जब एकदम युद्ध की कगार पर पहुंच गए भारत-चीन…इस एक फैसले की वजह से पलट गई पूरी बाजी, जानिए…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 18 Feb 2021, 12:00 AM | Updated: 18 Feb 2021, 12:00 AM

भारत और चीन के बीच रिश्ते साल 2020 में काफी बिगड़ गए थे। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भारत और चीन के बीच लगातार तनातनी का माहौल बना हुआ था। हालात इतने बिगड़ गए थे कि युद्ध जैसी स्थिति बनती हुई नजर आ रही थी। करीबन 8 से 9 महीनों के बाद अब भारत-चीन के बीच जारी ये विवाद कम होता हुआ नजर आ रहा है। 

दरअसल, पैंगोंग झील को लेकर भारत और चीन के बीच समझौता हुआ, जिसके बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में बताया था। इसके बाद से ही दोनों देशों की सेनाएं ने डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल ये बना हुआ है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि चीन यूं अचानक ही इस समझौते के लिए तैयार हो गया? 

जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी…

दरअसल, सरकार द्वारा सेना को फ्री हैंड दिए जाने के बाद LAC पर ये पूरी बाजी पलटी। इसके बारे में सेना के नॉर्दर्न कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने एक इंटरव्यू में बताया। सीएनएन न्यूज 18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होनें बताया कि चीन भारतीय क्षेत्र में फिंगर 4 तक आ गया था। गलवान में भारत चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी हो गई थीं। वहीं बातचीत की टेबल पर भी कोई बात बनती नजर नहीं आ रही थीं। जब बातचीत में भी कोई हल मिलता नहीं दिख रहा था, तो चीन पर दबाव बनाने के लिए ऊपर से खास निर्देश मिला। 

जोशी ने बताया कि हमें ऊपर से खुली छूट मिल चुकी थी कि जो ऑपरेशन चलाना है.. चलाइए। इसके बाद 29-30 अगस्त की दरमियानी रात को पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर रेजांग ला और रेचिन ला पर भारतीय सैनिकों ने कब्जा कर लिया और भारतीय फौज दबदबे के पोजिशन पर आ गई। इसके बाद जब अगले दौर की बातचीत हुई तो भारत का पलड़ा भारी था। हालांकि, इस दौरान ऐसा वक्त भी आया जब लगा कि अब दोनों देशों में युद्ध हो सकता है।

30 अगस्त को पलटी बाजी

चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने आगे बताया ऊपर से हमें खुली छूट मिली थीं, जो ऑपरेशन चलाना चाहते हैं, चलाएं…जिसके बाद 29-30 अगस्त की दरमियानी रात पौंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर रेजांग ला और रेचिन ला पर भारतीय सेना ने अपना कब्जा जमा लिया। जिससे फिर भारतीय सेना वहां दबदबे की पोजिशन में आ गई। जिसके बाद अगले दौर की बातचीत में भारत का पलड़ा भारी रहा। 

उन्होनें इस दौरान ये भी बताया कि एक समय ऐसा भी आ गया था जब दोनों देश एकदम युद्ध की कगार पर आकर खड़े हो गए थे। वाईके जोशी ने बताया जब 30 अगस्त को भारतीय सेना ने रेजांग ला और रेचिन ला पर कब्जा जमा लिया तो चीनी सैनिक कैलाश रेंज में आमने-सामने आना चाहती थी। इस दौरान हम एकदम युद्ध पर आ पहुंचे थे। ये समय  काफी चुनौतीपूर्ण था।

वाईके जोशी ने कहा कि इतनी जल्दी चीन समझौता कर लेगा और अपने कदम वापस लेने को तैयार हो जाएगा, इसकी उम्मीद काफी कम थी। लेकिन भारतीय सेना ने 29-30 अगस्त की रात को जो किया, वो LAC पर चल रहे इस विवाद का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। 

क्या भारत ने अपनी जमीन छोड़ दी?

इस सवाल के जवाब में उन्होनें कहा कि इसमें सच्चाई नहीं है। एक समझौते के मुताबिक ही दोनों देश सहमत हुए और अब पीछे हट रहे हैं। भारत फिंगर 4 से पीछे जाएगा और चीन फिंगर 8 से। पैंगोंग झील पर अप्रैल 2020 से पहले जो स्थिति थी वो दोबारा लागू होगी।भारतीय सेना ने नॉर्थ बैंक में कोई जमीन नहीं छोड़ी है।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच इस विवाद की शुरुआत बीते साल अप्रैल-मई के महीने में हुई थीं। यहां हालात लगातार बिगड़ते चले गए। जून में तो ये विवाद यहां तक पहुंच गया कि दोनों देश के सैनिक आपस में भिड़ गए। इस दौरान भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए। वहीं चीन को भी काफी नुकसान पहुंचा। बीते 9 महीनों से जारी ये विवाद अब धीरे-धीरे खत्म हुआ नजर आ रहा है। 

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