Russian Oil Payment: भारत से चीनी करेंसी में मिल रहा है पैसा, रूसी तेल को लेकर डिप्टी पीएम का बयान  

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 16 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 16 Oct 2025, 12:00 AM

Russian Oil Payment: भारत और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर एक बार फिर हलचल मच गई है। जहां एक ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा, वहीं दूसरी ओर रूस की तरफ से बिलकुल ही उल्टा दावा किया जा रहा है।

दरअसल, रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर अलेक्जेंडर नोवाक ने साफ कहा है कि रूस अभी भी भारत को कच्चे तेल के बड़े सप्लायर्स में शामिल है और यह रिश्ता लगातार मजबूत हो रहा है। यही नहीं, उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि भारत अब रूसी तेल के भुगतान के लिए रूसी करेंसी ‘रूबल’ के अलावा चीनी करेंसी ‘युआन’ का भी इस्तेमाल कर रहा है।

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रूस की तरफ से क्या कहा गया? Russian Oil Payment

रूसी समाचार एजेंसी TASS को दिए इंटरव्यू में अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि भारत ने हाल ही में कुछ भुगतान युआन में करना शुरू कर दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक ज़्यादातर लेन-देन रूबल में ही हो रहे हैं और युआन में पेमेंट की मात्रा फिलहाल काफी कम है।

इससे पहले माना जा रहा था कि भारत मुख्य रूप से रुपए में ही भुगतान करता रहा है, लेकिन अब इस नई जानकारी से यह साफ हो रहा है कि भारत और रूस के बीच तेल कारोबार में और भी कई विदेशी मुद्राएं शामिल हो चुकी हैं।

चीन के बाद भारत बना दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (Centre for Research on Energy and Clean Air – CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में भारत, चीन के बाद रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा। 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तब पश्चिमी देशों ने रूस पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों के बाद रूस ने डॉलर के बजाय युआन और यूएई दिरहम जैसी मुद्राओं का उपयोग बढ़ा दिया, जिससे उसे वैकल्पिक भुगतान रास्ते मिल सके।

क्यों बढ़ा भारत का रूसी तेल आयात?

भारत ने हमेशा मिडिल ईस्ट से तेल खरीद पर ज़्यादा भरोसा किया है, लेकिन फरवरी 2022 के बाद हालात तेजी से बदले। यूक्रेन युद्ध के चलते रूस ने भारत को भारी छूट पर तेल देना शुरू किया, जिससे भारत का झुकाव रूस की तरफ बढ़ा। आंकड़ों के मुताबिक, रूस से भारत का तेल आयात पहले जहां कुल तेल आयात का सिर्फ 1% था, वो अब बढ़कर करीब 40% तक पहुंच गया है।

ट्रंप का दावा – मोदी ने दिया आश्वासन

अमेरिकी राजनीति में फिर से सक्रिय हो रहे डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि उन्होंने पीएम मोदी से बात की और रूस से भारत के तेल आयात को लेकर चिंता जताई। ट्रंप के मुताबिक, “प्रधानमंत्री मोदी ने आज मुझे भरोसा दिलाया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। ये एक बड़ा कदम है।” उन्होंने ये भी कहा कि अब चीन को भी यही करने के लिए मनाना होगा।

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