Sikhism in maharastra: जब सिख धर्म में बलिदान की बात होती है तो सिखो के सभी गुरुओं के बलिदान को कैसे भुलाया जा सकता है लेकिन इन सब बलिदानों में दशम गुरु के बलिदान को सबसे ज्यादा याद किया जाता है। सिख धर्म की मर्यादा को बनाये रखने के लिए उन्होंने अपने चारों बेटे का बलिदान दे दिया.. धर्म की रक्षा के लिए वो आजीवन लड़ते रहे… जगह जगह यात्रायें की..लेकिन उनकी बहादुरी की मिसाल पेश करने वाले तो खुद उनके चारों बेटे थे।
जिन्होंने सिर कटाना मंजूर किया लेकिन मुगलो के आगे झुकना नहीं, उसी बलिदान की कहानी कह रहा है महाराष्ट्र के नांदेड़ में मौजूद गुरुद्वारा तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब। पांचो अकाल तख्तों में एक तख्त महाराष्ट्र में भी मौजूद है जो बताता है कि महाराष्ट्र और सिखों की कहानी काफी पुरानी और ऐतिहासिक है। महाराष्ट्र की धरती असल में सिखो के लिए बेहद पवित्र और अहम है।
महाराष्ट्र के बारे में
महाराष्ट्र का गठन 1 मई 1960 को किया गया था। महाराष्ट्र भारत के पश्चिमी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में मौजूद दक्कन पठार का एक बड़ा हिस्सा है। जो कि अरब सागर के किनारे बसा हुआ है। महाराष्ट्र असल में भारर के केंद्रिय हिस्से में आता है, जो कि चारों तरफ से 7 अलग अलग राज्यों से घिरा हुआ है। महाराष्ट्र भारत में दूसरा सबसे आबादी वाला राज्य है, और दुनिया में चौथा सबसे ज़्यादा आबादी वाला राज्य भी है। भारत की आर्थिक राजधानी मुम्बई भी महाराष्ट्र की राजधानी भी है, जो कि फिल्म इंडस्ट्री का भी गढ़ है। महाराष्ट्र में 36 जिले है, और इन जिलो की अपनी महत्ता है।
महाराष्ट्र का क्षेत्रफल कितना है?
माराठी इसकी ऑफिशियल भाषा है। वहीं बात करें महाराष्ट्र के क्षेत्रफल की तो उसका कुल क्षेत्रफल 307,713 वर्ग किलोमीटर है, जो कि भारत की तीसरा सबसे ज्यादा क्षेत्रफल वाला राज्य है। जो कि भारत की भूमिका का 9.36% हिस्सा कवर करता है. वहीं महाराष्ट्र की आबादी 2025 के अनुसार 12 करोड़ 86 लाख 59 हजार के आसपास है। जब हम महाराष्ट्र की बात करते है तो आपके जेहन में वीर माराठो और वीर शिवाजी की बहादुरी का ख्याल न आये तो महाराष्ट्र की कहानी ही अधूरी है।
महाराष्ट्र वीरो की धरती है। सिखो के अलावा जिन्होंने मुगलो के सामने सीना ठोक कर उन्हें चुनौती दी थी वो थे मराठा लड़ाके, जिनकी वीरता की कहानी आज भी महाराष्ट्र की गलियों में सुनाई देती है। महाराष्ट्र एक हिंदू बहुल जनसंख्या वाला राज्य है, 2011 के आकड़ो के अनुसार महाराष्ट्र में 79.8 प्रतिशत हिंदू थे तो वहीं सिखों का आबादी महाराष्ट्र में मात्र 0.20 प्रतिशत थी।
महाराष्ट्र में सिख धर्म की शुरुआत
महाराष्ट्र में सिख धर्म के इतिहास की बात करें तो सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा है। सिखों के एक समुदाय सिकरीगर सिखों के बारे में आपने पहले भी सुना होगा…सिकलीगर सिख मूल रूप से राजपूत मूल के शस्त्रागार बनाने वाले समुदाय से आते है, जिन्होंने गुरु साहिब के आदेश पर सिख लड़ाको के लिए शस्त्र बनाए थे, वो लोग गुरु साहिब से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने सिख धर्म अपना लिया। गुरु गोबिंद सिंह जी ने “शस्त्रास्त्र प्रथा” की नींव रखी थी, जिसके बाद सिकलीगर समुदाय को खालसा पंथ से भी जोड़ा, जिससे वे ‘मीरी और पीरी’ के प्रतीक के रूप में हथियार बनाने लगे थे। आज के समय में दक्कन क्षेत्र सिकलीगर सिखों का गढ़ है लेकिन उन्हें अभावों और जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं सिखों के दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने अपने बच्चों की मृत्यु के बाद नांदेड़ में ही रहने का फैसला किया और गोदावरी नदी के किनारे अपने अनुयायियों के साथ रहने लगे। गुरु साहिब से प्रभावित होकर बंजारा समूह और सिकलीगर समुदायों ने सिख धर्म में परिवर्तन किया और वो सिख धर्म की परंपरा को आगे बढ़ाने लगे। मौजूदा समय में मुंबई, पुणे और नागपुर , नासिक, औरंगाबाद जैसे शहरों में सिख की संख्या अच्छी खासी है, जो कि राज्य की संपन्नता और उसके आर्थिक विकास में अहम रोल निभा रहे है।
महाराष्ट्र के सिखों का इतिहास पाठ्यक्रम में पढ़ाया
महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहां पाठ्यक्रम में छात्रों को सिखों के इतिहास को पढ़ाया जाता है, यानि की महाराष्ट्र हमेशा से ही सिखों के लिए बेहत सम्मान की भावना रखता है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में करीब 223,000 सिख रहा करते थे, जो कि महाराष्ट्र में एक अल्पसंख्यक समुदाय है। वहीं सिख गुरुओ को समर्पित मुम्बई का जी एन खालसा कॉलेज काफी प्रचलित कॉलेज है। वहीं नांदेड़ का हूजूर साहिब गुरुद्वारा हर एक सिख के लिए सबसे अहम गुरुद्वारा माना जाता है। पांचो तख्तों में से एक तख्त हूजूर साहिब गुरु साहिब के अंतिम दिनों की कहानी के रूप में खड़ा है।
मौजूद समय में महाराष्ट्र में कितने गुरूद्वारे
पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब को 11वें और अंतिम गुरु के रूप में भी गुरु साहिब ने महाराष्ट्र की धरती पर ही उपाधि दी थी। इसके अलावा हीरा घाट साहिब गुरुद्वारा, मुम्बई में मौजूद गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार, गुरूद्वारा दशमेश दरबार, गूरूद्वारा कलगीधर सभा जैसे प्रमुख गुरुद्वारे है, जो हर सिख के लिए ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के लिए सदैव खुले रहते है, इसी के साथ अनगिनत गुरुद्वारे मौजूद है।
महाराष्ट्र के बिना सही मायने में सिखों का गौरवपूर्ण इतिहास ही अधूरा है। ये महाराष्ट्र की ही धरता है जहां रह कर गुरु साहिब ने सभी को गुरु ग्रंथ साहिब दिया था, गुरु साहिब जो कि सब कुछ जानते थे, सब कुछ देख सकते थे, उन्होंने अगर नांदेड़ को अपना अंतिम स्थान चुना..जो आप उसका अंदाजा लगा सकते है कि वाकई में नांदेड़ कितनी पवित्र और महान धरती होगी।






























