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Independence Day 2025: 15 अगस्त के खास मौके पर लाल किले में होंगे बंधुआ मजदूरी से आज़ाद 178 मेहमान, बागपत के 13 श्रमिक भी शामिल

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 14 Aug 2025, 12:00 AM | Updated: 14 Aug 2025, 12:00 AM

Independence Day 2025: स्वतंत्रता दिवस 2025 इस बार कई लोगों के लिए सिर्फ एक जश्न नहीं, बल्कि जिंदगी में नई उम्मीद, नया सम्मान और आज़ादी का असली मतलब लेकर आ रहा है। उन लोगों के लिए, जिन्होंने जिंदगी का एक लंबा हिस्सा बेड़ियों में बिताया और अब खुद को आज़ाद पाकर देश के सबसे बड़े मंच पर बतौर ‘विशेष अतिथि’ खड़े होंगे। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए 178 लोग 15 अगस्त को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय समारोह में बतौर विशेष अतिथि शामिल होंगे। बागपत जिले से भी 13 श्रमिक इस ऐतिहासिक मौके का हिस्सा बनेंगे, जिन्हें कभी शायद यह सपने में भी नहीं लगा होगा कि वे कभी लाल किले पर होने वाले आज़ादी के जश्न में प्रधानमंत्री के भाषण को सामने से सुन पाएंगे।

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बागपत से रवाना हुए 13 श्रमिक- Independence Day 2025

बुधवार को बागपत के सांसद डॉ. राजकुमार सागवान और जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने इन श्रमिकों को कलेक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखाकर दिल्ली रवाना किया। जिलाधिकारी ने बताया कि इन श्रमिकों को अलग-अलग स्थानों से बंधुआ मजदूरी से आज़ाद कराकर पुनर्वास किया गया है। अब ये लोग अपने जीवन की एक नई शुरुआत कर रहे हैं और सरकार की योजनाओं के जरिए आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहे हैं।

आर्थिक सहायता और पुनर्वास

सरकार की बंधुआ श्रम पुनर्वासन योजना के तहत इन श्रमिकों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है। योजना के तहत पुरुष श्रमिकों को एक लाख रुपये और महिला श्रमिकों को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है, ताकि वे अपने कौशल के अनुसार रोजगार शुरू कर सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

दिल्ली में चार दिन का विशेष कार्यक्रम

इन श्रमिकों को 15 अगस्त के मुख्य कार्यक्रम के अलावा 16 अगस्त तक दिल्ली में रुकने का मौका मिलेगा। इस दौरान उन्हें दिल्ली भ्रमण, सांस्कृतिक आयोजन, और अन्य प्रेरणादायक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाएगा। यह चार दिन उनके लिए सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से भर देने वाला अनुभव भी होगा।

एक असली आज़ादी की कहानी

बंधुआ मजदूरी से निकले इन 178 लोगों की कहानी आज़ादी की असल परिभाषा को सामने लाती है। ये वे लोग हैं जिन्होंने दशकों तक दमन और शोषण झेला, लेकिन अब वे खुद को एक नई पहचान के साथ देख रहे हैं। और जब 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे, तो इन लोगों के चेहरे पर भी वह गर्व होगा, जो शायद अब तक उन्होंने कभी महसूस नहीं किया था।

5,000 से अधिक विशेष अतिथि होंगे शामिल

वहीं, सरकार ने इस बार लाल किले पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए देशभर से करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया है। इनमें कई अलग-अलग क्षेत्रों के लोग शामिल हैं — जैसे स्पेशल ओलंपिक 2025 के खिलाड़ी, स्वच्छता अभियान के बेहतर कार्यकर्ता, किसान, युवा लेखक, स्टार्टअप उद्यमी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, और पुनर्वासित महिलाएं और बच्चे।

इस बार का स्वतंत्रता दिवस सिर्फ परेड और भाषण का नहीं, बल्कि असल मायनों में ‘जन-जन की आज़ादी’ का उत्सव बन रहा है।

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