Pegasus: क्या सच में नेताओं-पत्रकारों की जासूसी कर रही सरकार? जानिए इस स्पाइवेयर से फोन हैक करना कितना आसान?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 19 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 19 Jul 2021, 12:00 AM

बीते दिन से पेगासस स्पाइवेयर एक बार फिर से चर्चाओं में आ गया। ऐसा दावा किया गया कि इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल भारतीय सरकार ने किया है और वो भी भारतीय यूजर्स की जासूसी करने के लिए। दावा ये भी किया जा रहा है कि जिन यूजर्स की सरकार जासूसी करा रही है, उसमें भारतीय पत्रकार और एक्टिविस्ट समेत कई जाने माने नाम शामिल है। 

रिपोर्ट में किए गए हैकिंग के दावे

द गार्डियन, द वाशिंगटन पोस्ट और द वायर समेत 17 अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों की संयुक्त जांच में ये बात सामने आई है। रिपोर्ट में ये दावा किया गया कि पेगासस स्पाइसवेयर के जरिए भारत के 300 से भी ज्यादा फोन हैक किए गए हैं। जिसमें 2 केंद्रीय मंत्री, विपक्ष के तीन नेता, 40 से अधिक पत्रकार, एक जज और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख समेत कई उद्योगपति और कार्यकर्ता शामिल हैं। 

रविवार को आई ‘द गार्डियन’ ने जांच के पहले पार्ट में ये दावा किया कि पूरी दुनिया में पेगासस के जरिए 180 पत्रकारों के फोन को हैक किया गया, इसमें 40 भारत के पत्रकार भी शामिल है। जिसमें ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’, ‘इंडिया टुडे’, ‘नेटवर्क-18’, ‘द हिंदू’ समेत कई मीडिया संस्थानों के पत्रकार शामिल हैं।

इस जांच का आधार क्या है?

फ्रांसीस संस्थान फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटेरनेशनल ने मिलकर ये जांच की और पेगासस स्पाइवेयर की जासूसी की जानकारी इकट्ठा की। फिर इसको दुनिया के कुछ चुनिंदा मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया। ये जांच 50 हजार नाम और नंबर पर आधारित है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 67 फोन की फॉरेन्सिक जांच की, जिसमें से 23 फोन हैक मिले और 14 सेंधमारी की कोशिश की जाने की पुष्टि हुई। ‘द वायर’ ने मुताबिक भारत में भी 10 फोनों की फॉरेन्सिक जांच करवाई गई। जो या तो हैक हुए या फिर उनमें हैकिंग की कोशिश हुई।

वहीं पेगासस से जासूसी का मामला सामने आते ही सुर्खियों में छा गया। इसको लेकर सोशल मीडिया पर तमाम लोग सरकार को घेर रहे हैं। वहीं विपक्षी नेताओं की तरफ से इन आरोपों की जांच कराने की मांग उठने लगी है।

रिपोर्ट पर क्या बोली सरकार?

हालांकि जासूसी को लेकर किए जा रहे इस दावे को लेकर सरकार का भी रूख सामने आया। सरकार ने इस जांच को खारिज किया और आरोपों को निराधार बताया। इसको लेकर एक बयान जारी कर कहा कि इस रिपोर्ट को देश की छवि खराब करने के इरादे से तैयार किया। सरकार से इसमें कोई भी सच्चाई होने से साफ तौर पर इनकार किया।

वैसे ऐसा पहली बार नहीं जब देश में पेगासस स्पाइवेयर सुर्खियों में आय़ा हो। इससे पहले 2019 में भी ये विवादों में घिरा था। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर ये पेगासस स्पाइवेयर क्या है? आइए आपको इसके बारे में थोड़ी जानकारी दे देते हैं…

क्या है पेगासस स्पाइवेयर?

पेगासस को जासूसी की दुनिया का सबसे बड़ा नाम माना जाता है। इजरायल के NSO ग्रुप ने इसे तैयार किया है। इस स्पाइवेयर के जरिए एंड्रॉयड और iOS दोनों की ही जासूसी की जा सकती है। इसकी मदद से वो फोन और डिवाइस तक हैक हो सकते है, जिसका कंपनिया हैकप्रूफ होने का दावा तक करती हैं। 

पेगासस नाम का ये स्पाईवेयर, जो चुपके से किसी भी डिवाइस की जासूसी कर सकता है। बिना यूजर्स की जानकारी के ही ये फोन में इंस्टॉल हो जाता है और फोन में मौजूद गोपनीय जानकारी को हैकर्स तक पहुंचा सकता है। महज एक मिस कॉल तक से ये आपके फोन में आ सकता है। अगर एक बार ये फोन में इंस्टॉल हो जाए, तो हटाना भी उतना आसान नहीं होता। यही नहीं इस स्पाइवेयर के जरिए फोन में मौजूद एंड टू एंड एंक्रिप्टेड चैट भी पढ़ी जा सकती है, जिसका साफ मतलब है कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एप्स भी सुरक्षित नहीं।

बड़ी बात तो ये है कि फोन में इंस्टॉल होने के बाद इस स्पाइवेयर का कोई आइकन तक नहीं बनता, जिससे यूजर्स को इसके बारे में पता चल सके।   

कीमत होती है इतनी ज्यादा

पेगासस सॉफ्टवेयर की कीमत भी काफी ज्यादा होती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये 7 से 8 मिलियन डॉलर यानी 56 करोड़ से भी ज्यादा रुपये का है। इसका लाइसेंस एक साल के लिए मिलता है और एक लाइसेंस की मदद से एक साल में 500 फोन को मॉनिटर किया जा सकता है। एक बार में इसके जरिए 50 मोबाइल फोन पर नजर रखी जा सकती है। 

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