Sikhism in Rajasthan: राजस्थान का एक खूबसूरत शहर है धौलपुर… और इसी धौलपुर में सिखो के छठे गुरु गुरु श्री हरगोबिंद सिंह जी का ऐतिहासिक महानता और साहस को दर्शाने के लिए बड़ी शान से खड़ा है… शेर शिकार गुरुद्वारा। और इसी गुरुद्वारे के आसपास हर साल 3, 4 और 5 मार्च को सिख समाज की ओर से भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब के साथ साथ भारत के अलग अलग हिस्सो से सिख इस जगह पर गुरु साहिब के साहस को प्रणाम करने के लिए आते है। ये गुरुदवारा ही नहीं बल्कि यहां लगने वाला ये मेला राजस्थान में सिखों के महान इतिहास की कहानी कहता है। सिख जिनकी आबादी राजस्थान की जनसंख्या का करीब 2 प्रतिशत है। वो राजस्थान के विकास में अहम रोल निभा रहे है। अपने इस वीडियो में हम राजस्थान में सिखों की कहानी को जानेंगे।
राजस्थान के बारे में
राजस्थान भारत में क्षेत्रफल की दृष्टि से पहला राज्य है, वहीं आबादी के मामले में इसका 17वां स्थान है। राजस्थान की स्थापना 30 March 1949 को हुई थी। राजस्थान को राजपूताना लड़ाको के लिए जाना जाता है। राजस्थान की मिट्टी का एक एक कण वीर राजपूताना की महानता, वीरता और साहस की कहानी कहता है। जो ये बताता है कि राजस्थान में केवल पुरुष ही वीर नहीं हुए बल्कि वीर विरांगनायें भी हुई। दुश्मनों के खिलाफ लोहा लेते हुए उनके आगे झुकने के बजाये वीरांगनाओं ने जौहर करना स्वीकार किया। जौहर करना इसी राजस्थान की मिट्टी की वीरांगनाओं ने शूरू किया था। यहां भारत का थार रेगिस्तान मौजूद है जिसे ग्रेट इंडियन डेजर्ट कहा जाता है।
राजस्थान का क्षेत्रफल 342,239 वर्ग किलोमीटर है, तो वही इसकी आबादी 2025 के अनुसार 8.15 करोड़ के आसपास है। राजस्थान की राजधानी जयपुर है जिसे पिंक सीटी भी कहा जाता है। राजस्थान अलावली पर्वमाला का घर है, तो वहीं माउंट आबू यहां का एकमात्र हिल स्टेशन है। राजस्थान में कुल 41 जिले है, और उसका हर एक जिला पर्यटन की दृष्टि में काफी प्रचलित है। राजस्थान का समृद्ध इतिहास, इसके मजबूत किलो और महलों की कहानी बताते है कि राजस्थान भारत के उन हिस्सों में से एक है जिसकी विविधता सबसे अलग और अनोखी है। राजस्थान का पारंपरिक परिधान, वहां का खाना, वहां का रंग बिरंगा परिवेश दुनिया भर के लोगो को आकर्शित करता है।
राजस्थान में सिख धर्म शुरुआत
जब हम राजस्थान में सिख धर्म की बात करते है तो ये छठे गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब से जुड़ा है, उनका जन्म पांचवे गुरू अर्जन देव और माता गंगा के यहां 1595 में हुआ था। उस दौरान भारत में मुगल शासक जहांगीर का शासन चल रहा था, गुरु अर्जन देव जी मृत्यु जहांगीर की प्रताड़ना के कारण ही हुई थी, लेकिन छठे गुरू ने जहांगीर की जान बचा कर ये साबित किया कि जब भी कोई सच्चे दिल से उनकी मदद मांगेगा, सिख हमेशा उनके लिए खड़े रहेंगे, चाहे वो उनके पिता का ही हत्यारा क्यों न हो। राजस्थान का सबसे प्रचलित गुरुद्वारों में शामिल गुरुद्वारा शेर शिकार…जहांगीर की उसी सच्ची पुकार का प्रतीक है, जब उसने शेर से बचने के लिए छठे गुरु को याद किया और छठे गुरु ने तुरंत वहां आकर न केवल उसकी जान बचाई बल्कि शेर का सिर भी धड़ से अलग कर दिया।
काबुल-गांधार का युद्ध
लेकिन तब यहां केवल एक सूचक बना हुआ था, लेकिन 1857 की क्रांति में धौलपुर महाराज राना भगवंत सिंह की मदद के लिए पटियाला से सिख सैनिक आए थे, उनकी इस सहायता के बदले शेर शिकार गुरुद्वारे का निर्माण करवाया, जिसे लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया और गुरुद्वारे की छतरी पर लाल पत्थर से बने शेर प्रतीक है गुरू साहिब के योगदान का। वहीं इतिहासकारों की माने तो 1857 की क्रांति से पहले 17वी सदी में सवाई जयसिंह ने जयपुर शहर बसाया था।
तब उन्होंने काबुल-गांधार का युद्ध जीतकर आते वक्त जिन सिख परिवारो को लाकर आमेर में बसाया था उन्हें आमेर से जयपुर में बसाया और गुरुद्वारे के लिए जमीन दी, जहां एक कुआं मौजूद था, जिसका पानी अमृत जैसा था, कहा जाता है कि उस कुएं के पानी को भरकर राजद्वारे ले जाया जाता था। जहां सिख संगत करते, लंगर करते थे, प्रसाद तैयार करते और इस कुएं के पानी का इस्तेमाल किया करते थे।
राजस्थान में 100 से ज्यादा गुरुदवारे मौजूद
चौड़ा रास्ता में गोवर्धन नाथ जी गली (धामाणी मार्केट) में पहले सिख गुरुद्वारे की स्थापना की गई थी। 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में जब करीब 8 लाख 72930 सिख रहा करते थे, जो कि उस वक्त राजस्थान की जनसंख्या का 1.27 प्रतिशत था। राजस्थान का श्रीगंगानगर सिखो की आबादी के मामले में मिनी पंजाब कहलाता है, जहां सिख आबादी असल में हिंदुओं की आबादी के बाद दूसरे स्थान पर है। यहीं पर राजस्थान का सबसे बड़ा गुरुद्वारा बुड्डा जोहड़ मौजूद है, जिसे राजस्थान का अमृतसर भी कहा जाता है।
हर साल सावल मास की अमावस्या को यहां भव्य मेला लगता है। राजस्थान में सिखों के प्रभाव के कारण ही वहां 100 से भी ज्यादा गुरुदवारे मौजूद है। जो सिखों के अस्तित्व, उनके साहस और पराक्रम का प्रतीक है। हालिंक बीते कुछ सालों में सिखों को नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन ये केवल स्थानीय लोगो की विकृत सोच का नतीजा है, क्योंकि राजस्थान की धरती पर सिख हो या गैर सिख..सभी सिख धर्म का पूरा सम्मान करते है।






























