Operation Blue Star: 31 अक्टूबर साल 1984…भारतीय राजनीति के इतिहास में उन काले दिनों में से एक है, जब देश ने एक पावरफुल नेता देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हमेशा के लिए खो दिया… एक के बाद एक ताबड़तोड़ 33 गोलियां चली थी उन पर… जिसमें से 30 गोलियां उनके शरीर को छलनी कर गई। दिल्ली के उनके निवास स्थान पर केवल खून और मातम पसरा था.. हत्या करने वाले थे दो सिख.. जो कि कभी उनके सबसे वफादार बॉडीगार्ड भी रह चुके थे.. इंदिरा गांधी की मौत से पहले ही उन्हें इंटेलिजेंस से ने कहा था कि वो सिख बॉडीगार्ड को सेवा से हटा दें, लेकिन इंदिरा गांधी ने अपने अंगरक्षकों पर भरोसा किया था.. और उसके बाद जो हुआ वो सभी जानते है।
सिखों के खिलाफ दंगे भड़कायें
इंदिरा गांधी की हत्या ने सिखों के खिलाफ न केवल दंगे भड़कायें, बल्कि पूरे भारत को सिखों के खिलाफ कर दिया..हजारों सिखों को अपना घर छोड़ना पड़ा, सैकड़ों लाशे बिछा दी गई..लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या सच में सिखों के साथ जो वो उसे डिसर्व करते थे। क्या सच में सिख एक भयावाह त्रासदी डिसर्व करते थे.. क्या वाकई में केवल ऑपरेशन ब्लू स्टार और जरनैल सिंह भिंडरावाला की मौत के कारण ही इंदिरा गांधी की हत्या की गई थी.. कई सवाल है..लेकिन उनके जवाब मिलने आसान नहीं..इस वीडियो में कुछ ऐसे पहलुओ को उठायेंगे, जो ये समझने में मदद करेगा कि वाकई में इंदिरा गांधी की हत्या एक अलगाववादी नेता की हत्या के बदले हुई थी या फिर उसके पीछे कुछ और भी कारण थे।
ऑपरेशन ब्लू स्टार की कहानी
इंदिरा गांधी की एक गलती के कारण न केवल सिख इतिहात को बल्कि उनकी भावनाओं को भी अहात पहुचाया गया, क्योंकि इंदिरा गांधी को ये दिखाना था कि उनके बढ़ कर कोई धर्म और तख्त नहीं है। सिखों के पांच पवित्र अकाल तख्त, जिसके हर एक सिख सिर तक कटाने के लिए तैयार है, इंदिरा गांधी ने उनकी भी परवाह नहीं की.. और सेना को न केवल अकाल तख्त के अंदर घुसने की इजाजत दी बल्कि वहां भारी मात्रा में खूनखराबा होने के साथ साथ पवित्र अकाल तख्त को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया। जी हां. 1 जून 1984 से लेकर 8 जून 1984… ये वो समय था जब पंजाब का एक अलगाववादी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थक सिख समुदाय के लिए अलग देश खालिस्तान की मांग कर रहे थे। जिसके तहत सरकार से अपनी मांगो को पूरा करने के लिए वो अमृतसर के हरमंदिर साहिब यानि की स्वर्ण मंदिर में जाकर छिप गए। इंदिरा किसी भी हाल में खालिस्तान के लिए राजी नहीं हुई और उन्होंने सेना को ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए इजाजत दे दी.. और नतीजा ये हुई कि करीब 3 दिनों तक सेना और भिंडरावाले के बीच मुठभेड़ हुई..6 जून 1984 को भिंडरावाले को मार गिराया गया…लेकिन इस हत्या से ज्यादा सिख समुदाय में रोष फैला जब उन्होंने अकाल तख्त की दुदर्शा देखी।
सेना की कार्यवाई से अकाल तख्त हुआ तबाह
दरअसल इंदिरा गांधी के ऑपरेशन ब्लू स्टार के कारण सेना की अंधाधुंद फायरिंग और टैंको की बमबारी के कारण अमृतसर अकाल तख्त पूरी तरह से तबाह हो गया था। नुकसान का विवरण देखा जाये तो गुरु नानक निवास, तेजा सिंह समुंदरी हॉल, और लंगर भवन के साथ साथ सिख रेफरेंस लाइब्रेरी जिसमें बहुमूल्य दस्तावेज़ों और सिख धर्म के जुड़ी पारंपरिक किताबें, पूरी तरह से जल कर तबाह हो गई। हथियारों के इस्तेमाल के काऱण अकाल तख्त की अंदरूनी दीवारे और उसके आसपास का कई हिस्सा पूरी तरह से टूट गया। इसी के साथ सिखों के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमली का पेड़ भी पूरी तरह से बर्बाद हो गया। हरमंदिर साहिब की दीवारों पर लाखों गोलियां के निशान बन गए, जिससे सिखों के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्वर्ण मंदिर की संरचना की बदल गई।
