जानें कौन थे लेफ्टिनेंट उमर फैयाज, जिनकी शहादत का बदला सेना ने एक साल के अंदर ही ले लिया, 22 साल की उम्र में हुए थे शहीद

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 10 Nov 2024, 12:00 AM | Updated: 10 Nov 2024, 12:00 AM

Martyr Lieutenant Umar Fayaz: ‘वो मेरा इकलौता बेटा था, कुछ ही हफ्तों में 23 साल का होने वाला था…’ ये शब्द हैं भारतीय सेना के शहीद लेफ्टिनेंट उमर फैयाज (Martyr Lieutenant Umar Fayaz) की मां के, जिन्होंने अपने 22 साल के बेटे को खो दिया था। फैयाज जम्मू के अखनूर में सेना की राजपुताना राइफल्स में तैनात थे। वो 129वें बैच के कैडेट थे। 10 दिसंबर 2016 को वो एनडीए से सेना में भर्ती हुए थे। फैयाज अपने रिश्तेदार की शादी के लिए छुट्टी लेकर गए थे। उन्हें 25 मई 2017 को अखनूर इलाके में अपनी यूनिट में लौटना था, लेकिन ये शादी उनकी जिंदगी की आखिरी शादी बन गई। मगर आतंकियों ने अधिकारी को अगवा कर उनकी हत्या कर दी। आइए आपको शहीद लेफ्टिनेंट उमर फैयाज के बारे में विस्तार से बताते हैं।

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उनकी शिक्षा आर्मी गुडविल स्कूल में हुई- Martyr Lieutenant Umar Fayaz Education

लेफ्टिनेंट उमर फैयाज (Martyr Lieutenant Umar Fayaz) आर्मी गुडविल स्कूल से ग्रेजुएट थे। वे कुलगाम के रहने वाले थे। 2012 में उनका चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी यानी एनडीए के लिए हुआ था। नवंबर 2015 में वे एनडीए से पास आउट हुए और फिर एक साल के लिए इंडियन मिलिट्री एकेडमी चले गए।

Martyr Lieutenant Umar Fayaz
Source: Google

घर वालों ने नहीं बताया था कि बेटा सेना में है

स्थानीय लोगों को फैयाज के परिवार ने यह नहीं बताया कि उनका बेटा भारतीय सेना में भर्ती होने वाला है, बल्कि उन्होंने बताया कि उमर अब एमबीबीएस करने के लिए मुंबई जाएगा। हर बार वह गांव वालों को बताते थे कि उनका बेटा मुंबई में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। परिजनों को डर था कि अगर स्थानीय लोगों को सच्चाई पता चल गई तो आतंकवादी उन्हें मार देंगे। हालांकि लंबे समय से कुछ गांव वाले लेफ्टिनेंट फैयाज पर कड़ी नजर रख रहे थे।

पहली बार छुट्टी पर आए थे फैयाज Martyr Umar Fayaz story of martyrdom

लेफ्टिनेंट फैयाज दिसंबर 2016 में सेना में शामिल हुए थे।  उन्हें 2 राजपुताना राइफल्स में कमीशन मिला था। कमीशंड होने के बाद वह पहली बार छुट्टी पर घर आए थे। वे शोपियां में अपनी मौसी के घर अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए आए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब लेफ्टिनेंट फैयाज अपनी बहन के साथ बैठे थे, तभी कुछ हथियारबंद लोग घर में घुस आए और उन्हें अपने साथ ले गए। इसके बाद दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में उमर फैयाज का गोलियों से छलनी शव बरामद हुआ।

Martyr Lieutenant Umar Fayaz
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इस घटना को लेकर सेना के एक अधिकारी ने बताया था कि आतंकियों ने फैयाज को अगवा किया था। जम्मू कश्मीर पुलिस को संदेह है कि लेफ्टिनेंट फैयाज (Martyr Lieutenant Umar Fayaz) की हत्या में उसी इंसास राइफल का इस्तेमाल किया गया था, जिसे आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर पुलिस के दो कांस्टेबलों से छीना था।

शरीर पर 11 जगहों पर चोट के निशान थे

रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि लेफ्टिनेंट फैयाज के शरीर पर चोट के 11 निशान थे। उनकी पीठ पर कई निशान थे, उनका जबड़ा टूटा हुआ था, उनकी एड़ी भी टूटी हुई थी और उनका एक दांत भी गायब था। इसके अलावा उनके शरीर पर कई जगह कट के निशान थे। आतंकियों ने उन्हें मारने से पहले बुरी तरह प्रताड़ित किया था। वे अखनूर में तैनात थे और उन्हें 12 मई को वापस रिपोर्ट करना था।

एक साल बाद लिया गया शहादत का बदला

इस पूरी घटना को लेकर हिजबुल मुजाहिद्दीन (Hizbul Mujahideen) ने कहा था कि उसके आतंकियों ने लेफ्टिनेंट फैयाज की हत्या नहीं की है। हालांकि, आतंकियों ने लेफ्टिनेंट फैयाज को न सिर्फ अगवा किया बल्कि उनकी बुरी तरह से पिटाई भी की और फिर शोपियां के एक बस स्टैंड पर भीड़ के सामने उन्हें गोली मार दी। इस घटना के एक साल के अंदर ही 1 अप्रैल 2018 को भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की शहादत का बदला ले लिया है।

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