Border 2 Review: आखिरकार साल 2026 की मौत अवेटेड फिल्म बॉर्डर 2 बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हो गई है, और इसी के साथ आ गया है फिल्म देखने वाले दर्शकों का पहला रिव्यू।। फिल्म के ट्रेलर में सनी देओल का एक डायलॉग सुना होगा आपने , तुम जहां से भी घुसने की कोशिश करोगे,आसमान से, जमीन से, समंदर से, सामने एक हिंदुस्तान फौजी खड़ा पाओगे।…30 साल पहले सनी देओल ने जेपी दत्ता की बॉर्डर में एक भारतीय सिपाही की गर्जना से दुश्मनों के अंदर जो खौंफ पैदा किया था, वो जोश तीस सालों के बाद भी मौजूद है।
बॉर्डर 2 की कहानी तारीफ़ के काबिल
बॉर्डर फिल्म एक ऐसी फिल्म है जो केवल जेपी दत्ता साहब के ही नहीं बल्कि उसके फैंस के दिलों में भी खास जगह रखता है, ऐसे में फिल्म के डायेरेक्टर अनुराग सिंह ने बॉर्डर 2 के जरिए बड़ा रिस्क लिया था, जिसे फिल्म देखकर लगता है कि उन्होंने उसके साथ न्याय किया है। फिल्म के गानों का जादू तो पहले ही चल रहा था लेकिन फिल्म की कहानी को तीस सालों के बाद भी जिस तरह से आगे बढ़ाया गया है वो काबिले तारीफ है। एक तरफ जहां बॉर्डर लौंगेवाला की युद्ध की कहानी कही गई थी तो वहीं बॉर्डर 2 भी 1971 के वॉर की कहानी है लेकिन थोड़े अलग रूप में ।
पाकिस्तान के ऑपरेशन चंगेज खान की शुरुआत
फिल्म की कहानी की बात करें तो ये कहानी घूमती है पाकिस्तान के ऑपरेशन चंगेज खान की शुरुआत पर, जो सही मायने में वॉर का ऐलान था। फिल्म की कहानी में तीन जिगरी दोस्त है, जो एक साथ 1961 में नेशनल वॉर एकेडमी में मिले और साथ ट्रेनिंग करते है 1971 की जंग में अपनी शौर्य-वीरता दिखाने का मौका मिलता है। लेकिन फिल्म के पहले भाग में तीन सिपाही फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (दिलजीत दोसांझ), मेजर होशियार सिंह दहिया (वरुण धवन), लेफ्टिनेंट कमांडर महेंद्र एस. रावत (अहान शेट्टी) की कहानी को दिखाया गया है..जो हर एक फौजी की कहानी है,, इससे हर वो परिवार कनेक्ट कर पाता है जिनके बच्चे फौज का हिस्सा है।
सिपाहियों के साथ साथ उनके परिवार की हिम्मत को भी सलाम
निर्देशक ने उनके परिवारों के प्रति उनकी भावना और देशभक्ति की भावना को एक साथ जोड़ कर सिपाहियों के साथ साथ उनके परिवार की हिम्मत को भी सलाम किया है। इस बार युद्ध तीन तरफ से है- थल से, जल से और वायु से… फिल्म में वो समय दिखाया गया है जब पूर्वी पाकिस्तान की मदद के लिए सेना वहां चली जाती है और संख्या में कम रह जाते है बाकी के हिस्से में..और तब पाकिस्तान भारत पर घुसपैठ करने के लिए तीनों सेना को भेजता है, लेकिन तब भी हमारे सैनिकों ने बहादुरी का परिचय देते हुए पाकिस्तान को धूल चटाई थी। कहीं नहीं बख्शा गया था। हालांकि फिल्म में कुछ कमियां है, लेकिन वो फिल्म की दमदार स्क्रीनप्ले और कहानी के आगे छिप जाती है।
स्पेशल इफेक्ट का बेहतर इस्तेमाल नहीं किया जा सका वर्ना और दमदार सीन्स निकल कर आते। 3 घंटे 19 मिनट की फिल्म लंबी नहीं लगती है। फिल्म के कलाकारों की बात करें तो इस बार सभी ने पिछली बॉर्डर की तरह की कमाल कर दिया है। फिल्म में कलाकार एक फौजी के जोश के साथ साथ एक परिवार के प्रती उनकी संवेदनायें कैसी होती है उसे दिखाने में सफल हुए। सनी देओल हमेशा से ही बेहतर है, लेकिन सरप्राइज पैकेज थे अहान शेट्टी..जिन्होंने फिल्म में बेहतरीन अदाकारी से अपने पिता सुनील शेट्टी की कमी को भरने की पूरी कोशिश की है।































