Rahul Gandhi in Lok sabha: लोकसभा में सोमवार का दिन पूरी तरह हंगामे और टकराव की भेंट चढ़ गया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जैसे ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए, सदन का माहौल गर्म हो गया। राहुल गांधी करीब 44 मिनट तक अपनी बात रखने की कोशिश करते रहे, लेकिन लगातार शोर-शराबे और आपत्तियों के चलते उनकी बात पूरी नहीं हो सकी। हालात इतने बिगड़े कि पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित करनी पड़ी और बाद में शाम को फिर से शुरू होने पर भी हंगामा थमा नहीं। आखिरकार चेयर की ओर से लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
भाषण की शुरुआत और पहला टकराव (Rahul Gandhi in Lok sabha)
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति को लेकर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर गलत तरीके से सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में राहुल गांधी ने डोकलाम विवाद का जिक्र किया और पूर्व आर्मी चीफ मनोज नरवणे को कोट करते हुए अपनी बात रखने लगे।
यहीं से विवाद शुरू हो गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत आपत्ति जताई और कहा कि जिस किताब का राहुल गांधी जिक्र कर रहे हैं, वह प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किताब आधिकारिक रूप से सामने ही नहीं आई, तो उसे सदन में कैसे कोट किया जा सकता है।
स्पीकर की हिदायत और बढ़ता हंगामा
स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी को सलाह दी कि सदन में केवल ऑथेंटिक और आधिकारिक दस्तावेजों का ही हवाला दिया जाए। राहुल गांधी ने जवाब में कहा कि किताब पूरी तरह ऑथेंटिक है और उन्होंने उसके कुछ अंश भी दिखाए। इसके बावजूद सत्ता पक्ष का हंगामा जारी रहा।
स्पीकर बार-बार राहुल गांधी से दस्तावेज की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने को कहते रहे। इस दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल खड़े हुए और राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह किताब सरकार की वजह से प्रकाशित नहीं होने दी जा रही है।
इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विवाद तो राहुल गांधी ने खुद ही खत्म कर दिया है, क्योंकि वह खुद मान रहे हैं कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है।
किताब और परंपरा को लेकर बहस
राजनाथ सिंह ने फिर कहा कि राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं। इसके बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में न तो अखबार की कटिंग पर और न ही गैर-प्रकाशित किताबों पर चर्चा करने की परंपरा रही है और सभी को इसका पालन करना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि वह यह मुद्दा उठाना नहीं चाहते थे, लेकिन कांग्रेस पर जब आरोप लगाए गए तो जवाब देना जरूरी हो गया। स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए उनसे आगे बढ़ने के लिए कहा। इसके बावजूद राहुल गांधी ने एक बार फिर मनोज नरवणे की किताब का जिक्र किया।
राजनाथ सिंह ने मांग की कि राहुल गांधी वह किताब सदन के सामने पेश करें ताकि सभी सदस्य उसे देख सकें। स्पीकर ने साफ किया कि सदन में बोलने का अधिकार जरूर है, लेकिन वह तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही होगा।
मैगजीन आर्टिकल और चीन का मुद्दा
इसके बाद राहुल गांधी ने एक मैगजीन आर्टिकल को कोट करने की बात कही। इस पर भी ट्रेजरी बेंच से जोरदार विरोध हुआ। रक्षा मंत्री ने कहा कि इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि चीन का मुद्दा संवेदनशील है, लेकिन अगर कोई बात देशहित में है, तो उसे सुनना चाहिए। उन्होंने डॉ. लोहिया से लेकर मुलायम सिंह यादव तक का जिक्र करते हुए कहा कि देश को चीन को लेकर हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार सुनने के लिए बैठी है, लेकिन रूलिंग के बाद भी वही बातें दोहराई जा रही हैं, ऐसे सदन कैसे चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता खुद सदन चलने नहीं देना चाहते।
नियमों पर बहस और तीखे आरोप
केसी वेणुगोपाल ने नियम 349 का हवाला देते हुए कहा कि तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस पर आरोप लगाए हैं, इसलिए जवाब देना जरूरी है। इस पर अमित शाह ने कहा कि तेजस्वी सूर्या ने अपने बयान में राष्ट्रपति के पुराने अभिभाषणों का हवाला दिया है और अगर जवाब देना है तो उसी आधार पर दिया जाए।
स्पीकर ने वेणुगोपाल को टोका और कहा कि विपक्ष के नेता बोलेंगे, बीच में दूसरे सदस्य खड़े न हों। उन्होंने साफ कहा कि लोकसभा किसी के वकीलों की तरह नहीं चलेगी।
“आप ही बता दीजिए मैं क्या बोलूं”
लगातार टोके जाने से नाराज राहुल गांधी ने कहा कि सरकार कहती है कि वह आतंकवाद से लड़ती है, लेकिन एक तथ्य से डरती है। उन्होंने कहा कि डोकलाम में क्या हुआ, यह बताने की जिम्मेदारी वह खुद लेते हैं। इस पर भी हंगामा नहीं थमा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर मनोज नरवणे को लगता था कि उनके साथ गलत हुआ है, तो वे अदालत क्यों नहीं गए। बार-बार रोके जाने पर राहुल गांधी ने कहा, “स्पीकर सर, आप ही बता दीजिए मैं क्या बोलूं।” स्पीकर ने जवाब दिया कि वह उनके सलाहकार नहीं हैं, लेकिन सदन की मर्यादा रखना जरूरी है।
कार्यवाही स्थगित, विपक्ष नाराज
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कभी किताब, कभी मैगजीन और अब चीन-भारत संबंधों पर बोलने से भी रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बात चीन या पाकिस्तान की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के बारे में है। जैसे ही उन्होंने प्रधानमंत्री का जिक्र करना शुरू किया, स्पीकर ने उन्हें रोकते हुए अगले वक्ता के तौर पर अखिलेश यादव का नाम ले लिया।
इसके बाद सदन में हंगामा और तेज हो गया, जिसके चलते पहले कार्यवाही कुछ समय के लिए और फिर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। सोमवार का दिन लोकसभा में बहस से ज्यादा टकराव और शोर-शराबे के नाम रहा, और धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा अधूरी ही रह गई।





























