पुलिस की पाठशाला: IPS अधिकारी ने ऑफिस में खोला निशुल्क पुस्कालय, कुछ ऐसे की इस खास मुहिम की शुरुआत

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 09 Feb 2021, 12:00 AM | Updated: 09 Feb 2021, 12:00 AM

छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही (GPM) जिले के SP सूरज सिंह परिहार अपने नेक कामों के लिए अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं। वो समाज के लिए कई अच्छे काम करते आए हैं। कुछ महीनों पहले सूरज सिंह परिहार ने एक बुक बैंक शुरू करने की बात कही थी, जिसमें उन्होनें लोगों से अपनी पुरानी और नई किताबें दान करने की अपील की थीं। परिहार की इस मुहिम में लोगों ने उन्हें खूब सपोर्ट किया और किताबें दान भी कीं। मुहिम को सफल बनाने में सोशल मीडिया की ताकत काम आई।

अब IPS सूरज सिंह परिहार ने एक निशुल्क ‘पुलिस की पाठशाला’ पुस्कालय की शुरुआत की। बिलासपुर के IG आइजी रतनलाल डांगी ने ‘पुलिस की पाठशाला’ का लोकार्पण किया, जिसका नाम शहीद शिव नारायण बघेल के नाम पर रखा गया। सूरज सिंह परिहार का कहना है कि इस पुस्तकालय में लगभग सभी कोर्स और सारे करियर एंट्रेस एग्जाम की लेटेस्ट किताबें उपलब्ध हैं।

इस वजह से की पुस्कालय की शुरुआत

IPS सूरज सिंह परिहार ने इस पुस्कालय की शुरुआत करने की पीछे की वजह बताई। उन्होनें कहा कि प्रतियोगिता परीक्षाओं की किताबे काफी महंगी होती है, छात्राओं की पढ़ाई में वित्तीय बाधा ना आए इसलिए इसकी शुरुआत की गई।

सूरज सिंह परिहार ने अपनी फेसबुक पोस्ट में इसके बारे में बताया। उन्होनें कहा कि पुलिस समाज की डॉक्टर होती है। समाज की बीमारियों को ठीक करने की जिम्मेदारियों पुलिस की होती है। पुस्तकालयर में उच्च गुणवत्ता की किताबें उपलब्ध कराकर शिक्षा और रोजगार का प्रसार ही वो दवाव है, जिससे समाज की बुरी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। इसलिए उन्होनें पुस्कालय की शुरुआत करने का फैसला लिया।

सूरज सिंह परिहार ने आगे ये बताया कि क्यों उन्होनें इसके लिए GPM जिले को ही चुना? उन्होनें कहा कि GPM जिला एक दूरस्थ अंचल में स्थित आदिवासी बाहुल्य जिला है। उन्होनें बताया कि अक्सर छात्र यहां पर उचित गुणवत्ता की किताबें की कमी के बारे में बात करते थे। जिले में कई बार अप टू डेट पुस्कालय की मांग की गई।

कहां से आया इसके लिए विचार?

IPS ने बताया कि इस पुस्कालय को खोलने का विचार उनके मन में कहां से आया? उन्होनें कहा कि मेरे और मेरी पत्नी के पास ऐसी कई किताबें थीं, जिसका हम सदुपयोग करना चाहते थे। लेकिन हमारे पास इतनी भी किताबें नहीं थी कि लाइब्रेरी खोल सकें। जब दंतेवाड़ा में पोस्टिंग के दौरान भटके हुए युवाओं को करीब से देखने का मौका मिला, तो इसको लेकर विचार और मजबूत हुआ। उन्होनें बताया कि कोरोना काल के दौरान उनका ये प्लान बैक सीट पर चला गया। फिर सितंबर में लोगों के आह्वान पर ट्वीट किया और सोशल मीडिया की शक्ति और समार्थ्य का फायदा उठाकर इसकी शुरुआत की।

परिहार ने अपनी फेसबुक पोस्ट में बताया कि ये निशुल्क पुस्कालय एसपी ऑफिस के आगे के दो कमरों में है, जिसमें पहले कक्ष में रिसेप्शन और इश्यू रूम है, जबकि दूसरे में सीमित संख्या में बैठकर पढ़ सकते हैं। उन्होनें कहा कि इस पुस्कालय में करीब-करीब हर कोर्स और करियर एंट्रेंस एग्जाम की सभी किताबें उपलब्ध है।

जानिए कौन हैं IPS सूरज सिंह परिहार?

ऐसा पहली बार नहीं जब IPS सूरज सिंह परिहार इस तरह का नेक काम कर रहे हो। इससे पहली भी वो कई बार अपने अच्छे कामों को लेकर सुर्खियों में आ चुके हैं। खुद सूरज सिंह परिहार ने काफी मेहनत करने के बाद अपने IPS बनने को पूरा किया। उनका ये सफर संघर्षों से भरा रहा। साल 2000 में उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर.नारायणन के हाथों क्रिएटिव राइटिंग और कविता के लिए बाल श्री अवार्ड से नावाजा गया था।

छोटे से परिवार में जन्मे सूरज सिंह परिहार देश की सेवा करना चाहते थे। उनका सपना IPS बनने का था। आर्थिक स्थिति के चलते उन्होनें कॉल सेंटर में भी जॉब की। उन्होनें इस जॉब को छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन 6 महीनों में ही उनकी सारी सेविंग खत्म हो गई। जिसके बाद सूरज सिंह परिहार ने बैंक में भी जॉब की। 2012 में एसएससी सीजीएल की परीक्षा में उनका सेलेक्शन हो गया। जिसके बाद उन्होंने कस्टम और एक्साइज इंस्पेक्टर की नौकरी ज्वाइन कर ली।

इसके साथ ही वो सिविल सर्विस की तैयारी में भी जी जान से जुटे रहे। तीसरे प्रयास में वो अपने सपने को पूरा करने में कामयाब हुए। ट्रेनिंग के बाद उनको रायपुर में एसपी सिटी नियुक्त किया गया। वहां अच्छे कामों को देखते हुए प्रमोट किया और फिर पोस्टिंग नक्सली प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा में हुईं। वहां उन्होनें युवाओं को जागरूक करने के लिए एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई, जिसका नाम था ‘नई सुबह का सूरज’। वो अक्सर ही समाज के लिए अच्छे काम करने के लिए जान जाते हैं।

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