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Jharkhand News: ना पैसा, ना प्रचार… बस जुनून! 32 सालों से 40,000 लड़कियों को दे रहे हैं मुफ्त कराटे ट्रेनिंग

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 08 Aug 2025, 12:00 AM | Updated: 08 Aug 2025, 12:00 AM

Jharkhand News: झारखंड के हजारीबाग जिले के एक ऐसे शिक्षक की कहानी जिसने बिना शोर मचाए हजारों जिंदगियों को एक नई दिशा दी है। हम बात कर रहे हैं उदय कुमार की, जो पिछले 32 सालों से कराटे की मुफ़्त ट्रेनिंग देकर बेटियों को न सिर्फ़ आत्मनिर्भर बना रहे हैं, बल्कि उन्हें ये यकीन भी दिला रहे हैं कि वे किसी से कम नहीं हैं। उदय कुमार का नाम आज हजारीबाग में ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में सम्मान से लिया जाता है। अब तक वे करीब 40,000 लड़कियों को कराटे में निपुण बना चुके हैं। इनमें से कई लड़कियां आज राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी हैं, और अपने साथ-साथ जिले का नाम भी रोशन कर रही हैं।

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बचपन से था कराटे का जुनून- Jharkhand News

लोकल मीडिया से बातचीत में उदय कुमार ने बताया कि उन्हें बचपन से ही कराटे का शौक था। वो सिर्फ़ शौक तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने देश और विदेश के कई अनुभवी गुरुओं से ट्रेनिंग ली। ये उनका जुनून ही था, जिसने उन्हें खुद तक सीमित नहीं रहने दिया बल्कि उन्होंने अपने ज्ञान को समाज के लिए समर्पित कर दिया।

लड़कियों के लिए कुछ करने का ख्याल

जब उदय खुद कराटे की ट्रेनिंग ले रहे थे, तभी उन्होंने महसूस किया कि लड़कियां समाज में कई तरह की चुनौतियों का सामना करती हैं, खासकर छेड़छाड़ और असुरक्षा का डर। उस वक़्त उन्होंने ठान लिया कि वो ऐसी लड़कियों को ट्रेन करेंगे, ताकि वे खुद अपनी रक्षा कर सकें और आत्मविश्वास के साथ अपनी ज़िंदगी जी सकें।

शुरुआत आसान नहीं थी

कहना आसान था, लेकिन करना मुश्किल। शुरुआत में उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गांव-गांव जाकर लोगों को समझाना, पैरेंट्स को मनाना कि वो अपनी बेटियों को कराटे सीखने भेजें, ये सब आसान नहीं था। कई बार उन्हें नकारात्मक बातें भी सुननी पड़ीं। लेकिन उदय ने हार नहीं मानी।

धीरे-धीरे लड़कियों की संख्या बढ़ने लगी, और जैसे-जैसे बेटियों ने कराटे में हुनर दिखाया, लोगों का नजरिया भी बदलने लगा। आज स्थिति ये है कि उदय कुमार की कई स्टूडेंट्स अब खुद ट्रेनर बन चुकी हैं और अपने-अपने इलाकों में लड़कियों को ट्रेनिंग दे रही हैं।

समर्पण ही है असली ताकत

उदय कुमार कहते हैं कि शहरों में तो खेल की तमाम सुविधाएं मिल जाती हैं, लेकिन गांव की लड़कियां अक्सर इनसे वंचित रह जाती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने गांव-गांव जाकर बेटियों को मजबूत बनाने का फैसला लिया था। और आज भी, बिना किसी सरकारी सपोर्ट या बड़े फंडिंग के, वो उसी समर्पण के साथ ये सेवा कर रहे हैं।

एक सादा इंसान, बड़ी प्रेरणा

उदय कुमार की कहानी बताती है कि अगर इरादा नेक हो और हौसला मजबूत, तो बदलाव लाना नामुमकिन नहीं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अकेला इंसान भी समाज की सोच और दिशा दोनों बदल सकता है, वो भी बिना किसी नाम या शोहरत के पीछे भागे।

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