोड़ो यात्रा में जाकर उसके बाद TV पर आकर उसी कांग्रेस पार्टी की पहली सरकार को गाली। उसी डिबेट शो में पहली विधानसभा से चुने हुए अलग-अलग राज्यों के कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्रियों को गाली आपने नेहरु-अंबेडकर-पटेल की पहली बनाई सरकार पर टिप्पणी की। जिसको कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए मैंने भी वही किया। थोड़ा सा इतिहास का रिफ्रेंस क्या दे दिया मैंने- आप तो ट्रोलजीवी बन गए।”

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