Sikhism in MP: मौजूदा समय में मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य बनता जा रहा है, जहां जातिगत भेदभाव तेजी से बढ़ रहा है, मगर इस भेदभाव के बीच बराबरी की लौ जलाए हुए है वहां रहने वाले सिख। मध्य प्रदेश में रहने वाले सिखो के लिए असल मायने में सबसे पवित्र धरती मानी जाती है, सिख धर्म में इक ओंकार को मानने की परंपरा का रिश्ता भी मध्य प्रदेश से ही जुड़ा है। सिख धर्म के शुरुआत से सिक्खी के इतिहास को खुद में समेटे हुए मध्य प्रदेश सिखो के लिए काफी खास है। खासकर सिकलीगर सिखो के कारण इस राज्य ने अपनी अलग पहचान हासिल की। अपने इस वीडियो में हम मध्य प्रदेश में फलने फूलने वाले सिखिज्म की कहानी जानेंगे, कैसे मध्य प्रदेश सिखो के लिए इतना खास और पूजनीय बन गया।
मध्य प्रदेश के बारे में जानकारी
मध्य प्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को किया गया था, जिसे भारत का दिल कहा जाता है, इसे “सेंट्रल प्रोविंस”,कहा जाता है। मध्य प्रदेश पवित्र नर्मदा नदी किनारे बसा हुआ है, मध्य प्रदेश के पश्चिम में गुजरात, उत्तर-पश्चिम में राजस्थान, उत्तर-पूर्व में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़ और दक्षिण में महाराष्ट्र है। मध्य का क्षेत्रफल 308,252 वर्ग किलोमीटर है तो वहीं 2011 के अनुसार मध्य प्रदेश की आबादी 72,597,565 के आसपास थी, जो कि भारत का पांचवा सबसे आबादी वाला राज्य है। मध्य प्रदेश अपने ही बहुत बड़े इतिहास को समेटे हुए है, जिसमें भीमबेटका की गुफायें, खजुराहो, महाकालेश्वर मंदिर, ओमकारेश्वर मंदिर, बौद्ध स्तूप जैसे अनगिनत ऐतिहासिक धरोहर मध्य प्रदेश की शान को बढ़ा रहे है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भेपाल है। 1 नवंबर 2000 को जब मध्यप्रदेश राज्य से 16 जिले अलग करके छत्तीसगढ़ का गठन हुआ तब तक क्षेत्रफल की दृष्टि से मध्य प्रदेश सबसे बड़ा राज्य था। लेकिन छत्तीसगढ़ बनने के बाद भी मध्य प्रदेश दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। प्रदेश हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है, हालांकि इतने ज्यादा प्राकृतिक संसाधन होते हुए मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर भी है, जिस कारण इस राज्य का विकास भी धीरे हो रहा है। मध्य प्रदेश एक हिंदू बहुल राज्य है लेकिन सिखों ने भी अल्पसंख्यक होते हुए भी अपनी छाप छोड़ी है।
मध्य प्रदेश में सिख धर्म आगमन
जब आप मध्य प्रदेश में सिख धर्म के फलने फूलने के बारे में बात करते है तो इसका रिश्ता सिखो के पहले गुरु गुरु नानक देव जी और दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है जब जब आदि गुरु नर्मदा नदी की यात्रा पर थे तब वो नर्मदा के किनारे बसे शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक मंदिर ओंकारेश्वर महादेव के मंदिर भी आए थे। वहीं दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी बुरहानपुर की यात्रा पर आए थे, जहां उन्होंने हस्तलिखित श्री गुरु ग्रंथ साहिब को स्थापित किया था। दशम गुरु की यात्रा के दौरान एक ऐसा समुदाय था जो शस्त्र बनाने में माहिर थे, उन्होंने गुरु साहिब की सेना के लिए दिन रात एक करके हथियार तैयार किए थे, गुरु साहिब ने उन समुदायों को अपना कर सिकलीगर सिखो की उपाधि दी थी।
गुरुद्वारा ओंकारेश्वर साहिब
आज भी मध्य प्रदेश के कई नगरों में सिकलीगर सिख काफी सक्रिय है, हालांकि इनकी आर्थिक स्थिति अन्य सिखो से कमजोर है, और हाशिए पर धकेल दिए है, लेकिन ये वो सिख है जो असल में मध्य प्रदेश के सिख कहलाते है। 2011 के मुताबिक मध्य प्रदेश में करीब 0.21% सिख रहा करते थे। जिसमें ज्यादातर पंजाब और मध्य प्रदेश के सिख है। प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी के इक ओंकार के जप को भी यही से जोड़ कर देखा जाता है। गुरुद्वारा ओंकारेश्वर साहिब प्रथम गुरु को ही समर्पित करते हुए बनाया गया है।
गुरु साहिब ने ग्वालियर के किले में 52 राजाओं को मुक्त कराया
इसके अलावा बुरहानपुर का गुरुद्वारा गुरुद्वारा श्री बड़ी संगत साहिब दशम गुरु के उस दौरे का प्रतीक है जब गुरु साहिब ने वहां जाकर हस्त लिखित श्री गुरु ग्रंथ साहिब स्थापित किया था। इसके अलावा मध्य प्रदेश में छठे गुरु हरगोबिंद साहिब के आगमन और उनकी बहादुरी के प्रतीक के रूप में खड़ा दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा भी मौजूद है, कहा जाता है कि गुरु साहिब ने ग्वालियर के किले में 52 राजाओं को मुक्त कराया था जो कि मुगलो की कैद में थे..इस कारण इसे दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा कहा जाता है।
गुरुद्वारा बेटमा साहिब
इंदौर में मौजूद है गुरुद्वारा इमली साहिब, जब प्रथम गुरु ने कान्हा नदी के किनारे आराम किया था। इसके अलावा गुरुद्वारा बेटमा साहिब, जैसे ऐतिहासिक गुरुद्वारे वहां सिक्खी की शान बढ़ा रहे है। मध्य प्रदेश में सिख संख्या में भले ही कम है लेकिन उनका अना एक महान इतिहास है, यहां रहने वले सिख न केवल सिख धर्म को फॉलो कर रहे है बल्कि दूसरों को भी सिख धर्म की विशेषता से रूबरू करा रहे है।
इसके अलवा आपको बता दें, मध्य प्रदेश में जातिगत भेदभाव की जड़ें काफी मजबूत है इसलिए कई ऐसे समुदाय भी जो सिख धर्म की समानता से प्रभावित हो कर सिख धर्म को अपना रहे है। 2011 कि जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में तब 1 लाख 51 हजार के आसपास सिख रहा करते थे, जिसमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, और ग्वालियर ऐसे क्षेत्र है जहां सिखो की आबादी ज्यादा है। ये ज्यादातर व्यापार और ट्रांसपोर्टेशन से ही जुड़े हुए है।






























