अब पाकिस्तान को हो रहा पछतावा? भारत के साथ शांति बहाल करने को हो रहा बेकरार, अब पाक सेना प्रमुख ने कही ये बड़ी बात!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 19 Mar 2021, 12:00 AM | Updated: 19 Mar 2021, 12:00 AM

भारत से पंगा लेना पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को भारी पड़
गया और इसका अब उसको एहसास भी होने लगा है। यही वजह है कि बार बार परमाणु हमले की
धमकी देने वाला पाकिस्तान अब अपनी शांति का राग अलापने लगा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बाद अब वहां के
सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने भी ये कहा है कि पाकिस्तान
, भारत के साथ सभी
बातों को भूलाकर शांति और बातचीत करने के लिए तैयार हैं। कश्मीर के मुद्दे को लेकर
बोलते हुए उन्होनें कहा कि दशिण एशिया गरीब होता जा रहा है। जो पैसा विकास के लिए
इस्तेमाल होना चाहिए उसे हथियारों पर खर्च करना पड़ रहा।

पुरानी बातें भूलकर आगे बढ़े

पाकिस्तान सेना प्रमुख ने ये बातें इस्लामाबाद में नेशल
सिक्यॉरिटी डायलॉग को संबोधित करते हुए कहीं। वो बोले कि कश्मीर जैसे मसलों का
समाधान निकलना चाहिए। वक्त आ गया है कि भारत और पाकिस्तान पुरानी बातों को भूलाकर
आगे बढ़ें। भारत और पाकिस्तान के रिश्ते स्थिर होते हैं
, तो इससे दक्षिण
और मध्य एशिया में संपर्क बढ़ने की काफी संभावनाएं है। लेकिन दो परमाणु संपन्न
देशों के बीच विवाद के चलते ये नहीं हो पा रहा।

कश्मीर को लेकर दिया बड़ा बयान

बाजवा बोले कि कश्मीर का मुद्दा केंद्र में है। ये समझना
जरूरी है कि कश्मीर का मसला बिना उपमहाद्वीपीय तालमेल की प्रक्रिया के पूरा नहीं
हो सकता। हम ये महसूस करते हैं कि इतिहास को भूलाकर अब आगे बढ़ने का समय हैं। साथ
में आगे उन्होनें ये भी कहा कि बातचीत पूरी तरह से भारत पर निर्भर करती है। इसके
लिए भारत को माहौल बनाना पड़ेगा। वहीं इससे पहले पाक के पीएम भी खुद ये बात बोल
चुके है कि रिश्तों को सामान्य करने के लिए भारत को कदम बढ़ाना होगा।

वहीं बातचीत को लेकर भारत अपनी नीति पहले ही स्पष्ट कर
चुका है। भारत ने साफ किया हुआ है कि पाकिस्तान को पहले आतंकवाद का रास्ता छोड़ना
होगा। बातचीत और आतंकवाद दोनों एक साथ नहीं हो सकते।

बाजवा ने गरीबी को लेकर भी बड़ी बात कहीं। उन्होनें कहा
कि दक्षिण एशिया के जो अनसुलझे मुद्दे है उसकी वजह से पूरे क्षेत्र को गरीबी में
धकेला जा रहा है। उन्होनें कहा कि ये जानकर दुख होता है कि दशिण एशिया व्यापार
, बुनियादी ढांचे, जल और ऊर्जा
सहयोग के मामले में दुनिया के सबसे कम एकीकृत क्षेत्रों में है। वो बोले कि गरीबी
होने के बाद भी हम काफी सारा पैसा रक्षा पर खर्च कर रहे
, जो मानव विकास
की कीमत पर आता है।
 

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