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Indian Airforce Rafale F4 deal: 114 फाइटर जेट्स और एक बड़ा गेमचेंजर, राफेल F4 डील फिक्स?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 13 Oct 2025, 12:00 AM | Updated: 13 Oct 2025, 12:00 AM

Indian Airforce Rafale F4 deal: भारतीय वायुसेना को लंबे वक्त से जिस एडवांस फाइटर जेट की तलाश थी, वह अब लगभग फाइनल स्टेज में पहुंच चुकी है। देश की स्काई डिफेंस को मजबूत करने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने की तैयारी में है और इस रेस में फ्रांस का Dassault Rafale F4 वर्जन सबसे आगे बताया जा रहा है।

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सूत्रों के मुताबिक, भारत ने राफेल के इस एडवांस वर्जन को लेकर लगभग अपनी हामी भर दी है। यह वही विमान है, जिसका इंतजार भारतीय वायुसेना काफी वक्त से कर रही थी और अब यह डील 2026 तक साइन हो सकती है।

क्या है राफेल F4 की खासियत? Indian Airforce Rafale F4 deal

राफेल F4 मौजूदा राफेल जेट्स का अपग्रेडेड और ज्यादा स्मार्ट वर्जन है। इसे खास तौर पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इस फाइटर जेट में AI-आधारित सिस्टम, नई जेनरेशन के हथियार और हाई-टेक सेंसर शामिल हैं।

F4 वर्जन में बेहतर डाटा लिंकिंग टेक्नोलॉजी है, जिससे यह जेट हवा में मौजूद अन्य विमानों और जमीन पर मौजूद कमांड सेंटरों से आसानी से कनेक्ट हो सकता है। इसका मतलब है ज़्यादा फुर्तीला कम्युनिकेशन, तेज निर्णय और सटीक हमला।

इतना ही नहीं, इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका रखरखाव आसान और तेज हो, जिससे यह ज्यादा वक्त तक ऑपरेशन में रह सके।

क्यों जरूरी है ये MRFA डील?

वर्तमान में IAF के पास केवल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि आदर्श संख्या 42 स्क्वाड्रन मानी जाती है। ऐसे में वायुसेना की युद्धक क्षमता को बनाए रखने के लिए नए फाइटर जेट्स की तुरंत ज़रूरत है।

114 फाइटर जेट्स की इस डील के ज़रिए ना सिर्फ यह गैप भरा जाएगा, बल्कि भारत की एयर पावर को आधुनिकता की नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।

राफेल F4 को चुनने की एक बड़ी वजह यह भी है कि भारतीय पायलट और टेक्निकल स्टाफ पहले से राफेल के साथ काम कर चुके हैं। ऐसे में ट्रेनिंग का समय और खर्च दोनों कम होंगे।

मेक इन इंडिया को भी मिलेगा बूस्ट

इस डील की एक और बड़ी खासियत है मेक इन इंडिया। सूत्र बताते हैं कि इस सौदे में यह तय किया गया है कि अधिकतर विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इसका मतलब है कि न केवल वायुसेना को ताकत मिलेगी, बल्कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी।

फ्रांस से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) की उम्मीद की जा रही है, जो भारत के एयरोस्पेस सेक्टर को नई दिशा देगा। यह साझेदारी भारत और फ्रांस के बीच पहले से मौजूद मजबूत रिश्तों को और मज़बूती देगी।

कब तक हो सकता है सौदा?

अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक चला, तो 2026 तक इस डील पर दस्तखत हो सकते हैं। इसका सीधा मतलब है कि भारत ने अब साफ तौर पर तय कर लिया है कि वह अपनी वायुसेना की ताकत को एक नए मुकाम पर लेकर जाएगा और राफेल F4 इस सफर का सबसे अहम हिस्सा बनने जा रहा है।

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