Bangladesh Election: Bangladesh में हुए 2026 के आम चुनाव परिणामों ने पलटा सत्ता का तख्ता, वोटों की गिनती के साथ ही यह साफ हो गया है कि जनता के भारी समर्थन और चुनाव परिणामों ने सत्ता का तख्ता पलट दिया है। 17 साल के लंबे अंतराल के बाद तारिक रहमान (Tarique Rahman) की बीएनपी (BNP) न केवल मजबूती से उभरी, बल्कि बहुमत का आंकड़ा पार कर एक नए युग की शुरुआत की है। तो चलिए इस लेख जानते है।
कौन हैं तारिक रहमान?
तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ था। वे बांग्लादेश की तीन बार प्रधानमंत्री रहीं Khaleda Zia और पूर्व राष्ट्रपति Ziaur Rahman के बेटे हैं। 1971 में जब बांग्लादेश की आजादी की जंग चल रही थी, तब तारिक सिर्फ चार साल के थे। उस दौरान उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी रखा गया था। उनकी पार्टी Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) उन्हें “युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों” में गिनती है। राजनीति उन्हें विरासत में मिली। 1991 में जब उनकी मां खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनीं, तब भी तारिक ने अहम भूमिका निभाई थी।
17 साल का निर्वासन और कानूनी लड़ाई
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि तारिक रहमान का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। उन पर भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों के करीब 84 मामले दर्ज थे। मार्च 2007 में सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जेल में रहने के दौरान उन्होंने यातनाएं झेलने का भी आरोप लगाया। सितंबर 2008 में जमानत मिलने के बद वे इलाज के बहाने लंदन चले गए और वहीं 17 साल तक निर्वासन में रहे। हालांकि वे राजनीति से दूर नहीं हुए। वीडियो कॉल, सोशल मीडिया और डिजिटल सभाओं के जरिए उन्होंने पार्टी की कमान संभाले रखी।
कैसे बदली किस्मत?
2024 में Sheikh Hasina की सरकार गिरने के बाद देश के राजनीतिक और कानूनी हालात बदले। 2026 की शुरुआत तक तारिक रहमान को कई बड़े मामलों में बरी कर दिया गया। वहीं इनमें वह मामला भी शामिल था, जिसमें 2018 में उन्हें शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। दिसंबर 2025 में वे 17 साल बाद ढाका लौटे। इससे पहले वे अंतरिम सरकार के प्रमुख Muhammad Yunus से लंदन में मुलाकात कर चुके थे। इसे उनकी वापसी का संकेत माना गया।
चुनाव में शानदार प्रदर्शन
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक बता दें कि 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 151 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है और कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। तारिक रहमान खुद ढाका-17 और बोगुरा-6 सीट से चुनाव जीते हैं। बोगुरा उनका पुश्तैनी इलाका है। ढाका-17 राजधानी की अहम सीट मानी जाती है। इन दोनों सीटों से बड़ी जीत ने उनके राजनीतिक कद को और मजबूत कर दिया है।
आगे की चुनौतियां
हालांकि बहुमत मिलने के बाद सरकार बनाना आसान लग रहा है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। देश की अर्थव्यवस्था को संभालना, राजनीतिक स्थिरता कायम रखना, विरोधी दलों के साथ संतुलन बनाना और लंबे समय से चले आ रहे ध्रुवीकरण को कम करना। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि तारिक रहमान अपने परिवार की विरासत को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और बांग्लादेश को किस दिशा में ले जाते हैं। 17 साल के लंबे इंतजार के बाद उनकी वापसी सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव मानी जा रही है।





