इंदिरा गांधी ने कोशिश की
कहते है कि इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद स्वर्ण मंदिर का दौरा किया था, और जब उन्होंने अकाल तख्त की दुर्दशा देखी तो वो बुरी तरह से घबरा गई थी। उन्होंने तय किया कि जितनी जल्दी हो सकें, उस तख्त को पुर्णनिर्माण कराया जाये, ताकि सिख अकाल तख्त की वो हालात न देख सकें…लेकिन अकाल तख्त को जो नुकसान हुआ.. उसने सिखों के गुस्से को और ज्यादा बढ़ा दिया। सिखों के पवित्र तख्त के साथ इस तरह की हरकत ने सिखों को ये विश्वास दिलाया कि उनकी धार्मिक भावनाओं की असल में इंदिरा गांधी को कोई कदर नहीं है। वहीं दूसरी तरफ भिंडरावाले को लेकर सिखों का मानना था कि वो कोई अलग देश नहीं चाहते थे, बल्कि वो रूढ़िवादी सिख धार्मिक संस्था दमदमी टकसाल के चौदहवें जत्थेदार थे, जो कि भारत के भीतर एक बड़े पैमाने पर स्वायत्त राज्य बनाना चाहते थे।
लोगो ने भिंडरेवाला का समर्थन किया
लोगो को ये विश्वास था कि भिंडरेवाला पंजाब की जनता के लिए सिंचाई के पानी में बड़ा हिस्सा पाने के लिए लड़ रहे है और चंडीगढ़ को पंजाब को वापस दिलाने के लिए लड़ रहे है, जिसके कारण हजारों लोगो ने भिंडरेवाला का समर्थन किया था। लेकिन समय के साथ स्वायत्त राज्य की अवधारना बदलने लगी और खालिस्तानी आंदोलन उग्र होने लगा जो पंजाब में दंगे करने और मासूम लोगो की हत्या का कारण बनने लगी। वहीं सोर्सेज की माने तो 1982 में सोवियत संघ ने नई दिल्ली में “एजेंट एस” नाम के एक रिक्रूट का इस्तेमाल किया, जो इंदिरा गांधी के करीब था। जिसके सहारे इंदिरा गांधी को सोवियत संघ ने उन्हें यकीन दिलाया कि अमेरिका खालिस्तान के लिए सिखों को गुपचुप तरीके से सपोर्ट कर रहा है, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका भी संदिग्ध है, जिसके कारण भिंडरेवाला के खिलाफ ऑपरेशन ब्लू स्टार को बहुत तेजी से लिया गया फैसला कहा गया।
300 आतंकी और 700 जवानों मारे गए
ऑपरेशन ब्लू स्टार के कारण भिंडरेवाला की हत्या से ज्यादा बड़ा कारण हो सकता है कि अकाल तख्त को नुकसान पहुंचाना, जिसे सिखों ने इंदिरा गांधी का बिना सोचे समझे उठाया गया कदम माना। आकड़ो की माने तो करीब 7 दिनो तक चले इस ऑपरेशन में सरकारी आकड़ो के अनुसार 84 सेना के जवानो समेत 516 लोग मारे गए थे, लेकिन बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 300 से ज्यादा जवानों के साथ साथ 200 आतंकी और बाकि के करीब 1500 आम नागरिक मारे गए थे। कम से कम 2000 लोग इस हमले में मारे गए थे। वहीं एक रिपोर्ट से भी बताती है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी ये माना था कि इस हमले में करीब 300 आतंकी और 700 जवानों मारे गए थे। हालांकि सटीक आकड़ें क्या हो सकते है इसके पुख्ता प्रमाण किसी के पास नहीं है, लेकिन कहीं न कहीं आज भी सरकारी दस्तावेजों में इसके पुख्ता प्रमाण जरूर दबें होंगे। अगर बीबीसी और पूर्व पीएम राजीव गांधी के आंकड़ो को माने तो स्वर्ण मंदिर के साथ साथ वहां के लोगो को भी भारी नुकसान हुआ था.. तो केवल ये कहना कि भिंडरावाले की मौत का बदला लेने के लिए इंदिरा गांधी की हत्या हुई होगी.. पूरी तरह से फैक्चुअल नहीं है। इसके और भी कई मुख्य कारण रहे..































