RIP Dilip Kumar: कुछ ऐसे हुई थीं दिलीप कुमार की एंट्री, इस वजह से कहा जाता था उन्हें ट्रेजडी किंग!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 07 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 07 Jul 2021, 12:00 AM

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में सुबह करीब साढ़े 7 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। 98 साल की उम्र में उनका निधन हुआ। दिलीप कुमार लंबे वक्त से काफी बीमार चल रहे थे। बीते दिनों ही सांस लेने में तकलीफ होने की वजह से उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

दिलीप कुमार अपने दौर में बेहतरीन एक्टर की लिस्ट में शुमार रहे। वो ‘ट्रेजडी किंग’ के नाम से भी काफी मशहूर थे। फिल्मों में यादगार अभिनय के लिए उनको सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के साथ साथ पद्म भूषण, पद्म विभूषण और पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान-ए-इम्तियाज़’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। वो राज्यसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। 

पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था जन्म

11 दिसंबर 1922 को दिलीप कुमार का जन्म पेशावर शहर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। बचपन का उनका नाम मोहम्मद युसूफ खान था। दिलीप कुमार के पिता का नाम लाला ग़ुलाम सरवर था। वो फल बेचकर अपने परिवार का खर्चा चलाया करते थे। दिलीप कुमार के 12 भाई बहन थे। उनका शुरुआती जीवन काफी तंगहाली में गुजरा। 

…जब छोड़ दिया था घर

1930 में दिलीप कुमार का परिवार मुंबई में आकर बस गया। दिलीप कुमार का अपने पिता के साथ विवाद हो गया था, जिसके चलते 1940 में वो मुंबई वाले घर को छोड़कर पुणे चले आए। इस दौरान उनकी मुलाकात एक कैंटीन के मालिक से हुई। इनकी मदद से आर्मी क्लब में उन्होनें सैंडविच का स्टाल लगाया। कैंटीन का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद वो 5000 की सेविंग के साथ वापस अपने घर मुंबई लौट गए। पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उनकी मदद करने के लिए उन्होनें नया काम तलाशना शुरू किया। 

कुछ यूं हुई फिल्मों में एंट्री

1943 में उनकी मुलाकात चर्चगेट स्टेशन पर डॉ मसानी से हुई, जहां उनको बॉम्बे टॉकीज में काम करने का ऑफर मिला। फिर बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी से भी वो मिले, जिनके साथ उनका 1250 रुपये का अग्रीमेंट हुआ। उनका नाम जन्म से मोहम्मद युसूफ था, लेकिन उन्होंने इसे बदलकर दिलीप कुमार रख दिया। देविका रानी के कहने पर ही उन्होंने ऐसा किया था। 

इसके बाद दिलीप कुमार की मुलाकात दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार से हुई, जो उनकी एक्टिंग से इंप्रेस हुए। शुरू में तो दिलीप कुमार कहानी और स्क्रिप्ट लिखने में मदद किया करते थे। उनकी  पकड़ हिंदी और उर्दू भाषा में काफी अच्छी थीं। 1944 में उनकी पहली फिल्म आई थीं, जिसका नाम ‘ज्वारा भाटा’ था। हालांकि उनकी ये फिल्म फ्लॉप साबित हुई।

दिलीप कुमार की पहली हिट फिल्म ‘जुगनू’ थी। 1947 में आई इस मूवी ने बॉलीवुड में उनको हिट फिल्मों के स्टार की लिस्ट में लाकर खड़ा कर दिया था। 1949 में दिलीप कुमार ने पहली बार राजकुमार के साथ काम किया था। उनकी फिल्म ‘अंदाज’ आई थी, जो हिट साबित हुई। इसके बाद दिलीप कुमार ने दीदार (1951) और देवदास (1955) जैसी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों में गंभीर भूमिकाओं की वजह से मशहूर होने के कारण उन्हें ट्रेजडी किंग कहा जाने लगा।

मुग़ले-ए-आज़म (1960) में उन्होंने मुग़ल राजकुमार जहांगीर का किरदार निभाया था। ‘राम और श्याम’ में उनका डबल रोल किया था, जो आज भी लोगों को हंसा देता है। 1970 से 1990 तक उन्होंने कम फिल्मों में ही काम किया। 1998 में ‘किला’ उनकी आखिरी फिल्म थीं। दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित अभिनेता है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में 5 दशक की लंबी पारी खेली।

दिलीप कुमार की शादी

1966 में दिलीप कुमार की शादी एक्ट्रेस सायरा बानो में हुई थीं। जब दोनों की शादी हुई थी, तब दिलीप कुमार 44 साल और सायरा बानो 22 साल की थीं। 1980 में उन्होनें अस्मा से दूसरी शादी भी की, लेकिन ये ज्यादा समय नहीं टिक पाई।

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