Magh Mela Controversy: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस पूरे मामले ने नया और गंभीर मोड़ तब ले लिया, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी जान को खतरा बताया है। शनिवार शाम को उनके शिविर के बाहर हुए हंगामे के बाद माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है।
आरोप है कि शनिवार शाम कुछ अराजक तत्व जबरन शिविर के बाहर पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि ये लोग “आई लव बुलडोजर बाबा” जैसे नारे लगा रहे थे। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सेवकों और वहां घुसे लोगों के बीच हाथापाई की स्थिति बन गई। हालांकि स्थिति को बाद में संभाल लिया गया, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ऐसे शरारती तत्व दोबारा शिविर में घुसने की कोशिश करते हैं, तो श्रद्धालुओं और शिविर की संपत्ति को गंभीर खतरा हो सकता है। उनके शिष्यों का कहना है कि बीते कुछ दिनों से संदिग्ध गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं।
सात दिनों से धरने पर बैठे हैं शंकराचार्य (Magh Mela Controversy)
दरअसल, बीते सात दिनों से प्रयागराज के माघ मेले में न तो संगम की चर्चा हो रही है और न ही स्नान पर्वों की। हर तरफ सिर्फ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनसे जुड़े विवाद की ही बात हो रही है। मौनी अमावस्या के दिन पालकी के साथ संगम स्नान के लिए जाने से रोके जाने के बाद से शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने फुटपाथ पर धरने पर बैठे हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अधिकारियों से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रशासन अपने फैसले पर कायम है। यही वजह है कि मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
सुरक्षा बढ़ी, शिविर के आसपास लगे CCTV
शंकराचार्य के शिष्यों ने उनके ऊपर खतरे की आशंका जताई है। इसके बाद मेला प्रशासन हरकत में आया और शिविर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। शिविर क्षेत्र में और आसपास करीब 10 सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला लिया गया है, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। साथ ही सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई है।
शिविर व्यवस्थापक पंकज पांडेय की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई है, जिसमें शिविर के बाहर हुए हंगामे को लेकर एफआईआर दर्ज करने और वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है। तहरीर में यह भी कहा गया है कि अगर भविष्य में कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की होगी।
विवाद की जड़: मौनी अमावस्या का दिन
पूरा विवाद माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था। उस दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। इस पर उनके शिष्यों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई।
घटना से नाराज होकर शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। इसके बाद प्रशासन की ओर से उन्हें 48 घंटे के भीतर दो नोटिस भेजे गए। पहले नोटिस में शंकराचार्य की पदवी के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद पर जवाब तलब किया गया। नोटिस में माघ मेले से प्रतिबंध तक की चेतावनी दी गई थी। बाद में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का जवाब प्रशासन को भेज दिया।
संत समाज भी बंटा, बयानबाज़ी तेज
इस पूरे घटनाक्रम पर संत समाज की भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। पुरी गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि साधु-संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर खींचना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि चाहे शंकराचार्य हों या कोई और, सभी के साथ मर्यादा का पालन होना चाहिए।
वहीं, बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मामले पर संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरे मामले की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि सनातन धर्म का मज़ाक नहीं बनना चाहिए। उनके अनुसार, दोनों पक्ष सनातनी हैं और बातचीत के जरिए समाधान निकालना बेहतर होगा।
राजनीति की एंट्री, बयानबाज़ी तेज
अब यह विवाद सिर्फ संतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुलकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “कालनेमि को याद करने वाले बताएं कि कलयुग के कालनेमि कौन हैं। कालनेमि ही इनका काल बनकर आएगा।”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का शंकराचार्य से लगातार संपर्क बना हुआ है और सरकार को इस पूरे मामले में संयम और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
दूसरी ओर, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से खुश नहीं हैं, वे सनातन विरोधी हैं। परमहंस आचार्य ने यहां तक कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद राजनीति से प्रभावित हैं और उन्हें शंकराचार्य नहीं कहा जाना चाहिए।
मायावती ने जताई चिंता
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी धार्मिक आयोजनों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। इससे नए-नए विवाद और सामाजिक तनाव पैदा हो रहे हैं, जो किसी भी तरह से ठीक नहीं है।































