Inflationary pressure in 2025: हर साल की तरह, इस साल भी कई बड़े आर्थिक बदलाव (Economic changes) हुए, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। वही साल 2025 भारत के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा, लेकिन आखिरकार यह एक पॉजिटिव नोट पर खत्म हुआ। दिसंबर 2025 के लेटेस्ट आंकड़ों और सरकारी डेटा (Government data) के अनुसार, महंगाई में काफी गिरावट आई और जॉब मार्केट में सुधार हुआ। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं उन चीजों के बारे जिन में बदलाव आये है जिनके कारण आम जनता की जिंदगी में बदलाव हुआ हैं।
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महंगाई (Inflation) बड़ी राहत
साल 2025 में महंगाई दर में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है। जो अभी तक में बड़ी उपलब्धि साबित हुयी हैं। जिसमे जनवरी 2025 में जो महंगाई 4.26% थी, वह नवंबर 2025 तक घटकर 0.71% पर आ गई। अक्टूबर में तो यह 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर थी। वही आम आदमी की रसोई में पायी जाने वाली चीजों भी कई बड़े बदलाव हुए जिसमे खाने-पीने की चीजें जैसे सब्जियों, दालों और मसालों की कीमतों में कमी के कारण खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) में बड़ी गिरावट आई है, जिससे आम आदमी की रसोई का बजट सुधरा है। वही GST में बदलाव की वजह से सीमेंट और दोपहिया वाहनों जैसे सामानों पर GST दरें 28% से घटाकर 18% करने से निर्माण और परिवहन सस्ता हुआ है।
नौकरियां और रोज़गार मिला-जुला असर
बात करे अगर रोजगार की तो कई सरकारी आकड़ो के मुताबिक रोज़गार की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं जिनमे आने वाले समय पर बड़ा बदलाव हो सकता है। वही अगर बेरोजगारी (Unemployment) दर की बात करें तो नवंबर 2025 में भारत में बेरोजगारी दर गिरकर 4.7% हो गई, जो अप्रैल के बाद सबसे कम स्तर पर नापी गयी है।
दूसरी और शहर के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में रोज़गार की स्थिति में सुधार हुआ है (3.9% बेरोजगारी), लेकिन शहरी इलाकों में यह अभी भी 6.5% से 6.9% के आसपास बनी हुई है। साथ ही AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और मशीन लर्निंग के क्षेत्रों में नौकरियों में 61% की बढ़ोतरी देखी गई है। जिसके कारण IT और सर्विस सेक्टर में हायरिंग में तेज़ी आई है। आने वाले समय पर ये अच्छे परिणाम दे सकती है।
आम आदमी की स्थिति मध्यम वर्ग के लिए फायदे
सरकार ने 2025 के बजट और पॉलिसी सुधारों के ज़रिए मध्यम वर्ग की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाने पर ज़ोर दिया है। जिनमे कई चेंज हुए , जो नौकरी में सहयका बना है। वही टैक्स में राहत की वजह से और नई टैक्स व्यवस्था के तहत, ₹12 लाख तक की सालाना इनकम को टैक्स-फ्री कर दिया गया है। इससे लगभग 90% टैक्सपेयर्स को राहत मिली है।
इसके अलवा बढ़ती इनकम की बात करे तो भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग $2,600 तक पहुँच गई है। वही लोगों का विवेकाधीन खर्च (गैर-ज़रूरी चीज़ों पर खर्च) बढ़ा है। प्रीमियम प्रोडक्ट्स और लाइफस्टाइल की चीज़ों पर खर्च में 15% से 25% की बढ़ोतरी देखी गई है।






























