ऑक्सीजन की जरूरत होगी कम…कोरोना मरीजों के लिए 'वरदान' साबित होगी DRDO की दवा! जानिए कैसे करेगी ये काम?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 09 May 2021, 12:00 AM | Updated: 09 May 2021, 12:00 AM

वैश्विक महामारी कोरोना ने देशभर में त्राहि-त्राहि मचा दी है। कोरोना की सेकेंड वेव जो कहर लेकर आई, उससे देश का हेल्थ सिस्टम एकदम घुटने पर आ गया। हर जगह अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है। कई लोग कोरोना की वजह से अपनी जान गंवा रहे है, तो कुछ लोगों की मौत स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में भी हो रही है। 

कोरोना का नया वेरिएंट लोगों को काफी नुकसान पहुंचा रहा है। ये फेफड़ों पर असर डाल रहा है, जिसकी वजह से कई मरीजों का ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है और ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ रही है। इसकी वजह से देश में ऑक्सीजन की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है औऱ इसके लिए काफी मारामारी हो रही है। कई मरीज ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से भी दम तोड़ रहे है। 

DRDO ने बनाई ये दवा

वहीं इस बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। बीते दिन ही देश में कोरोना की एक और दवा को DGCI ने मंजूरी दे दी है। इस दवा को DRDO (Defence Research And Development Organization) ने बनाया है। इस दवा की खास बात ये है कि कोरोना की इस दवा से कोरोना के मरीज जल्दी रिकवर कर सकते हैं। साथ ही साथ इस दवा से मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत भी कम पड़ती है। आइए आपको इस दवा के बारे में कुछ ऐसी काम की बातें बता देते हैं, जिसके बारे में आपके लिए जानना जरूरी है…

जल्दी रिकवर होंगे मरीज और…

दवा का नाम है, 2-DG (2-deoxy-D-Glucose)।  दवा को DRDO के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेस (INMAS) और हैदराबाद सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) ने साथ मिलकर तैयार किया। 

अब बात कर लेते हैं इसके क्लीनिकल ट्रायल्स की। ट्रायल में ये दवा सफल साबित हुईं। जिन मरीजों को ये दवा दी गई, वो दूसरे मरीजों की तुलना में जल्दी ठीक हुई। साथ में उनको ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता भी कम रही। 

जानिए कैसे हुए इस दवा के ट्रायल्स?

बता दें कि जब देश में कोरोना की पहली लहर ने दस्तक दी थीं, तब से ही इस दवा को बनाने पर काम चल रहा था। अप्रैल 2020 में DRDO के वैज्ञानिकों ने इस दवा पर रिसर्च किए थे। इसके बाद मई 2020 में DGCI ने इस दवा को सेकेंड फेज के ट्रायल की मंजूरी दी थीं।

दूसरे फेज के ट्रायल मई से अक्टूबर के बीच में हुई। इसमें 11 अस्पतालों को शामिल किया गया था। फेज-2 के ट्रायल में 110 पेशेंट ने हिस्सा लिया था। इसमें ये पाया गया कि बाकी मरीजों की तुलना में करीबन 2.5 पहले दवा लेने वाले मरीज ठीक हो रहे थे।

तीसरे फेज का ट्रायल नवंबर 2020 में हुए थे। इसमें दिल्ली, यूपी, बंगाल, राजस्थान, आंध्र प्रधेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के 27 कोविड अस्पतालों को शामिल किया गया। ट्रायल में ये देखने को मिला कि दवा को लेने वाल मरीजों में ऑक्सीजन पर निर्भरता कम हुई। सबसे खास बात ये थीं कि यही ट्रेंड 65 साल से ऊपर के मरीजों में भी देखने को मिला। 

ये दवा ना तो किसी टैबलेट के रूप में है और ना ही इंजेक्शन। ये एख पाउच में पाउडर की फॉर्म में आती है। इसको पानी में घोलकर पीना होता है। दवा वायरस से प्रभावित सेल्स में जाकर जम जाती है और इसको बढ़ने से रोकती है। ये दवा बहुत जल्द ही देश में उपलब्ध होगी, क्योंकि इसका उत्पादन काफी आसान है। 

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