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पंजाब के इस सिख पहलवान ने धार्मिक चिह्न ने नहीं किया समझौता, ओलंपिक से हो गए बाहर

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 23 Feb 2024, 12:00 AM | Updated: 23 Feb 2024, 12:00 AM

हरियाणा और पंजाब ने देश को एक से एक कुश्ती के महारथी दिए हैं, जिन्होंने देश ही नही विदेशों में कुश्ती के दांव पेंच से कई देशों के पहलवानों को चारों खाने चित्त कर दिया. ऐसे ही एक पहलवान ने तुर्की में हो रहे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने से मना कर दिया क्योंकि कुश्ती के आयोजकों ने उन्हें सिख धर्म की शान पटका उतारने के लिए कहा था.

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यहां समझिए पूरा मामला

दरअसल, पंजाब के एक सिख पहलवान ने तुर्की में हुए रेसलिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से स्पष्ट इंकार कर दिया, क्योंकि यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के आयोजकों ने उन्हें मत्थे पर पहने पटका को उतारने के लिए विवश किया था. तुर्की से देश वापस लौटे पंजाब के तरनतारन निवासी जस्सा पट्टी नाम से पॉपुलर जशक्वर सिंह ने बताया कि वह उस टीम के सदस्य थे जो तुर्की में आयोजित इंटरनेशनल रेसलिंग टूर्नामेंट में भाग लेने गई थी. विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में अपने कैरियर के पहले ही इंटरनेशनल मुकाबले में यूक्रेन के रेसलर के खिलाफ सर ढकने वाले पटका को उतार कर लड़ने से मना कर दिया था. इसी वजह से उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था.

तुर्की में हुई थी ये घटना

जस्सा पट्टा ने अपने साथ हुई इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 28 जुलाई 2018 को यूक्रेन के पहलवान से मुकाबला करने के लिए जब मैं अखाड़े में उतरा तो टूर्नामेंट के आयोजकों ने कहा कि मैं पटका उतारने के बाद ही कुश्ती लड़ सकता हूं. इस बात पर मैने पट्टा उतारने से इंकार कर दिया और प्रतियोगिता से बाहर हो गया.

जस्सा ने कहा कि मैंने अपने सर को ढकने के लिए एक कपड़ा ही तो बांध रखा था, ना कि लोहा, प्लास्टिक या लकड़ी, जिससे मेरे विरोधी को नुकसान पहुंचता. मुझे पटके के साथ खेलने की इजाजत मिलनी चाहिए थी. अपने करियर के बारे में बात करते हुए जस्सा पट्टी बताते हैं कि पिछले वर्ष उन्होंने 80 कुश्ती की प्रतियोगिता में भाग लेकर 45 लाख रुपए कमाए लेकिन मैच के दौरान उन्होंने पटका नहीं उतारा न ही इवेंट ऑर्गनाइजर के निर्देश पर महिलाओं की तरह चोटी बांध कर खेले.

जस्सा बताते हैं कि देश के कई राज्यों से कुश्ती प्रतियोगिता में अचानक आमंत्रण मिलने में बढ़ावा हुआ है. अगर हम उनके दिनचर्या की बात करें तो जस्सा सुबह में प्रैक्टिस के लिए जिम जाते हैं. उसके बाद पहले से निर्धारित दंगल में भाग लेने के लिए अनेक गांवों में जाते हैं.

इन्हें पूजते हैं इनके फैंस

जस्सा पट्टी की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वह कुश्ती खत्म करते हैं तो, उनके जूनियर रेसलर उन्हें चारों ओर से घेर कर खड़े हो जाते हैं और कुछ तो कुएं के ठंडे पानी से स्नान कराते हैं. अन्य अपने गुरु के लिए बादाम शेक बनाकर लाते हैं. जस्सा बताते हैं कि नहाने के बाद वह पटका उतार पगड़ी बांध लेते हैं. उन्होंने कहा कि मैं अपने किसी भी प्रशंसक को नाराज नही करता और उन्हें वह सब करने देता हूं जो वह चाहते हैं. और उन्हें अक्सर पहलवानी के दांव पेंच सिखाता हूं. कुश्ती लड़ते समय पटका बांधने को लेकर जस्सा का कहना है कि मैं कुश्ती के समय पटका इसलिए बांधता हूं ताकि मेरे बाल आंखो के सामने न आए, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे किसी तरह का अंधविश्वास नहीं है.

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