Khalsa Aid in Canada: आपदाओं के बीच उम्मीद की वो किरण, जिसने सिखों को दिलाई वैश्विक पहचान

Shikha Mishra | Nedrick News
Canada
Published: 14 Feb 2026, 06:58 AM | Updated: 14 Feb 2026, 06:58 AM

Khalsa Aid in Canada: जब सिख धर्म की स्थापना हुई थी, तो उसकी स्थापना से पहले ही सिखों के प्रथम गुरु ने मात्र 7 साल की उम्र में संगतों की सेवा करके बताया था कि भविष्य में केवल मानवता की सेवा की भावना को हमेशा बनायें रखने के लिए एक धर्म की ही स्थापना हो सकती है। जिसे खुद गुरु नानक देव दी ने स्थापित किया था। उनकी बनाई पद्दति, उनके नियमों को आगे वाले 9 गुरुओ ने भी आत्मसात किया.. और संगत सेवा की भावना को बढ़ावा दिया.. और इसी भावना को बढ़ावा देने के लिए साल 1999 में पहली बार शुरु हुआ खालसा एड।

आज दुनियाभर में खालसा एड के कई ब्रांच मौजूद है लेकिन हम आज बात करेंगे भारत के बाद सिखों के सबसे ज्यादा आबादी वाले बाहरी देश  कनाडा में मौजूद खालसा एड के बारे में । क्या है इसकी खासियत और क्या करते है खालसा एड से जुड़े लोग..जिसने सिखों को सबसे अलग, और हटकर पहचान दिलाई है। अपने इस लेख में खालसा एड इन कनाडा के बारे में बात करेंगे और उनकी उपलब्धियों को जानेंगे।

खालसा एड एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का एनजीओ है, जिसकी स्थापना 1999 में की गई थी। खालसा एड की स्थापना रविंदर सिंह  (रवि) ने की थी, जिसका हेड ऑफिस ब्रिटेन में है, रविंदर सिंह रवि ने खालसा एड की स्थापना तब की जब वो कोसोवो में शरणार्थियों के साथ फंस गए थे। खालसा एड ‘सरबत दा भला’ की सिख विचारधारा से प्रेरित है, जिसका मतलब होता है कि सबका भला हो। मानवता के भले के लिए सीमाओं, जाति और धर्म की परवाह किए बिना भलाई का काम किया जा सकें। खालसा एड संस्था असल में दुनियाभर के लोगो की मदद करने का काम करती है। खासकर आपदा क्षेत्रों और नागरिक संघर्ष क्षेत्रों में  में बाढ़, भूकंप जैसे प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के कारण पीड़ित लोगो की सेवा और सहायता करती है।

जिनकी एक संस्था कनाडा में भी मौजूद है। कनाडा के खालसा एड का नाम तब बहुत उछला था जब 2021 में  भारत में तीन कृषि कानूनो के लिए पंजाब समेत कई राज्यों के किसानों ने किसान आंदोलन शुरु किया तब कनाडा के न केवल सिख संगठनो ने बल्कि कनाडा के खालसा एड ने भी किसानो की मदद और उनकी सेवा के लिए बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। इस दौरान खालसा एड ने न केवल किसानो की आर्थिक मदद की थी, बल्कि करीब 10 महीने चलने वाले इस आंदोलन में खालसा एड ने किसानो को खाना पानी और रहने के लिए सुविधाये मुहैया कराई थी।

खालसा एड कनाडा को किसान आंदोलन में उनकी की गई सेवा के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए ब्रिटेन के ‘खालसा एड एनजीओ’ को नॉमिनेट किया था, जिसकी जानकारी खुद कनाडा के सांसद और द नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के अध्यक्ष टिम एस उप्पल ने ट्वीट कर  दी थी। खालसा एड को नोबेल पुरस्कार देने के लिए नोबेल कमेटी के अध्यक्ष बेरिट रीस एंडरसन को पत्र लिखा गया था। उन्होंने पत्र में ये कहा कि खालसा एड असल में एक ऐसी संस्था है जो सिर्फ मानवता की सेवा करने का उद्देश्य रखती है। जो 2 दशकों से भी ज्यादा समय से आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता कर रही है और उसके बदले वो किसी से कोई मांग नहीं करती है।

उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए, और मानव कल्याण की दिशा में उनके किये गए कार्यों के लिए वो नोबेल पुरुस्कार डिजर्व करते है। इस वक्त खालसा एड कनाडा के निदेशक के तौर पर जतिंदर सिंह कार्य कर रहे है, जो युवाओं को प्रोत्साहित करते है खालसा एड से जुड़ने के लिए… हर आपातकाल की स्थिति में भी सदैव तत्पर खड़े रहने वाले खालसा एड को शुरु करने वाले एक सिख ही थे,,, खालसा एड के कार्यों से उनकी भावनाएं साफ होती है, कि चाहे हालात कुछ भी हो, जहां खालसा एड की मदद की जरूरत होगी वहीं खालसा एड के लोग मदद पहुंचाने में अपनी जान की बाजी लगाने के लिए तैयार है। कहते है न कि जहां सिख है वहां डर किस बात का.. बस इसी लिए शायद दुनिया का भरोसा भी खालसा एड को लेकर बेहद मजबूत है।

हालांकि नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित तो नहीं किया गया लेकिन उसके लिए नॉमिनेशन मिलना ही बहुत बड़ी उपलब्धि है, जो इशारा कर रही है कि आखिर क्यों खालसा ऐड आज दुनिया भर में इतनी प्रचलित संगठन के रूप में स्थापित हो चुकी है। इस वक्त ये 40 से ज्यादा देशों में स्थापित किया जा चुका है, इस वक्त खालसा एड के ऑफिस में 17 employee है और 7 ट्रस्टी है, साथ ही 165 Volunteers काम कर रहे है। इसके सीईओ रवि सिंह, सीटीओ परमजीत सैनी और सीएफओ सती कलसी शामिल है।

आज ये संगठन स्वयं सेवी मॉडल से बदलकर कर्मचारियों को शामिल करने वाले संगठन में बदल गया है, लेकिन इससे जुड़े लोग दुनियाभर में अपनी इच्छा से इससे जुड़ कर मदद करते है। जो खालसा एड की सालो की मेहनत का नतीजा है। सिखो का ये संगठन हर किसी कोएक नजरो से देखता है, जो सिक्खी की सबसे बड़ी खासियत है। खालसा एड के कामो को सुनकर हर सिख का सीना गर्व से फूल उठता है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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