कोरोना का विश्व में खौफनाक साया, जानें इससे पहले किन खतरनाक वायरसों ने दुनिया को डराया

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 08 फ़रवरी 2021, 12:00 AM 🔄 Updated: 08 फ़रवरी 2021, 12:00 AM
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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को डराया. चीन के वुहान से फैले इस वायरस ने धीरे धीरे दुनियाभर में अपने पैर पसारे और करोड़ों लोगों को मौत की नींद सुला दिया. सुपरपॉवर अमेरिका में इस वायरस ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया. कोरोना ऐसा पहला वायरस नहीं, जिसने इतनी तबाही मचाई. इससे पहले भी ऐसे कई खतरनाक वायरस आए हैं जिन्होंने दुनिया में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था. आइये जानते हैं कौन से थे वो वायरस.

इबोला वायरस

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इबोला वायरस की खोज सबसे पहले 1976 में इबोला नदी के पास हुई थी जो अब कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य है. तब से, वायरस समय-समय पर लोगों को संक्रमित करता आया है. 2014 में पश्चिमी अफ्रीका में इसके फैलने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी. इसमें करीब 74 प्रतिशत संक्रमण परिवार के सदस्यों से हुआ था. इबोला एक दुर्लभ लेकिन घातक वायरस है जो बुखार, शरीर में दर्द और दस्त का कारण बनता है. इससे कभी-कभी शरीर के अंदर और बाहर ब्लीडिंग होती है. जैसे ही वायरस शरीर में फैलता है, यह प्रतिरक्षा प्रणाली और अंगों को नुकसान पहुंचाता है. इससे संक्रमित मरीजों के मरने के स्थिति 90 प्रतिशत होती है.

मारबर्ग वायरस

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मारबर्ग वायरस की सबसे पहले पहचान 1967 में की गयी थी. ये बीमारी युगांडा के कुछ बंदरों में पायी गयी जिससे जर्मनी में लैब में काम करने वाले लोग इसका शिकार हो गए थे. दरअसल इन बंदरों को जर्मनी में इम्पोर्ट किया गया था. इसके लक्षण इबोला से काफी मिलते जुलते थे. इससे संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार और ब्लीडिंग जिसके बाद शरीर के अंग निष्क्रिय होते चले जाते थे. और फिर उस व्यक्ति की मौत हो जाती थी. 1998-2000 में फैली इस बीमारी से 80 फीसद से ज्यादा मौत हुई थी.

एचआईवी

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ये माना जाता है कि HIV कांगो के लोकतांत्रिक गणराज्य में किंशासा से 1920 में उत्पन्न हुआ था. ये चिंपांज़ी से इंसानों में आया है. 1980 से पहले किसी को सही रूप से इस बीमारी की जानकारी भी नहीं थी. 1980 तक, एचआईवी पहले से ही पांच महाद्वीपों (उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया) में फैल गया होगा. इस अवधि में, 100,000 से 300,000 लोगों का पहले ही संक्रमित होने का अनुमान है. ये वायरस इतना खतरनाक है कि अभी तक इस ये बीमारी लाइलाज है. अगर सही समय पर बीमारी का पता चल जाए तो पीड़ित की जान बचाई जा सकती है.

​स्मॉलपॉक्स या चेचक

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1980 में दुनिया को चेचक मुक्त घोषित किया गया. उससे पहले इंसान हजारों साल तक चेचक से जूझते रहे हैं. बड़ी संख्या में चेचक से लोगों की मौत हुई. अकेले 20वीं सदी में करीब 30 करोड़ लोग इसकी वजह से मारे गए थे.

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