Who Is Tejasvi Ghosalkar: मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव में इस बार कई बड़े सियासी उलटफेर देखने को मिले, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में रही तेजस्वी घोसालकर की जीत। दहिसर के वार्ड नंबर-2 से उन्होंने शानदार अंतर से चुनाव जीतकर न सिर्फ अपनी सियासी ताकत साबित की, बल्कि खुद को मुंबई की राजनीति के बड़े चेहरों में भी शामिल कर लिया है। इस जीत के बाद अब बीजेपी के भीतर उन्हें मुंबई के मेयर पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है।
खास बात यह है कि तेजस्वी घोसालकर ने चुनाव से महज एक महीने पहले ही शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। इसके बावजूद उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार को 10 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हराकर साफ कर दिया कि जनता का भरोसा उनके साथ है।
दहिसर से जीत, सियासत में मजबूत वापसी (Who Is Tejasvi Ghosalkar)
तेजस्वी घोसालकर इससे पहले भी नगर निगम की राजनीति में अपनी पकड़ दिखा चुकी हैं। साल 2017 के बीएमसी चुनाव में उन्होंने तत्कालीन अविभाजित शिवसेना के टिकट पर वार्ड नंबर-1 से जीत दर्ज की थी। एक बार फिर बड़ी जीत हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि क्षेत्र में उनकी जमीनी पकड़ मजबूत है और लोग उन्हें सिर्फ एक राजनीतिक नाम नहीं, बल्कि अपने बीच की नेता मानते हैं।
मेयर पद की रेस में क्यों आगे हैं तेजस्वी?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी घोसालकर की बढ़ती लोकप्रियता, महिला वोटर्स में अच्छी पकड़ और हालिया चुनावी प्रदर्शन उन्हें मेयर पद के लिए एक मजबूत दावेदार बनाता है। बीजेपी के भीतर भी यह चर्चा तेज है कि अगर हालात अनुकूल रहे, तो तेजस्वी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
राजनीतिक विरासत से जुड़ा नाम
तेजस्वी घोसालकर, शिवसेना के पुराने और भरोसेमंद नेता रहे विनोद घोसालकर की बहू हैं। विनोद घोसालकर बाल ठाकरे के दौर से मातोश्री के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं और वह पूर्व विधायक भी रह चुके हैं। तेजस्वी के पति अभिषेक घोसालकर भी सक्रिय राजनीति में थे और मुंबई जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक रह चुके थे।
पति की हत्या से बदली जिंदगी की दिशा
साल 2022 तेजस्वी घोसालकर के जीवन का सबसे दर्दनाक मोड़ साबित हुआ। उनके पति अभिषेक घोसालकर की फेसबुक लाइव के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह वारदात मौरिस नोरोन्हा ने की थी, जिसने बाद में खुद को भी गोली मार ली। इस हत्याकांड ने न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था।
इस घटना के बाद तेजस्वी को उसी बैंक के निदेशक मंडल में शामिल किया गया, जिस पर बीजेपी विधायक प्रवीण दारकेकर का प्रभाव माना जाता है। यहीं से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि तेजस्वी आगे किस राजनीतिक राह को चुनेंगी।
शिवसेना (UBT) से क्यों लिया अलग होने का फैसला
तेजस्वी घोसालकर 2017 से 2022 तक शिवसेना की पार्षद रहीं। बाद में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके कुछ समय बाद उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की और यह फैसला बीएमसी चुनाव में उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ।
BMC चुनाव में महायुति की बढ़त
बीएमसी चुनाव के नतीजों और रुझानों की बात करें तो मतगणना शुरू होने के बाद 227 वार्ड में से 210 वार्ड के रुझान सामने आए, जिनमें बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) बढ़त बनाए हुए हैं। टीवी चैनलों के मुताबिक, बीजेपी करीब 92 वार्ड में आगे रही, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 26 वार्ड में बढ़त बनाए हुए थी।
महायुति गठबंधन बीएमसी में सत्ता के लिए जरूरी 114 के बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच चुका है।
ठाकरे भाइयों की जोड़ी भी नहीं दिखा सकी असर
करीब दो दशक बाद साथ आए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की जोड़ी भी इस बार खास असर नहीं दिखा सकी। शिवसेना (यूबीटी) करीब 60 वार्ड में और मनसे नौ वार्ड में आगे रही। वहीं, राज ठाकरे की पार्टी मनसे को कई शहरों में खाता खोलने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
राज्यभर में चुनावी तस्वीर
ठाणे में शिंदे गुट की शिवसेना 18 वार्ड में और बीजेपी 10 वार्ड में आगे रही। पुणे में बीजेपी ने राकांपा को पीछे छोड़ते हुए 43 सीटों पर बढ़त बनाई। पिंपरी-चिंचवड में बीजेपी 70 और अजित पवार की राकांपा 40 सीटों पर आगे रही।
चार साल बाद हुए चुनाव, कम रहा मतदान
बीएमसी का सालाना बजट 74,400 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यहां चार साल की देरी के बाद चुनाव कराए गए। चुनाव में 52.94 फीसदी मतदान दर्ज किया गया, जो 2017 के मुकाबले कम रहा। इन चुनावों के जरिए साफ हो गया कि मुंबई की राजनीति अब नए चेहरे और नए समीकरणों की ओर बढ़ रही है और तेजस्वी घोसालकर इसी बदलाव की बड़ी तस्वीर बनकर उभरी हैं।






























