Shankarachrya Vs Yogi: प्रयागराज माघमेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा विवाद अब सिर्फ धार्मिक या सामाजिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसने साफ तौर पर राजनीतिक रंग भी ले लिया है। लगातार हो रही बयानबाजी के बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसा बयान दिया, जिसने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया। भले ही सीएम योगी ने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों और उदाहरणों ने मौजूदा विवाद की ओर साफ इशारा कर दिया।
सीएम योगी का तीखा संदेश (Shankarachrya Vs Yogi)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रचने वाले लोग हर दौर में मौजूद रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तमाम “कालनेमि” होते हैं, जो बाहर से धर्म और आस्था की बात करते हैं, लेकिन भीतर से उनका मकसद सनातन परंपरा को नुकसान पहुंचाना होता है।
सीएम योगी ने साफ कहा कि एक सच्चे योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी वेश या रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
बयान के मायने और मौजूदा विवाद
सीएम योगी के बयान में जब “धर्म”, “सनातन” और “परंपरा” जैसे शब्द एक साथ आए, तो इसे सीधे तौर पर प्रयागराज माघमेले से जुड़े हालिया विवाद से जोड़कर देखा जाने लगा। राजनीतिक गलियारों में भी इस बयान को एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले को सिर्फ एक व्यक्ति या घटना तक सीमित नहीं मानते, बल्कि इसे सनातन मूल्यों से जोड़कर देख रहे हैं।
कौन था कालनेमि?
सीएम योगी ने जिस ‘कालनेमि’ का जिक्र किया, वह कोई साधारण नाम नहीं है। रामायण और रामचरितमानस में कालनेमि को एक मायावी दैत्य के रूप में बताया गया है। रामकथा के अनुसार, कालनेमि रावण का मित्र था और उसे हनुमानजी को छलने का काम सौंपा गया था। कालनेमि ने साधु का वेश धारण किया था। बाहर से वह एक तपस्वी और धर्मात्मा दिखाई देता था, लेकिन उसका असली उद्देश्य श्रीराम के कार्य में बाधा डालना था।
रामायण का वह प्रसंग
रामायण के अनुसार, जब लक्ष्मण और मेघनाद के बीच युद्ध होता है और लक्ष्मणजी मूर्छित हो जाते हैं, तब वैद्य सुषेण बताते हैं कि द्रोणगिरी पर्वत पर संजीवनी बूटी है, जिसे सूर्यास्त से पहले लाना जरूरी है। हनुमानजी संजीवनी लेने निकलते हैं।
इसी दौरान रावण कालनेमि को आदेश देता है कि वह किसी भी तरह हनुमान को उनके मार्ग से भटका दे या रोक दे। तब कालनेमि तपस्वी का वेश धारण करता है, रास्ते में एक सुंदर आश्रम बनाता है, कुंड तैयार करता है और भजन करते हुए बैठ जाता है।
हनुमानजी को भ्रमित करने की कोशिश
हनुमानजी जब आकाश मार्ग से गुजरते हैं, तो नीचे बैठे कालनेमि को देखकर रुक जाते हैं। कालनेमि उन्हें स्नान, विश्राम और तपस्या का सुझाव देता है, ताकि समय निकल जाए और हनुमान संजीवनी समय पर न ला सकें।
हालांकि हनुमानजी उसके शब्दों और व्यवहार के बीच अंतर को महसूस कर लेते हैं। तालाब में स्नान के दौरान एक मगरमच्छ उनकी पूंछ पकड़ लेता है। हनुमानजी मगरमच्छ का वध करते हैं, जिसके बाद एक अप्सरा प्रकट होती है और कालनेमि की सच्चाई बता देती है। इसके बाद हनुमानजी कालनेमि का अंत कर देते हैं और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ जाते हैं।
कालनेमि: सिर्फ पात्र नहीं, एक प्रतीक
भारतीय परंपरा में कालनेमि को सिर्फ एक दैत्य के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि उसे छल, कपट और पाखंड का प्रतीक माना जाता है। वह उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जो धर्म का चोला ओढ़कर अधर्म करते हैं और समाज को भ्रमित करते हैं।
यही कारण है कि सीएम योगी का कालनेमि का जिक्र करना केवल एक धार्मिक उदाहरण नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश माना जा रहा है।





























