सांवली होने की वजह से बिपाशा बसु को बचपन से ही सुनने पड़े ताने, एक्ट्रेस ने बताई आपबीती

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 26 Jul 2020, 12:00 AM | Updated: 26 Jul 2020, 12:00 AM

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हुई मौत के बाद पूरी दुनिया में ‘ब्लैक लाइफ मैटर’ को लेकर खूब चर्चा हो रही है. कई बड़े-बड़े हस्तियां इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने लगी. वहीं इसी बीच हिंदुस्तान यूनिलिवर कम्पनी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपनी फेमस ‘फेयर एंड लवली’ क्रीम से ‘फेयर’ शब्द हटाने का फैसला लिया. कम्पनी के इस कदम को लोगों ने खूब सराहा.

वहीं अब कई जानी-मानी हस्तियां भी कम्पनी का फैसला का समर्थन करते हुए अपनी आपबीती बताती हुई नजर आ रही है. बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस बिपाशा बसु ने हिंदुस्तान यूनिलियर के लिए गए इस फैसले के बाद एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया और बताया कि कैसे उन्हें बचपन से लेकर अब तक अपने रंग की वजह से क्या-क्या सुनना पड़ा.

बिपाशा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट करते हुए लिखा- ‘जब मैं बड़ी हो रही थी तो मुझे अक्सर ये सुनने को मिलता था कि बोनी सोनी से ज्यादा डार्क है. वो थोड़ी सांवली है. मेरी मां भी डस्की ब्यूटी थीं और मैं काफी हद तक उनके जैसी ही दिखतीं थी. लेकिन जब मैं बच्ची थीं तो इस बात को समझ नहीं पाई कि मेरे दूर के रिश्तेदार मेरे रंग को लेकर चर्चाएं क्यों करते थे.’

बिपाशा ने आगे लिखा- ‘जब मैं 15-16 साल की थी, तो मैनें मॉडलिंग शुरू कर दी और फिर मैनें सुपर मॉडल प्रतियोगिता जीती. इस दौरान मैनें सभी न्यूजपेपर में यही पढ़ा कि कोलकाता की ‘सांवली लड़की’ विजेता बनी. मुझे फिर से आश्चर्य हुआ कि डस्की मेरा पहला विशेषण क्यों है? फिर मैं अपने काम के लिए न्यूयॉर्क और पेरिस गई. यहां मुझे एहसास हुआ कि मेरी त्वचा का रंग वहां पर विदेशी था और मुझे इसकी वजह से ज्यादा काम और ध्यान मिला. ये मेरी एक और खोज थीं.’

एक्ट्रेस ने आगे लिखा- ‘जब मैं भारत वापस आई और मुझे फिल्मों के ऑफर मिलने लगे. मैनें अपनी पहली फिल्म में काम किया और तब मैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से पूरी तरह अजनबी थी. मुझे अचानक स्वीकार किया गया और प्यार मिला.  लेकिन वो विशेषण (रंग) मेरे साथ बना रहा, जिसे मैं तब पंसद और प्यार करने लगी थी. डस्की लड़की ने अपनी पहली ही फिल्म में दर्शकों को आकर्षित किया.’

बिपाशा ने कहा- ‘मेरे कामों के लिए लिखे गए अधिकतर आर्टिकल्स में मेरा सांवलापन ही मुख्य चर्चा होता था. इस मेरी सेक्स अपील से भी जोड़ दिया गया और बॉलीवुड में बड़े पैमान पर स्वीकार किया जाने लगा. मुझे कभी ये समझ नहीं आया. मेरे लिए सेक्सी एक पर्सानिलटी है, ना कि त्वचा का रंग. क्यों मेरी त्वचा के रंग की वजह से मुझे उस समय की एक्ट्रेस से अलग रखा गया? लेकिन ये ऐसा ही था. मुझे सच में ज्यादा अंतर नहीं दिखा, लेकिन लोगों ने देखा.’

बिपाशा बोलीं- ‘यहां खूबसूरती को लेकर लोगों की मानसिकता है कि एक एक्ट्रेस को कैसा दिखना और व्यवहार करना चाहिए. ऐसा दिखाया गया मैं अलग थी. हालांकि मुझे वो सब काम करने से नहीं रोक पाया जो मैं करना चाहती थीं. मुझे बचपन से ही अपने ऊपर विश्वास और गर्व था. मेरी त्वचा का रंग मुझे परिभाषित नहीं करता. मैं इसे प्यार करती हूं और इसे कभी बदलना नहीं चाहती.’

एक्ट्रेस ने कहा- ‘पिछले 18 सालों में कई कम्पनियों ने स्किन केयर एंडोर्समेंट का बहुत पैसों के साथ ऑफर किया (कुछ बहुत लुभावने थे), लेकिन मैं हमेशा अपने सिद्धांतों पर डटी रहीं. इसे रोकने की जरूरत है. ये गलत सपना जो हम बेच रहे हैं कि फेयर ही लवली है और खूबसरत, जबकि देश के अधिकतर लोग सांवले है. ये जड़ों में काफी अंदर तक है. ये एक ब्रांड का बड़ा कदम है और दूसरे ब्राडों को भी जल्द ही ऐसा ही करना चाहिए.’

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