भारत की Hydroxychloroquine टैबलेट का विश्व हुआ मुरीद, जानें इससे पहले कब कब मेडिकल क्षेत्र में हुई वाहवाही

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 09 Apr 2020, 12:00 AM | Updated: 09 Apr 2020, 12:00 AM

विश्वभर समेत भारत भी कोरोना संकट से जूझ रहा है. कोरोना से निपटने की भारत की तैयारियों की WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने सराहना भी की है. इसी बीच एक और उपलब्धि है जिसकी वजह से भारत दुनिया का चहेता बन गया है. और ये चमत्कार भारत के मेडिकल सेक्टर की बदौलत हुआ है. जिसकी बनाई गई हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) टैबलेट की तेजी से विश्व भर में मांग बढ़ रही है. दरअसल रिसर्च में ये सामने आया है कि मलेरिया जैसी बीमारी में खायी जाने वाली दवा कोरोना जैसे घातक वायरस से भी लड़ने में कारगर है. लेकिन जान लीजिये ऐसा काफी बार हुआ है जब चिकित्सा क्षेत्र में पूरी दुनिया हमारे देश की मुरीद हुई है. आइये देखें कब कब.

न्यूरोसर्जरी

न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में भारत ने ऐसी टेक्नॉलोजी विकसित की जिसको विश्वभर के डॉक्टरों ने ख़ुशी ख़ुशी अपनाया है. मुंबई के केईएम हॉस्पिटल में काम करने वाले एक न्यूरोसर्जन अतुल गोयल को ये आईडिया आया जिसे बेसिलर इनवेजिनेशन के इलाज में अपनाया गया. ये एक खोपड़ी से संबंधित बीमारी है. अब मुंह की जरिये की जाने वाली सर्जरी की जगह डॉक्टर गोयल की ये तकनीक यूज़ की जाती है.

टीबी की तेज जांच

फरीदाबाद के ट्रांसलेश्नल हेल्थ साईंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट और दिल्ली एम्स ने मिलकर एक ऐसा सिस्टम बनाया जिससे फेफड़ों और आसपास के अंगों में ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के इंफेक्शन के पता जल्दी लगाया जा सकता है. इससे पहले इस टेस्टिंग में काफी देरी लगती थी और एंटीबाडीज के इस्तेमाल से इंफेक्शन का पता लगता था.

आटिज्म जांच

आटिज्म एक ऐसी बीमारी है जिससे व्यक्ति का मानसिक विकास रुक जाता है. लेकिन चंडीगढ़ के एक हॉस्पिटल ने एक ऐसा उपकरण इजाद किया जिससे इस बीमारी का पता शुरुआती स्टेज में ही लगाया जा सकता है. ये टूल शहर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल द्वारा इजाद किया गया. इस टूल जा नाम चंडीगढ़ आटिज्म स्क्रीनिंग इंस्ट्रूमेंट (CASI) है और इसे आटिज्म की स्क्रीनिंग में काफी मददगार पाया गया है.

आंख की सर्जरी

2007 में चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया अध्याय ग्लू से आंख की सफल सर्जरी ने जोड़ा. इसके तहत फिब्रिन ग्लू के इस्तेमाल से आंख की सफल सर्जरी की गई. इस तकनीक में ग्लू से ही एक व्यक्ति की आंखों के सामने पूरे पार्ट का ट्रांसप्लांट का दिया. इस सर्जरी को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान द्वारा किया गया था.

डायबिटीज के लिए सर्जरी

डॉक्टर रमन गोयल और डॉक्टर सुरेन्द्र उगाले ने सर्जरी से डायबिटीज के इलाज का रास्ता साफ़ कर दिया. इलियल ट्रांसपोजिशन मेथड की इस सर्जरी से डॉक्टर मरीज के पेट के पास की टर्मिनल इलियम शिफ्ट कर देते हैं. इससे अनपचे भोजन की मौजूदगी में इन्सूलीन बनने लगता है.

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