Brajesh Pathak Batuk News: माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ मौजूद बटुकों की शिखा खींचे जाने के आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस पूरे विवाद के बाद राज्य सरकार अब साफ तौर पर डैमेज कंट्रोल मोड में नजर आ रही है। गुरुवार को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने आवास पर 101 बटुकों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया। उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं, तिलक लगाया और उनकी शिखा का आदर करते हुए आशीर्वाद भी लिया।
यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं था, बल्कि इसे सियासी संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
‘शिखा खींचना महापाप’: ब्रजेश पाठक का सख्त बयान (Brajesh Pathak Batuk News)
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने NDTV से खास बातचीत में कहा, “ब्राह्मणों की शिखा खींचने वालों को महापाप लगेगा। किसी को छूने का भी अधिकार नहीं है।” उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इसे मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के रुख से अलग माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर बीजेपी के भीतर पूरी तरह एक जैसी राय नहीं दिख रही। पहले डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya और अब ब्रजेश पाठक के बयानों से अलग-अलग सुर सामने आए हैं।
बटुकों ने क्या कहा?
डिप्टी सीएम आवास पर पहुंचे बटुकों ने इस पहल को सराहनीय बताया। उनका कहना था, “बटुक की शिखा ही सनातन पहचान है। शिखा खींचना सनातन का अपमान है।” कुछ बटुकों ने पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की।
“बटुकों का सम्मान, हमारा सौभाग्य”
आज आवास पर देव स्वरूप छोटे बटुक ब्राह्मणों ने अतिथि स्वरूप पधारकर हमें और हमारे आवास की धराभूमि को धन्य किया है, सभी बटुक ब्राह्मणों का सपत्नीक आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।
आप सभी के स्नेह, कृपा, और आशीर्वाद से… pic.twitter.com/gnfBFWWIYp
— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) February 19, 2026
बटुकों का कहना था कि उन्हें सम्मान देकर सरकार ने अच्छा संदेश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में सनातन मूल्यों की रक्षा जरूरी है।
शंकराचार्य का तंज – ‘बीजेपी दो विचारों में बंटी’
इस विवाद पर शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम और मुख्यमंत्री के अलग-अलग बयानों से साफ है कि बीजेपी दो विचारों में बंटी हुई है। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि लोग खुद समझें कि सनातन के करीब कौन है। उनके बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
विपक्ष का हमला तेज
समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने ‘पाप’ शब्द पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “सब आएं, सब ही पुण्य कमाएं… शब्द-कर्म के सब पाप मिटाएं।” सपा इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ बड़ा हथियार बनाने में जुटी दिख रही है।
वहीं, सपा नेता Shivpal Yadav ने सीधा सवाल उठाते हुए कहा, “अगर यह पाप है तो डिप्टी सीएम इस्तीफा दे दें। अपमान तो सरकार में ही हुआ है।”
सरकार के भीतर अलग सुर?
योगी सरकार में मंत्री Om Prakash Rajbhar ने कहा कि कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है, लेकिन चोटी खींचने के मुद्दे को तिल का ताड़ बनाया जा रहा है। उनका बयान इस विवाद को कम करने की कोशिश जैसा लगा, मगर इससे सियासी उलझन और बढ़ गई।
दूसरी ओर मंत्री Kapil Dev Agarwal ने कहा कि मामला खत्म हो चुका है। सरकार संतों का सम्मान करती है और जाति के आधार पर किसी का अपमान नहीं होना चाहिए।
सियासत या आस्था का सवाल?
माघ मेले की एक घटना से शुरू हुआ यह विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। सरकार की ओर से सम्मान कार्यक्रम को जहां आस्था के सम्मान के रूप में पेश किया जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक मजबूरी बता रहा है।
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