Narendra Modi Epstein Files: अमेरिका में कुख्यात यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी नई फ़ाइलें सार्वजनिक होने के बाद भारत की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम इन फ़ाइलों से जोड़ने के दावे पर अब भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि प्रधानमंत्री और जेफ़री एपस्टीन की मुलाक़ात से जुड़े आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और एक दोषी अपराधी की मनगढ़ंत बातों से ज्यादा कुछ नहीं।
विदेश मंत्रालय का स्पष्ट जवाब (Narendra Modi Epstein Files)
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी कर कहा कि उन्हें तथाकथित ‘एपस्टीन फ़ाइल्स’ से जुड़े एक ईमेल मैसेज की रिपोर्ट मिली है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी इसराइल यात्रा का ज़िक्र किया गया है। हालांकि मंत्रालय ने साफ किया कि जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इसराइल की आधिकारिक यात्रा के अलावा ईमेल में लिखी गई अन्य बातें पूरी तरह निरर्थक हैं।
रणधीर जायसवाल ने कहा, “ईमेल में जो भी अतिरिक्त बातें कही गई हैं, वे एक दोषी अपराधी की बेकार की बकवास से ज़्यादा कुछ नहीं हैं और इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया जाना चाहिए।” विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं पूरी तरह आधिकारिक, सार्वजनिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत होती हैं, जिन्हें किसी अपराधी के निजी ईमेल से जोड़ना गलत है।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
शनिवार को कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के ज़रिए दावा किया कि एपस्टीन से जुड़ी फ़ाइलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सामने आया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे को “राष्ट्रीय शर्म” बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को देश के सामने आकर जवाब देना चाहिए।
बेहद शर्मनाक!!
Epstein files में नरेंद्र मोदी का नाम आ गया है। अमेरिका के सीरियल रेपिस्ट, बाल यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफरी एपस्टीन ने 9 जुलाई 2017 को एक मेल में लिखा 👇
“The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US… pic.twitter.com/in73ajVjcR
— Congress (@INCIndia) January 31, 2026
कांग्रेस के मुताबिक, जेफ़री एपस्टीन ने 9 जुलाई 2017 को लिखे एक ईमेल में दावा किया था कि भारतीय प्रधानमंत्री ने उनसे सलाह ली थी और अमेरिकी राष्ट्रपति के फ़ायदे के लिए इसराइल में “नाचने और गाने” जैसा कुछ किया, जिससे काम बन गया। कांग्रेस ने इस ईमेल को प्रधानमंत्री की उस समय की विदेश यात्राओं से जोड़कर देखा।
तारीख़ों का हवाला देकर कड़ियां जोड़ने की कोशिश
कांग्रेस ने अपने दावे में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 4 से 6 जुलाई 2017 के बीच इसराइल के आधिकारिक दौरे पर थे और इस दौरे के तीन दिन बाद एपस्टीन ने वह ईमेल लिखा। पार्टी ने यह भी याद दिलाया कि इसराइल यात्रा से ठीक पहले 25-26 जून 2017 को प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे।
कांग्रेस का तर्क है कि अगर इन घटनाओं को जोड़कर देखा जाए, तो यह संकेत मिलता है कि जून 2017 की अमेरिका यात्रा के दौरान मोदी ने एपस्टीन से सलाह ली और उसके बाद इसराइल में उसी सलाह के मुताबिक कदम उठाए। कांग्रेस ने यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री और एपस्टीन के बीच “गहरा और पुराना रिश्ता” रहा है, जो भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए नुकसानदेह है।
तीन सवाल और तीखा हमला
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर तीन सवाल उठाए प्रधानमंत्री मोदी एपस्टीन से कैसी सलाह ले रहे थे, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के किस फायदे के लिए इसराइल में ऐसा किया गया और ईमेल में लिखे गए “इट वर्क्ड” का मतलब क्या है? पार्टी ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि देश सच्चाई जानना चाहता है।
अमेरिका में क्यों चर्चा में हैं एपस्टीन फ़ाइल्स
इस पूरे विवाद की जड़ अमेरिका में जारी हुईं एपस्टीन से जुड़ी नई फ़ाइलें हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को करीब 30 लाख पेज के दस्तावेज़, 1.80 लाख तस्वीरें और लगभग 2,000 वीडियो सार्वजनिक किए हैं। ये फ़ाइलें उस क़ानूनी समयसीमा के कई हफ्तों बाद जारी की गई हैं, जिसमें एपस्टीन से जुड़े सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक करने का प्रावधान था।
इन दस्तावेज़ों में एपस्टीन के जेल में बिताए समय, उनकी मानसिक स्थिति से जुड़ी एक साइकोलॉजिकल रिपोर्ट और जेल में हुई उनकी मौत से संबंधित जानकारी शामिल है। साथ ही, एपस्टीन और कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों के बीच हुए ईमेल भी इन फ़ाइलों का हिस्सा हैं।
ट्रंप और मस्क का भी ज़िक्र
नई जारी फ़ाइलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ज़िक्र सैकड़ों बार हुआ है। ट्रंप ने पहले माना है कि एपस्टीन से उनकी दोस्ती थी, लेकिन उनका कहना है कि यह रिश्ता सालों पहले खत्म हो चुका था और उन्हें एपस्टीन के अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी। दस्तावेज़ों में टेक अरबपति एलन मस्क के साथ एपस्टीन की ईमेल बातचीत भी शामिल है। हालांकि मस्क पर किसी तरह के गलत काम का आरोप नहीं है और वे पहले ही कह चुके हैं कि उन्होंने एपस्टीन के निजी आइलैंड पर जाने का न्योता ठुकरा दिया था।
क्या यहीं खत्म होगी कहानी?
डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच का कहना है कि यह दस्तावेज़ों की पहचान और समीक्षा की एक लंबी प्रक्रिया का अंत है और न्याय विभाग के स्तर पर काम पूरा हो चुका है। वहीं डेमोक्रेट्स का आरोप है कि बिना ठोस वजह के करीब 25 लाख दस्तावेज़ अब भी रोके गए हैं। ऐसे में साफ है कि एपस्टीन फ़ाइल्स को लेकर अमेरिका के साथ-साथ भारत में भी राजनीतिक बहस अभी थमने वाली नहीं है।





























