Exclusive: पहलवानों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई पर कैसा रहा जनता का रिएक्शन?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 30 May 2023, 12:00 AM | Updated: 30 May 2023, 12:00 AM

बीते 28 मई यानि जिस दिन देश के प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया लेकिन उसी दिन उस नए भवन के बाहर भी कुछ ऐसा हुआ जिसे उस दिन पूरे देश ने देखा. हां वही जो प्रोटेस्ट कर रहे खिलाड़ियों के साथ हुआ. क्या अब भारत सरकार अपने एक नेता को बचने के चक्कर में गूंगी हो गयी है? या फिर दाल में ही कुछ काला है. क्योंकि इस पूरे प्रोटेस्ट को हम गौर से देखें तो हम कहीं न कहीं ये पाते हैं कि इस प्रोटेस्ट का ‘राजनीतीकरण’ हो गया है. लेकिन अगर मुद्दे पर आएं तो देखें कुछ भी कैसे भी लेकिन जिस तरह की तस्वीरें सामने आई है वो कहीं न कहीं विश्वपटल पर हमारी छवि ख़राब की है. जिसका असर हम आने वाले वक़्त में देख सकते हैं.

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जब ये सब कुछ हो रहा था तब हमारे रिपोर्टर भी वहां मौजूद थे और वो सारी चीज़ें कवर की जो मौका-ए-वारदात हुई. और वहां पर मौजूद कुछ प्रोटेस्टर से बात की और जानना चाहा की आखिर क्या हुआ क्यों और आखिर वो नए संसद के बाहर प्रदर्शन क्यों करना चाहते थे?

पूरी प्लानिंग के साथ की बैरीकेडिंग

वहां प्रदर्शन कर रही एक महिला से जब हमारे रिपोर्टर ने सवाल किया कि आखिर मामला क्या है क्या समस्या है तो उन्होंने जवाब दिया कि, इस महापंचायत के लिए महिला पहलवानों ने पहले से ही एलान किया था कि हम लोग 11 बजे यहाँ से निकलने वाले थे. और 11 बजे से पहले जो भी समर्थक पटेल चौक और जंतर मंतर पर मौजूद थे  और इकठ्ठा हो रहे थे. उनको इकठ्ठा भी नहीं होंबे दिया जा रहा है यहाँ पुलिस पर इतना जमावड़ा इकठ्ठा किया गया है इतनी बड़ी फ़ौज है जो बताता है कि आखिर सरकार कितनी ज्यादा डरी हुई है.

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यहाँ पर करीब 15 से 20 बसें कड़ी होंगी और पता नहीं इलाकों में कहां-कहां बैरीकेटिंग की हुई है पूरी प्लानिंग के साथ. तो यहाँ पर ये देखा जा सकता है कि जो महिलाएं अपने साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए यहां आ रही है उनके साथ किस तरह का व्यवहार मोदी सरकार कर रही है.

‘पुलिस की हिम्मत नहीं वो बृजभूषण पर हाथ लगा सकें’

प्रदर्शन में पुलिस द्वारा डीटेन किये जा रहे लोगों में एक उम्रदराज शख्स से जब हमारे रिपोर्टर ने बात कि तो उन्होंने बताया कि, आज ये आपके और हमारे सामने जो दिख रहा है कैसे पुलिस वालों ने जंतर मंतर को खाली करवा दिया है. दिल्ली पुलिस के धौंस तो सिर्फ आम जनवादी आंदोलनों पर तो चलती है लेकिन वो बृजभूषण जिसके ऊपर दसियों मुकदमें है जो महिलाओं के योन शोषण का आरोप है उसको वो हाथ भी नहीं लगा सकते.

जब की पूरे देश की जनता जानती है कि उनके ऊपर पोस्को एक्ट लग गया है. लेकिन जिस पोस्को केस में आरोपी को तुरंत उठा लिया जाता है आजतक वो खुलेआम घूम रहा है.

‘इनको पता नहीं इन्हें पैदा किसने किया’

पार्टी के नेता के रूप में दिख रहे एक व्यक्ति के वक्तव्य कुछ चौड़ वाले थे उनकी बातों में दम दिख रहा था. उन्होंने कहा कि, रोज पहले तो इन्होने पहलवानों को उठाकर देश की बेटियों के साथ तो अन्याय कर ही रहे हैं और अब बुजुर्गों के साथ भी अन्याय कर रहे हैं ये 80 साल के बुजुर्ग हैं. आज उनके साथ भी अन्याय हो रहा है पुलिस वाले इनको थप्पड़ मार रहे हैं. इनको मालूम नहीं की इन्हें किसने पैदा किया. ये बुजुर्गों का सम्मान करना भूल गए हैं बेटियों का सम्मान करना तक भूल गए हैं.

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