बुलडोजर पर 'सुप्रीम' ब्रेक! विवादों के बीच SC ने दिया बड़ा आदेश, जानें सुनवाई के दौरान क्या कुछ हुआ?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 21 अप्रैल 2022, 05:30 AM Updated: 21 अप्रैल 2022, 05:30 AM
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दिल्ली के जहांगीरपुर में बुलडोजर पर ब्रेक लग गया है। यहां अब अगले 14 दिनों तक बुलडोजर नहीं चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए बुलडोजर पर लगे स्टे को बढ़ा दिया। अब दो हफ्तों के बाद इस मामले पर सुनवाई होगी। 

2 हफ्तों तक नहीं चलेगा बुलडोजर

इस दौरान कोर्ट ने सिर्फ जहांगीरपुरी में ही बुलडोजर पर रोक लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अवैध निर्माण बुलडोजर से ही गिराए जाते हैं। इस तरह की कार्रवाई पर पूरे देश में रोक नहीं लगाई जा सकती। यानी कोर्ट ने ये साफ किया कि ये जो फैसला है, उसका असर सिर्फ जहांगीरपुरी पर ही पड़ेगा। यहां बुलडोजर पर 2 हफ्तों तक रोक रहेगी। इसके अलावा बाकी जगहों पर हो रही कार्रवाई जैसे यूपी, एमपी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में MCD की तरफ से पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा। वहीं इस दौरान बुलडोजर के खिलाफ दायर याचिका पर दुष्यंत दवे और कपिल सिब्बल ने पैरवी की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस देखने को मिली। बुलडोजर के खिलाफ दलील देने वाले दुष्यंत दवे और कपिल सिब्बल ने एक समुदाय को टारगेट करने का आरोप लगाया। 

“कोर्ट के आदेश के बाद भी चला बुलडोजर”

SC में सुनवाई के दौरान वकील दुष्यंत दवे ने कोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई जारी रखने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम को ये मालूम था कि हम बुलडोजर की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले है। इस वजह से जो कार्रवाई 2 बजे से होनी थी, वो 9 बजे से ही शुरू कर दी गई। यहां तक कि कोर्ट के आदेश के बाद भी तोड़फोड़ जारी रखी गई। मामले की सुनवाई कर रहे जजों की ओर से इस पर नाराजगी दिखाई गई। उन्होंने कहा कि हम इस पर गंभीर रुख दिखाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में 1731 अनधिकृत कॉलोनी हैं। 50 लाख से भी ज्यादा लोग इनमें ही रहते हैं। बावजूद इसके केवल एक कॉलोनी को ही टारगेट किया गय। गरीबों को निशाना बनाया और उनके घरों को बर्बाद कर दिया। इस दौरान दवे ने साउथ दिल्ली या पॉश कॉलोनियों में कार्रवाई नहीं करने पर भी सवाल दागे। 

उन्होंने ये भी कहा कि MCD को बताना चाहिए कि कैसे दिल्ली BJP अध्यक्ष की एक चिट्ठी के बाद उन्होंने ये अभियान चलाया। कार्रवाई करने से पहले MCD की तरफ से नोटिस क्यों नहीं दिया गया?

“एक समुदाय को किया जा रहा टारगेट”

वहीं इस दौरान कपिल सिब्बल की तरफ से बुलडोजर के जरिए की जा रही इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने अपनी दलील में कहा कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण पूरे देश की समस्या है। लेकिन इसकी आड़ में एक समुदाय को टारगेट नहीं किया जा सकता। इस दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश के मंत्री के बयान का जिक्र भी किया। सिब्बल बोले कि मंत्री ने कहा कि अगर मुसलमान शांत नहीं हुए तो कोई रियायत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कोर्ट को ऐसा मैसेज देना चाहिए कि यहां कानून का शासन है।

सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा?

वहीं MCD की ओर से SC में पक्ष रखते हुए सॉलिसिटिर जनरल ने कहा कि जहांगीरपुरी से हम रोड साफ करने के लिए अतिक्रमण हटाना चाहते हैं। इस अभियान की शुरुआत जनवरी में की गई। जनवरी, फरवरी और मार्च में कार्रवाई हुई। अगली कार्रवाई 19 अप्रैल को की जानी थी। वो अतिक्रमण और कचरा साफ कर रहे थे। जब इसमें संगठनों की तरफ से दखल दिया गया, तो ये सबकुछ हुआ। उन्होंने कहा कि कुछ इमारतें अवैध हैं और सड़कों पर बनी हुई हैं। उनको नोटिस दिया था। मार्केट एसोसिएशन ने 2021 में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद हाईकोर्ट की ओर से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया गया था। वहीं एक समुदाय को टारगेट करने पर सॉलिसिटिर जनरल ने कहा कि खरगोन में मुस्लिमों से ज्यादा हिंदूओं के घर गिराए गए। 

कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि 20 अप्रैल वाली कार्रवाई फुटपाथ साफ करने के लिए ही की गई थी, जिस पर जस्टिस बीआर गवई ने पूछा कि फुटपाथ साफ करने के लिए और कुर्सियां-डब्बों हटाने के लिए बुलडोजर की जरूरत पड़ी। 

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने के बाद सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के आदेश दिए। इसके साथ ही 2 हफ्तों तक जहांगीरपुरी में बुलडोजर चलाने पर स्टे लगा दिया। अब 2 हफ्तों बाद मामले की सुनवाई होगी। 

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