सिख दंगों के 36 साल बाद कानपुर के 'एक मकान' में ऐसा क्या मिला, जो होने लगी चर्चाएं?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 12 Aug 2021, 12:00 AM | Updated: 12 Aug 2021, 12:00 AM

1984 के सिख दंगों को भला कौन भूला सकता है। देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिखों के खिलाफ दंगे भड़क गए थे। जिसमें ना जाने कितने सिखों का कत्ले आम किया गया था। कई परिवार इस दौरान उजड़ गए थे। इन दंगों को 36 साल से ज्यादा का वक्त हो गया, लेकिन आज भी उन दंगों के पीड़ित इंसाफ के इंतेजार में है। 

SIT ने तोड़ा मकान का ताला

इस बीच इन दंगों को लेकर एक बार फिर से चर्चाएं तेज होती हुई दिखाई दे रही है। वजह है कानपुर का एक कमरा, जिसका ताला हाल ही में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) ने तोड़ा। इस कमरे से दंगों को लेकर कई सबूत SIT की टीम के हाथ लगे हैं। म कान से खून के धब्बे और लाशों को फूंकने के सबूत मिले है। 

सिख दंगों के बाद से ही ये कमरा एकदम बंद पड़ा हुआ था, जिसे अब SIT की टीम ने खोला, तो लगभग अछूता ही पाया। इन सबूतों में मानव अवशेष भी शामिल हैं। SIT ने फॉरेंसिंक टीम के साथ मिलकर इस मकान की जांच की। 

ये मकान कानपुर के गोविंद नगर थानाक्षेत्र के दबौली में स्थित हैं। इसमें एक सिख परिवार रहा करता था। 1 नवंबर 1984 को यहां रहने वाले कारोबारी तेज प्रताप सिंह और उनके बेटे सतपाल सिंह की हत्या हुई थी और उनके शवों को जलाया गया था। घर के जो बाकी सदस्य दंगों के दौरान बच गए थे, वो एक रिफ्यूजी कैंप में रहे और इसके बाद दिल्ली और फिर पंजाब में जाकर बस गए। 

36 सालों से जस का तस मिला मकान 

कानपुर वाला घर उन्होंने बेच दिया था, लेकिन नया मालिक कभी भी यहां आकर रहा नहीं, जिसकी वजह से ये घर जैसे का तैसा ही इतने सालों से बना रहा। अब SIT ने मकान का ताला तोड़कर दंगों से जुड़े कुछ सबूत जुटाए है। 

जानकारी के मुताबिक तेज प्रताप की पत्नी और उनके दूसरे बेटे और बहू ने कानपुर छोड़ने के साथ ही एक सब इंसपेक्टर की तरफ से अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कराया था। रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को SIT, फॉरेंसिक टीम के साथ इस घर में पहुंची थीं। उनके साथ में एक चश्मदीद गवाह भी मौजूद था जो वही रहता है।

पुलिस अधीक्षक और SIT सदस्य बालेंदु भूषण ने बताया कि क्योंकि अपराध वाली जगह में कोई भी छेड़छाड़ नहीं हुई थी,इसलिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के अधिकारियों को बुलाया। जांच के दौरान ये पाया गया है कि हत्याएं इस जगह पर ही हुई थी।

भीड़ ने की थी हत्या और फिर…

SIT की जांच के मुताबिक एक नवंबर 1984 को भीड़ तेज सिंह के घर में घुस आई थी। इस दौरान भीड़ ने उन्हें और बेटे सतपाल को पकड़ लिया था। परिवार के दूसरे सदस्य इस दौरान छिप गए थे। भीड़ ने उनकी दोनों को मारने के बाद घर में लूटपाट मचाई और मकान में भी आग लगा दी थी। 

इसके अलावा SIT ने तेज सिंह के बेटे चरणजीत सिंह का कोर्ट में बयान भी दर्ज कराया है। चरणजीत ने बताया कि इन दंगों के दौरान उनके पिता और भी की नृशंस हत्या हुई थी। जिसके बाद उनके परिवारवाले पंजाब के जालंधर में शिफ्ट हो गए। साथ में दिल्ली में भी एक मकान बनाया है। तेज सिंह की पत्नी का कुछ साल पहले निधन हो चुका था। 

कानपुर में मारे गए थे 127 लोग

यूपी में हुए सिख दंगों को लेकर यूपी में हो रही ये पहली जांच हैं, जिसे सीएम योगी ने शुरू कराया। बता दें कि दिल्ली के बाद कानपुर में ही सिख दंगों के दौरान सबसे ज्यादा कत्ले आम मचा था। इन दंगों के दौरान 127 लोग मारे गए थे।  2019 में सरकार ने दंगे से जुड़े कानपुर में दायर सभी मामलों की जांच के लिए SIT का गठन किया था। 

वैसे ये पहला मकान नहीं जहां सिख दंगों से जुड़े सबूत मिले हो। इससे पहले कानपुर के  नौबस्ता इलाके में एक घर से भी खून के नमूने और आगजनी के सबूत इकट्ठा किए गए थे। यहां दंगे के दौरान सरदुल सिंह और उनके रिश्तेदार मारे गए थे। फिर दंगाईयों ने उनके मकान में आग लगा दी गई थी। दंगों के बाद परिजन घर को जैसे को तैसा छोड़कर चले गए थे। 

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