Reliance Russian Oil: देश के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज को एक बार फिर रूसी कच्चा तेल मिलने जा रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक महीने के अंतराल के बाद अब रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल की सप्लाई दोबारा शुरू होने वाली है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कंपनी को आखिरी बार दिसंबर में रूसी तेल मिला था और अब फरवरी-मार्च के दौरान नई खेप जामनगर पहुंच सकती है।
दिसंबर के बाद फिर शुरू होगी सप्लाई (Reliance Russian Oil)
रिपोर्ट में कहा गया है कि रिलायंस को पिछली बार दिसंबर 2025 में रूसी कच्चा तेल मिला था। उस समय कंपनी को अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों में एक महीने की राहत मिली थी। इस राहत के तहत 21 नवंबर की डेडलाइन के बाद भी रिलायंस को प्रतिबंधित रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के साथ अपने सौदे पूरे करने की अनुमति दी गई थी। अब चार अलग-अलग सूत्रों का कहना है कि फरवरी और मार्च 2026 में रूसी क्रूड ऑयल की खेप जामनगर रिफाइनरी तक पहुंच सकती है।
दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी में होगी प्रोसेसिंग
गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस की रिफाइनरी दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनिंग कॉम्प्लैक्स मानी जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, अन्य भारतीय रिफाइनरियों की तरह रिलायंस भी रूसी तेल की खरीद गैर-प्रतिबंधित विक्रेताओं के जरिए करेगी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि फरवरी और मार्च के लिए कितने कार्गो बुक किए गए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि मार्च के बाद रिलायंस रूसी तेल की खरीद जारी रखेगी या नहीं। इस मामले पर रॉयटर्स ने रिलायंस को ईमेल भेजा, लेकिन कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
पहले रोजाना 5 लाख बैरल तेल ले रही थी रिलायंस
जानकारी के मुताबिक, रिलायंस पहले रोसनेफ्ट के साथ एक लॉन्गटर्म डील के तहत जामनगर रिफाइनरी के लिए करीब 5 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चे तेल का आयात कर रही थी। जामनगर रिफाइनरी की कुल क्षमता लगभग 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, जिससे यह भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में शामिल है।
मिडिल ईस्ट से बढ़ रही है खरीद
हाल के महीनों में भारतीय रिफाइनर कंपनियां अपनी रणनीति में बदलाव करती नजर आ रही हैं। सूत्रों का कहना है कि रिलायंस की वापसी के बावजूद फरवरी और मार्च में भारत का कुल रूसी तेल आयात पहले की तुलना में कम रह सकता है। इसकी वजह यह है कि कई रिफाइनर कंपनियां अब मध्य पूर्व के देशों से कच्चे तेल का आयात बढ़ा रही हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली रणनीति
गौरतलब है कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारतीय रिफाइनरियां रियायती रूसी कच्चे तेल की बड़ी खरीदार बन गई थीं। लेकिन अब वैश्विक हालात और प्रतिबंधों की अनिश्चितता को देखते हुए कंपनियां अपने सोर्स बदल रही हैं। रिलायंस के रिफाइनिंग और मार्केटिंग के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्रीनिवास टी ने हाल ही में कहा था कि कई बार अचानक प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जिससे खरीद में कटौती करनी पड़ती है।
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