सेकेंड वेव की पीक के दौरान क्या दिल्ली सरकार ने मांगी जरूरत से 4 गुना ज्यादा ऑक्सीजन? लगे ये गंभीर आरोप

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 25 Jun 2021, 12:00 AM | Updated: 25 Jun 2021, 12:00 AM

वैसे तो आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच तकरार होना कोई नई बात नहीं है। आए दिन ही किसी का किसी मुद्दे को लेकर ये दोनों ही आमने-सामने आती रहती हैं। कोरोना काल में भी ये दोनों ही पार्टियां एक दूसरे पर खूब हमलावर रही थीं। 

सुप्रीम कोर्ट ने बनाई थी कमेटी

राजधानी दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हालात काफी ज्यादा खराब हो गए थे। लोगों को बेड के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी थीं। वहीं ऑक्सीजन की भी भारी कमी से दिल्ली के लोग जूझे थे। दिल्ली में ऑक्सीजन की इसी कमी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाई थीं। इस कमेटी में 12 सदस्य थे। ऑक्सीजन ऑडिट करने वाली कमेटी की अध्यक्षता की जिम्मेदारी कोर्ट ने एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया को दी थीं। इसका हिस्सा दिल्ली सरकार के प्रधान (गृह) सचिव भूपिंदर एस. भल्ला भी थे।

इस टीम ने अब अपनी रिपोर्ट पेश की है, जिसको लेकर बवाल खड़ा हो गया। इस रिपोर्ट को लेकर दिल्ली सरकार बुरी तरह से घिर गई हैं। बीजेपी और कांग्रेस, केजरीवाल सरकार पर हमलावर है। इस रिपोर्ट में ऐसा क्या है, जिसकी वजह से दिल्ली सरकार की मुश्किलें बढ़ गई, जानिए इसके बारे में…

रिपोर्ट में क्या बड़ी बात निकलकर सामने आई?

रिपोर्ट में ये कहा गया है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली को जितनी ऑक्सीजन की जरूरत थी, उससे 4 गुना ज्यादा की डिमांड केजरीवाल सरका ने केंद्र से की। रिपोर्ट में कहा गया कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर जब अपने चरम पर थीं, तब दिल्ली सरकार की तरफ से 4 गुना ज्यादा ऑक्सीजन की मांग की गई। 

जहां दिल्ली को तब करीब 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन चाहिए थीं, वहीं केजरीवाल सरकार ने इसके लिए एक हजार से भी ज्यादा मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की। 

सिर्फ यही नहीं, रिपोर्ट में तो ये तक दावा किया गया कि दिल्ली की ऑक्सीजन की जरूरत को पूरा करने की वजह से देश के 12 राज्यों में इसकी भारी कमी का सामना करना पड़ा। 

जांच में पाया गया कि 29 अप्रैल से 10 मई के दौरान दिल्ली के कुछ अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत की रिपोर्टिंग को लेकर कुछ गलतियां हुईं, जिसमें बाद में सुधार किया गया। जहां दिल्ली सरकार के डेटा के अनुसार अस्पतालों को 1140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थीं। वहीं जब अस्पतालों ने गलत रिपोर्टिंग में सुधार किया, तो वास्तविक जरूरत 209 मीट्रिक टन ही पाई गई। भारत सरकार के फॉर्मूले के मुताबिक दिल्ली की ऑक्सीजन की जरूर 289 मीट्रिक टन ही थी। अगर दिल्ली सरकार के भी फॉर्मूले को मान लें तो भी ये जरूरत 391 मीट्रिक टन ही थीं। 

जिन पैनल ने ऑक्सीजन ऑडिट की, उसके कहा कि ऐसा लगता है कि दिल्ली सरकार ने गलत फॉर्मूले का इस्तेमाल किया। कुछ अस्पताल किलोलीटर और मीट्रिक टन के बीच अंतर नहीं कर पाए।

बीजेपी ने घेरा, डिप्टी सीएम ने दिया जवाब

इसी रिपोर्ट को लेकर अब दिल्ली की केजरीवाल सरकार बुरी तरह से घिर गई हैं। बीजेपी ने एक बार फिर दिल्ली सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया। बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस कहा ट्वीट कर कहा- “ये अविश्वसनीय है। जब कोरोना अपनी पीक पर था, तब दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन का राजनीतिकरण किया। रिपोर्ट में ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी ने जो आंकड़े पेश किए, वो हैरान कर देने वाले हैं।” वहीं और भी कई नेता रिपोर्ट को लेकर केजरीवाल सरकार पर बरसते नजर आ रहे हैं। 

इन आरोपों पर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी अपनी राय रखी। सिसोदिया ने है कि जिस रिपोर्ट को लेकर बीजेपी के नेता केजरीवाल को घेर रहे हैं, ऐसी कोई रिपोर्ट है नहीं। उन्होंने बीजेपी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऑक्सीजन ऑडिट को लेकर बनाई गई कमेटी के सदस्यों से हमने बात की। उनका कहना है कि अब तक उन्होंने कोई रिपोर्ट अप्रूव नहीं की, तो ये कौन-सी रिपोर्ट है। ये तथाकथित रिपोर्ट बीजेपी के दफ्तर में बनाई गई। ये मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में हैं, ऐसे में इस पर षडयंत्र नहीं करना चाहिए। 

केजरीवाल ने भी किया ट्वीट

इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पर ट्वीट करते हुए कहा- “मेरा गुनाह- मैं अपने 2 करोड़ लोगों की सांसों के लिए लड़ा। जब आप चुनावी रैली कर रहे थे, मैं रात भर जग कर Oxygen का इंतज़ाम कर रहा था। लोगों को ऑक्सिजन दिलाने के लिए मैं लड़ा, गिड़गिड़ाया। लोगों ने ऑक्सिजन की कमी से अपनों को खोया है। उन्हें झूठा मत कहिए, उन्हें बहुत बुरा लग रहा है।”

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