GST Officer Prashant Singh: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रशांत का इस्तीफा उस समय सुर्खियों में आया था जब उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी पर गहरा आहत होने का हवाला दिया था। इस्तीफे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें प्रशांत भावुक होकर रोते नज़र आए।
लेकिन प्रशांत सिंह की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने अब उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए दस्तावेजों के साथ मोर्चा खोल दिया है। विश्वजीत का कहना है कि प्रशांत ने 2009 में मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को धोखा देकर 40% दिव्यांगता का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया और 2011 में इसी के आधार पर पीसीएस कोटा हासिल किया। इसी तरह उनकी बहन जया सिंह पर भी समान आरोप हैं। 2013 में उन्होंने भी उसी डॉक्टर और सीएमओ के हस्ताक्षर से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर तहसीलदार की कुर्सी पाई।
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विश्वजीत सिंह ने यूपी तक से बातचीत में कहा कि “जांच के घेरा सख्त होने के बाद प्रशांत सिंह इस्तीफे का इमोशनल कार्ड खेलकर जांच और भविष्य की रिकवरी से बचना चाहते हैं। उन्होंने असली विकलांग व्यक्ति का हक मारा है। मीडिया और मुख्यमंत्री से निवेदन है कि जांच पूरी कराई जाए और उन्हें इस्तीफा लेकर भागने का मौका न दिया जाए।”
“फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी पाएँ है…रिकवरी और जांच के डर से ये सारा ड्रामा किया है प्रशांत सिंह ने…
डिप्टी कमिश्नर GST के सगे बड़े भाई विश्वजीत सिंह को सुनिए…
इस घड़ियाली आँसू बहाने वाले प्रशांत सिंह की कैसे पोल खोली हैं उन्होंने… pic.twitter.com/P8E4NN6IRS
— Mamta Tripathi (@MamtaTripathi80) January 27, 2026
जांच से लगातार भागने का आरोप (GST Officer Prashant Singh)
विश्वजीत सिंह ने बताया कि 16 अगस्त 2021 को उन्होंने मऊ CMO के पास शिकायत दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए। इसके बाद प्रशांत और उनकी बहन को मेडिकल बोर्ड में पेश होने के लिए कई बार बुलाया गया। वहीं, 28 सितंबर और 7 अक्टूबर 2021 को बोर्ड बैठा, लेकिन प्रशांत हाजिर नहीं हुए। इतना ही नही, जया सिंह को तीन बार बुलाया गया, लेकिन वे भी जांच से बचती रही।
विश्वजीत ने स्वास्थ्य महानिदेशालय (DG Health) पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि 19 दिसंबर 2025 को मऊ CMO ने डीजी हेल्थ को अर्जेंट कार्रवाई के निर्देश भेजे थे, लेकिन महानिदेशालय ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल रखा। उनका आरोप है कि प्रशांत सिंह जांच को मैनेज करते रहे और अब मामला हाथ से निकलते देख इस्तीफे का नाटक कर रहे हैं।
मामला दस्तावेजों में
विश्वजीत का दावा है कि प्रशांत और जया दोनों के फर्जी प्रमाण पत्र एक ही दिन, एक ही डॉक्टर और एक ही CMO की मुहर से बने हैं। इसका मतलब है कि दोनों की संलिप्तता स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि उन्हें धमकियां भी मिली हैं।
प्रशांत सिंह के खिलाफ चल रही विभागीय जांच अब अंतिम चरण में है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और आरोप सही पाए जाने पर कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई संभव है।
इस्तीफे का राजनीतिक और भावुक पहलू
प्रशांत का इस्तीफा केवल फर्जी प्रमाण पत्र से जुड़ा विवाद नहीं है। इससे पहले उन्होंने योगी सरकार के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के चलते भावुक होकर इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई अपमान वह स्वीकार नहीं कर सकते और संवैधानिक पद पर आसीन होने के नाते उनका कर्तव्य था कि वह सम्मान की रक्षा करें।
इस्तीफे के बाद प्रशांत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और प्रशासनिक तथा राजनीतिक गलियारों में इस कदम पर बहस शुरू हो गई।
विवाद का असर और भविष्य
खबरों की मानें तो, प्रशांत की बहन जया सिंह वर्तमान में कुशीनगर के हाटा तहसीलदार हैं। उन पर भी फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप हैं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। प्रशासनिक गलियारों में माना जा रहा है कि यदि आरोप सही पाए गए तो प्रशांत और जया दोनों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले ने न केवल GST विभाग में हलचल मचाई है, बल्कि प्रशासनिक विश्वास और सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा किया है।
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