Al Falah University News: फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले डॉक्टर निकले ब्लास्ट के मास्टरमाइंड! कौन है इसके पीछे का मालिक?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 11 Nov 2025, 12:00 AM | Updated: 11 Nov 2025, 12:00 AM

Al Falah University News: हरियाणा के फरीदाबाद में हाल ही में 2900 किलोग्राम विस्फोटक मिलने और दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके के बाद जांच एजेंसियां अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर सख्त नजर रखे हुए हैं। वजह यह है कि इस यूनिवर्सिटी से जुड़े दो डॉक्टरों का नाम आतंकी गतिविधियों में सामने आया है। एक ओर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉक्टर मुजम्मिल शकील के कमरे से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया है, तो दूसरी ओर डॉ. उमर नबी मोहम्मद को दिल्ली ब्लास्ट का संदिग्ध माना जा रहा है। इन दोनों का संबंध फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से है, जिसने अब जांच एजेंसियों के घेरे में जगह बना ली है।

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अल-फलाह यूनिवर्सिटी का बढ़ता साया- Al Falah University News

फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की शुरुआत 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। धीरे-धीरे यह संस्थान राज्य के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से एक बन गया। साल 2013 में इसे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने ‘A’ ग्रेड प्रदान किया, और एक साल बाद हरियाणा सरकार ने इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया। यूनिवर्सिटी के साथ ही अल-फलाह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी संचालित होता है, जहां डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. उमर मोहम्मद और लखनऊ की रहने वाली डॉ. शाहीन शाहिद कार्यरत थे।

जांच एजेंसियों को शक है कि यही मेडिकल कॉलेज और अस्पताल कुछ संदिग्ध गतिविधियों का केंद्र बन सकता है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली ब्लास्ट के बाद से ही फरीदाबाद और कश्मीर में जांच तेज कर दी गई है और एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी के प्रशासन से कई अहम दस्तावेज मांगे हैं।

कश्मीर से लेकर फरीदाबाद तक फैला नेटवर्क?

सूत्रों के अनुसार, मुजम्मिल शकील और उमर मोहम्मद दोनों मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। पुलिस को यह भी आशंका है कि इनका संबंध एक बड़े आतंकी नेटवर्क से है, जो फरीदाबाद और दिल्ली में विस्फोटक सामग्री की सप्लाई में शामिल था। 10 नवंबर को फरीदाबाद से बरामद किए गए 2900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट को उसी नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिसका सिरा इन डॉक्टरों तक पहुंचता है।

डॉ. मुजम्मिल के कमरे से बरामद विस्फोटक सामग्री और लैपटॉप की फोरेंसिक जांच चल रही है। वहीं, उमर नबी मोहम्मद की भूमिका दिल्ली ब्लास्ट में संदिग्ध बताई जा रही है। एनआईए और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल दोनों ही मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।

यूनिवर्सिटी की पृष्ठभूमि और प्रबंधन

बता दें, अल-फलाह यूनिवर्सिटी का संचालन अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट करता है, जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी हैं, जिन्होंने वंचित तबके को शिक्षा और चिकित्सा सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से इस संस्थान की नींव रखी थी। ट्रस्ट के अन्य प्रमुख सदस्य हैं – अध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल्ला कासिमी और सचिव मोहम्मद वाजिद।

वर्तमान में यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डॉ. भूपिंदर कौर आनंद हैं, जबकि रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) मोहम्मद परवेज हैं। यूनिवर्सिटी का 80 एकड़ में फैला कैंपस दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया से सिर्फ 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शुरुआत में यह संस्थान अल्पसंख्यक छात्रों के लिए एएमयू और जामिया का विकल्प माना जाता था।

जांच एजेंसियों की नजर

फिलहाल जांच एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी के कई स्टाफ सदस्यों और छात्रों से पूछताछ शुरू कर दी है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या किसी बाहरी संगठन ने यूनिवर्सिटी परिसर का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया।

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