नीतीश कुमार के खिलाफ FIR करने पहुंचे IAS के मामले ने राजनीतिक रंग क्यों ले लिया?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 18 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 18 Jul 2021, 12:00 AM

शनिवार को बिहार की राजनीति उस वक्त गर्मा गई, जब एक IAS अधिकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कराने थाने पहुंच गए। उन IAS अधिकारी का नाम सुधीर कुमार है, जो बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) के सचिव रहे हैं। वो 2017 में पेपर लीक मामले में जेल भी जा चुके हैं।

घंटों तक थाने में इंतेजार करते रहे IAS

बीते दिन IAS सुधीर कुमार सबूतों के साथ सीएम नीतीश कुमार समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए पटना के SC-ST थाने में पहुंचे। इस दौरान वो 4 घंटों तक थाने में बैठे रहे, लेकिन कोई उनकी शिकायत दर्ज नहीं कर रहा था। इस दौरान थानेदार गायब रहे। काफी देर बाद करने के बाद उन्हें ये बताया गया कि FIR की कॉपी अग्रेंजी में हैं और उनको इसे समझने में दिक्कत हो रही है। घंटों इंतेजार के बाद भी FIR तक दर्ज नहीं हुई। सुधीर कुमार के अनुसार इससे पहले वो मार्च में भी शास्त्रीनगर थाने में मामला दर्ज करवाने गए थे। तब वहां भी कुछ नहीं हुआ और केवल एक मुहर लगाकर ही उन्हें वापस भेज दिया गया था।  

नीतीश कुमार पर हमलावर हुआ विपक्ष

IAS के साथ हुए इस बर्ताव ने अब तूल पकड़ लिया है और बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी। विपक्षी नेता लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और चिराग पासवान ने इसको लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जमकर घेरा। विपक्षी नेता कह रहे हैं कि जब एक IAS अधिकारी की ही कोई सुनवाई नहीं हो रही, उनको घंटों इंतेजार कराया जा रहा है, तो आम जनता के साथ कैसा सुलूक किया जाता होगा?

RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को इसको लेकर एक ट्वीट किया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा- “नीतीश कुमार ने बिहार को सर्कस बना दिया है। खबर पढ़, माथा पकड़िए। नीतीश कुमार द्वारा अनुसूचित जाति के अपर मुख्य सचिव के साथ ऐसा सुलूक करना और स्वंय समेत भ्रष्ट अधिकारियों को बचाना नीतीश कुमार के असल चाल चरित्र और चेहरे को उजागर करता है।”

नीतीश कुमार के खिलाफ FIR करने पहुंचे IAS के मामले ने राजनीतिक रंग क्यों ले लिया? — Nedrick News

वहीं तेजस्वी यादव भी इस मुद्दे को लेकर सीएम नीतीश कुमार पर हमलावर हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री को भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह कहा। तेजस्वी ने लिखा- “शर्मनाक और निंदनीय। बिहार में एक अपर मुख्य सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को FIR दर्ज कराने के लिए तरसना पड़ रहा है। बिहार में आप बस गर्वनेंस की कल्पना करें। ऐसे ही थोड़े ना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह कहलाए जाते हैं।”

 वहीं LJP अध्य़क्ष चिराग पासवान ने सीएम को घेरते हुए कहा- “नीतीश कुमार जी आज तक अनुसूचित जाती से आने वाले लोगों का दमन कर रहे हैं। अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की SC/ST थाने में साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद भी FIR दर्ज में इतनी कठिनाई क्यों?”

जानिए पूरा मामला क्या है?

सुधीर कुमार अगले साल की शुरुआत में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनका नाम नौकरी भर्ती घोटाला में आ चुका है। जिसके लिए उन्हें जेल तक जाना पड़ा। उन पर ये आरोप लगे थे कि 2014 में जब वो अध्यक्ष पद पर थे, तब इंटर स्तरीय संयुक्त परीक्षा का पेपर लीक हुए थे। इस मामले में उनको दोषी पाया गया और 2017 में सुधीर कुमार को निलंबित करते हुए गिरफ्तार किया गया। बीते साल अक्टूबर में ही सुप्रीम कोर्ट से उनको जमानत दी गई थीं। 

IAS सुधीर कुमार शिकायत किस मामले में करने आए थे, ये बताने से मना कर दिया। हालांकि उन्होंने बस इतना बताया कि ये दस्तावेजों के फर्जीवाड़े से जुड़ा मामला है। वहीं जब उनसे ये पूछा गया वो कितने लोगों के खिलाफ शिकायत करने आए हैं, तो उन्होंने इस पर कहा कि मैं गिनती नहीं करता। IAS ने कहा कि शिकायत में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक के लोग हैं। जब उनसे बार-बार पूछा गया कि क्या FIR में मुख्यमंत्री का भी नाम है? तो इस उन्होंने हां कहते हुए जवाब दिया। 

उन्होंने इस दौरान सरकार पर तंज कसा और कहा कि बिहार का सुशासन तो देखिए। एक IAS अधिकारी को 4 घंटे इंतजार कराया गया। प्राथमिकी दर्ज नहीं की। सिर्फ मुझे शिकायत की पावती ही दी गई। 

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