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ब्रांड्स की नकल करने वालों हो जाओ सावधान, IPC की धारा 28 के तहत की जा सकती है कानूनी कार्रवाई

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 14 Apr 2024, 12:00 AM | Updated: 14 Apr 2024, 12:00 AM

आजकल ब्रांड पहनना किसे पसंद नहीं है, हर कोई लग्जरी ब्रांड के कपड़े पहनकर अपनी क्रश को इम्प्रेस करना चाहता है। लेकिन कुछ लोगों के लिए ब्रांड्स को अफोर्ड करना मुश्किल होता है, इसलिए ये लोग उन मशहूर ब्रांड्स की फर्स्ट कॉपी या उन ब्रांड्स से मिलते-जुलते नकली ब्रांड्स का विकल्प अपनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सब गैरकानूनी है। अगर कोई किसी मशहूर कंपनी या ब्रांड के लोगो के साथ छेड़छाड़ करके उनके जैसा मिलता-झूलता हुआ लोगो बनाकर फिर प्रॉडक्ट बेचता है तो यह अपराध है। भारतीय दंड संहिता(IPC) की धारा 28 में इस अपराध के बारे में विस्तार से बताया गया है।

और पढ़ें: IPC की धारा 9 क्या कहती है? जानिए कानून के तहत एकवचन और बहुवचन का मतलब

IPC की धारा 28

भारतीय दंड संहिता की धारा 28 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति एक चीज को दूसरी चीज के सदृश दिखना इस आशय से कारित करता है कि वह उस सादृश्य से छल / कपट करे, या यह संभाव्य जानते हुए करता है कि तद्द्वारा छल / कपट किया जाएगा, उसे कूटकरण करना कहा जाता है। हालांकि कूटकरण में यह आवश्यक नहीं है कि नकल ठीक वैसी ही हो।
जब कोई व्यक्ति एक वस्तु को दूसरी वस्तु से मिलता-जुलता बनाता है और समानता ऐसी हो कि कोई भी व्यक्ति धोखा खा जाए कि असली उत्पाद कौन सा है, तो इसे कूटकरण कहा जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो अगर कोई व्यक्ति किसी चीज की नकल करके उसके जैसी ही कोई दूसरी चीज बनाता है, जो देखने में मूल जैसी ही लगती है और ऐसा करने के पीछे उसका मकसद किसी को धोखा देना है और वह जानबूझकर ऐसा करता है, तो इसे कूटकरण कहा जाता है।

हालांकि कुछ मामलों में, प्रसिद्ध ब्रांड जानबूझकर नकली ब्रांडों की शिकायत नहीं करते हैं क्योंकि नकली ब्रांडों के माध्यम से उन्हें प्रचार भी मिलता है, जो भविष्य में उनके लिए लाभदायक हो सकता है। उदाहरण के लिए, आपने वॉटर ब्रांड बिसलेरी और कपड़ों के ब्रांड एडिडास के कई कॉपी ब्रांड बाजार में देखे होंगे। मशहूर ब्रांड चाहें तो इनकी शिकायत कर सकते हैं, लेकिन अपनी मार्किट स्ट्रेटेजी के कारण वे इन नकली ब्रांडों को बाजार में चलने देते हैं।

क्या है भारतीय दंड संहिता

भारतीय दंड संहिता भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किए गए विशिष्ट अपराधों को निर्दिष्ट और दंडित करती है। आपको बता दें कि यह बात भारतीय सेना पर लागू नहीं होती है। पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय दंड संहिता लागू नहीं होती थी। हालांकि, धारा 370 ख़त्म होने के बाद आईपीसी वहाँ भी लागू हो गया। पहले वहां रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) लागू होती थी।

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