Vaikuntha Ekadashi 2025: कब है बैकुंठ एकादशी? जानें तिरुमाला वैकुंठ एकादशी की विशेषताएँ

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Published: 25 Dec 2024, 12:00 AM | Updated: 25 Dec 2024, 12:00 AM

Vaikuntha Ekadashi 2025 Date: तिरुमाला वैकुंठ एकादशी एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है, जो तिरुमाला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में विशेष रूप से मनाया जाता है। यह मुख्यतः आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर से जुड़ा हुआ है। वैकुंठ एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इसे विशेष रूप से वैकुंठ द्वार के उद्घाटन के रूप में मनाया जाता है, जो भक्तों के लिए स्वर्ग के दरवाजे के रूप में माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं साल 2025 में तिरुमाला वैकुंठ एकादशी कब हैं. अगर नहीं तो चलिए आपको बताते हैं।

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बैकुंठ एकादशी शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 09 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं, समापन 10 जनवरी को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर होगा। सनातन धर्म में सूर्योदय के बाद से तिथि की गणना की जाती है। इसके लिए 10 जनवरी को बैकुंठ एकादशी मनाई जाएगी। हालांकि, बैकुंठ एकादशी व्रत रखने से पहले स्थानीय पंचांग का अवश्य विचार कर लें। साधक चाहे तो अपने कुल पंडित से भी सलाह ले सकते हैं। बैकुंठ एकादशी पर शुभ एवं शुक्ल योग का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी।

तिरुमाला वैकुंठ एकादशी की विशेषताएँ

  1. वैकुंठ द्वारम: इस दिन तिरुमाला मंदिर में वैकुंठ द्वारम या “स्वर्ग का द्वार” खोला जाता है। यह द्वार विशेष रूप से इस दिन के लिए खोला जाता है, जिससे भक्तों को यह आभास होता है कि वे भगवान के निकट पहुंचने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं।
  2. उत्सवों और पूजा का आयोजन: इस दिन भगवान वेंकटेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर में विशेष दरबार सजाया जाता है और भक्तों का उत्साह चरम पर होता है। भक्त दिनभर उपवासी रहकर भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं।
  3. भव्य दर्शन: तिरुमाला मंदिर में इस दिन विशेष रूप से भक्तों को भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन का विशेष अवसर मिलता है। लाखों श्रद्धालु इस दिन तिरुमाला पहुंचते हैं और दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े होते हैं।
  4. धार्मिक महत्व: यह दिन भक्तों के लिए मोक्ष की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीविष्णु की पूजा करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  5. व्रत और उपवासी: भक्त इस दिन विशेष व्रत रखते हैं और उपवासी रहते हुए भगवान के मंत्रों का जाप करते हैं। यह व्रत भगवान श्रीविष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

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तिरुमाला वैकुंठ एकादशी का महत्व

यह दिन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो भगवान वेंकटेश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करना चाहते हैं। यह दिन जीवन की हर बुरी शक्ति से मुक्ति पाने और आत्मिक शांति की प्राप्ति का दिन माना जाता है। वैकुंठ एकादशी के दिन भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने से हर भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

तिरुमाला वैकुंठ एकादशी भारतीय हिंदू संस्कृति और श्रद्धा का एक अत्यधिक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भक्तों को धार्मिक रूप से एक नई दिशा प्रदान करता है।

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